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Devikund Temple Case: देवीकुंड मंदिर को लेकर डीएम से मिले वाछम के लोग, इस वजह से आमरण अनशन की चेतावनी दी

Thu, 18 Jul 2024 07:24 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 18 Jul 2024 07:24 PM IST
सार

बागेश्वर जिले सुंदरढूंगा घाटी के देवीकुंड में बने मंदिर की जांच के लिए टीम रवाना होने के बाद वाछम के लोगों ने बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी अनुराधा पाल से मुलाकात की।

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People meet DM regarding Devikund temple bageshwar
देवीकुंड मंदिर को लेकर डीएम से मिले वाछम के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागेश्वर जिले सुंदरढूंगा घाटी के देवीकुंड में बने मंदिर की जांच के लिए टीम रवाना होने के बाद वाछम के लोगों ने बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी अनुराधा पाल से मुलाकात की।

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बृहस्पतिवार की शाम को डीएम को सौंपे ज्ञापन में गांव के लोगों ने कहा कि सुंदरढूंगा ग्लेशियर के देवीकुंड में पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने के बाद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया है जबकि वाछम, खाती, सोराग, बदियाकोट के लोगों ने मिलकर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य किया है। कहा कि जीर्णोद्धार करने के लिए पहले दिन हवन-पूजन करते समय स्वास्तिक पर्वत प्रकाश में आया जो कि क्षेत्र और पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है लेकिन कुछ लोग दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध पूरी तरह से राजनीतिक है।

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कहा कि मंदिर को तोड़ने के लिए प्रशासन की टीम रवाना करने का वाछम के लोग विरोध करते हैं। आस्था के प्रतीक मंदिर को न तोड़ा जाए। स्वास्तिक पर्वत का महत्व समझते हुए क्षेत्र का विकास किया जाए। कहा कि मांगों को न मानने पर 21 जुलाई से गांव के लोग आमरण अनशन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में प्रधान प्रतिनिधि चंदन सिंह दानू, सरपंच मोहन सिंह, आन सिंह, ईश्वर सिंह, शोबन सिंह, धाम सिंह, रमेश सिंह, धीरेंद्र सिंह, जोहार सिंह, भगवत सिंह, तारा सिंह आदि शामिल थे।

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बाहर से गई निर्माण सामग्री वापस आएगी:डीएम
डीएम अनुराधा पाल का कहना है कि वाछम के लोग मिलने आए थे। वाछम के लोगों का कहना है कि दवीकुंड आस्था का प्रतीक है। वहां से पौराणिक तरीके से पूजा, अर्चना होती आई है। जब भी नंदाष्टमी का मेला लगता है। वाछम के पुजारी नंगे पैर वहां जाते हैं। देवीकुंड में स्नान कर जल लाते हैं। जल से देवी का जलाभिषेक करते हैं। इस स्थल का गांव के लोगों के लिए धार्मिक महत्व है। प्रशासन के लिए मुद्दा यह है कि आस्था के नाम से जो भी निर्माण किया है। किसकी सहमति से किया है। इसके लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई है। निर्माण सामग्री चोरीछुपे कैसे कैसे ले जाई गई। उसकी जांच की जा रही है। टीम वहां गई है। जो भी बाहर की सामग्री से बना निर्माण होगा, उसे टीम ध्वस्त करके आएगी। पूजा का जो स्थान है।



उसका ध्यान रखा जाएगा। कहा कि भविष्य में स्थानीय सामग्री से नियमानुसार निर्माण हो सकता है। इस पर विचार किया जाएगा। गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए उस पर विचार किया जाएगा। बाहर से जो भी सामग्री गई है। बगैर अनुमति के गई है। उस सामग्री को टीम वापस लेकर आएगी। स्थान देवी का स्थान ही रहेगा। डीएम ने कहा कि इस पर ग्रामीण भी सहमत हैं। भविष्य में देवीकुंड के विकास के लिए नियम, कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी।

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