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Bageshwar News: जिस विश्वविद्यालय में पढ़ा, उसी विवि के कुलपति बने प्रो. रावत
Thu, 13 Jul 2023 12:08 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:08 AM IST
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रैखोली गांव में प्रोफसर डीएस रावत की माता को बधाई देते जिपं सदस्य चंदन रावत। संवाद
बागेश्वर। काफलीगैर तहसील क्षेत्र के रैखोली गांव निवासी प्रो. डीएस रावत कुमाऊं विश्वविद्यालय के नए कुलपति बनाए गए हैं। प्रो. रावत के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्होंने जिस विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की, अब उसी विवि का कुलपति बनने का गौरव उन्हें मिला है।
प्रो. रावत का जन्म एक जनवरी 1970 को धूराफाट क्षेत्र के रैखोली गांव में हुआ था। उनके पिता जीत सिंह रावत वन विभाग में थे जबकि माता मोहिनी रावत गृहिणी हैं। उन्होंने पांचवीं तक राजकीय प्राथमिक विद्यालय रैखोली में और कक्षा छह से नौ तक की पढ़ाई जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बोहाला से की। वह बचपन से ही मेधावी थे इसीलिए उनके पिता ने उन्हें नैनीताल भेज दिया। उन्होंने भारतीय शहीद सैन्य विद्यालय से दसवीं और इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की।
कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर से उन्होंने बीएससी की परीक्षा पास की। स्नातक में वह टॉपर रहे थे। वर्ष 1993 में रसायन विज्ञान में एमएससी उत्तीर्ण करने पर उन्होंने स्वर्ण पदक भी पाया। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ से वर्ष 1997-98 में पीएचडी कर उन्होंने तीन साल तक उद्योग में कार्य किया और बाद में अमेरिका चले गए। करीब 10 महीने बाद वह भारत लौटे। वर्ष 2003 में वह दिल्ली विवि में प्रोफेसर बने। अभी वह दिल्ली विवि में रसायन विज्ञान के सीनियर प्रोफेसर और परीक्षा डीन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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जमीन से जुड़े हैं प्रो. रावत
बागेश्वर। प्रो. डीएस रावत के पिता का निधन हो चुका है। उनकी माता मोहिनी रावत गांव में बहू (छोटे भाई की पत्नी) के साथ रहतीं हैं जबकि उनके छोटे भाई का देहांत हो चुका है। उनके बड़े भाई उमेद रावत असम राइफल्स में मणिपुर में तैनात हैं। फोन पर हुई बात में उमेद ने बताया कि प्रो. रावत जमीन से जुड़े इंसान हैं। बचपन में उन्होंने पढ़ाई के साथ खेतीबाड़ी, पशुपालन समेत सभी घरेलू कार्य किए हैं।
माता से मिलने आते रहते हैं गांव
बागेश्वर। प्रो. रावत की पत्नी विनीता रावत शिक्षिका हैं। उनके बेटे दीवांशु रावत कंप्यूटर इंजीनियर हैं जबकि पुत्री दीपा रावत एलएलबी की तैयारी कर रहीं हैं। उमेद ने बताया कि प्रो. रावत काफी व्यस्त रहते हैं। इसके बावजूद वह समय निकालकर मां से मिलने गांव आते रहते हैं। विगत अप्रैल में वह दोनों भाई गांव आकर करीब पांच दिनों तक साथ रहे।
गांव में बंटी मिठाई, ढोल-नगाड़ों से होगा स्वागत
बागेश्वर। प्रो. रावत के कुमाऊं विवि के कुलपति बनने की खबर सुनते ही गांव में जश्न शुरू हो गया। जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत ने पूरे गांव में मिठाई बांटी। उन्होंने बताया कि प्रो. रावत ने क्षेत्र के साथ पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद ग्रामीण नैनीताल जाकर उनका सम्मान करेंगे और गांव आने पर ढोल, नगाड़ों की धुन पर उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। कपकोट के विधायक सुरेेश गढि़या, भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्र सिंह फर्स्वाण, जिला मंत्री रवि करायत, मोहन सिंह रावत समेत क्षेत्रवासियों ने प्रो. रावत की उपलब्धि को जिले के लिए गौरव का पल बता खुशी जताई है।
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प्रो. रावत का जन्म एक जनवरी 1970 को धूराफाट क्षेत्र के रैखोली गांव में हुआ था। उनके पिता जीत सिंह रावत वन विभाग में थे जबकि माता मोहिनी रावत गृहिणी हैं। उन्होंने पांचवीं तक राजकीय प्राथमिक विद्यालय रैखोली में और कक्षा छह से नौ तक की पढ़ाई जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बोहाला से की। वह बचपन से ही मेधावी थे इसीलिए उनके पिता ने उन्हें नैनीताल भेज दिया। उन्होंने भारतीय शहीद सैन्य विद्यालय से दसवीं और इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की।
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कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर से उन्होंने बीएससी की परीक्षा पास की। स्नातक में वह टॉपर रहे थे। वर्ष 1993 में रसायन विज्ञान में एमएससी उत्तीर्ण करने पर उन्होंने स्वर्ण पदक भी पाया। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ से वर्ष 1997-98 में पीएचडी कर उन्होंने तीन साल तक उद्योग में कार्य किया और बाद में अमेरिका चले गए। करीब 10 महीने बाद वह भारत लौटे। वर्ष 2003 में वह दिल्ली विवि में प्रोफेसर बने। अभी वह दिल्ली विवि में रसायन विज्ञान के सीनियर प्रोफेसर और परीक्षा डीन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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जमीन से जुड़े हैं प्रो. रावत
बागेश्वर। प्रो. डीएस रावत के पिता का निधन हो चुका है। उनकी माता मोहिनी रावत गांव में बहू (छोटे भाई की पत्नी) के साथ रहतीं हैं जबकि उनके छोटे भाई का देहांत हो चुका है। उनके बड़े भाई उमेद रावत असम राइफल्स में मणिपुर में तैनात हैं। फोन पर हुई बात में उमेद ने बताया कि प्रो. रावत जमीन से जुड़े इंसान हैं। बचपन में उन्होंने पढ़ाई के साथ खेतीबाड़ी, पशुपालन समेत सभी घरेलू कार्य किए हैं।
माता से मिलने आते रहते हैं गांव
बागेश्वर। प्रो. रावत की पत्नी विनीता रावत शिक्षिका हैं। उनके बेटे दीवांशु रावत कंप्यूटर इंजीनियर हैं जबकि पुत्री दीपा रावत एलएलबी की तैयारी कर रहीं हैं। उमेद ने बताया कि प्रो. रावत काफी व्यस्त रहते हैं। इसके बावजूद वह समय निकालकर मां से मिलने गांव आते रहते हैं। विगत अप्रैल में वह दोनों भाई गांव आकर करीब पांच दिनों तक साथ रहे।
गांव में बंटी मिठाई, ढोल-नगाड़ों से होगा स्वागत
बागेश्वर। प्रो. रावत के कुमाऊं विवि के कुलपति बनने की खबर सुनते ही गांव में जश्न शुरू हो गया। जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत ने पूरे गांव में मिठाई बांटी। उन्होंने बताया कि प्रो. रावत ने क्षेत्र के साथ पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद ग्रामीण नैनीताल जाकर उनका सम्मान करेंगे और गांव आने पर ढोल, नगाड़ों की धुन पर उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। कपकोट के विधायक सुरेेश गढि़या, भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्र सिंह फर्स्वाण, जिला मंत्री रवि करायत, मोहन सिंह रावत समेत क्षेत्रवासियों ने प्रो. रावत की उपलब्धि को जिले के लिए गौरव का पल बता खुशी जताई है।

रैखोली गांव में प्रोफसर डीएस रावत की माता को बधाई देते जिपं सदस्य चंदन रावत। संवाद

रैखोली गांव में प्रोफसर डीएस रावत की माता को बधाई देते जिपं सदस्य चंदन रावत। संवाद