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घर लौटे परदेसी बुनने लगे भविष्य का तानाबाना
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कांडा के सिमकुना में बंजर खेतों को आबाद करने में जुटे लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : AMAR UJALA
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बागेश्वर/कांडा। लॉकडाउन के कारण घर लौटे परदेसी अब भविष्य का तानाबाना बुनने लगे हैं। कांडा तहसील के सिमकुना के चार परिवारों ने दशकों से बंजर पड़ी भूमि को हराभरा करने की दिशा में कदम उठा दिया है। तीनों परिवारों ने भूमि में अनाज पैदा कर आजीविका चलाने की ठानी है। ऐसे ही और लोग भी आगे आएं तो न केवल बंजर भूमि आबाद होगी बल्कि लोगों को घर पर रोजी-रोटी भी मिलेगी।
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यह सुखद खबर आई है, कांडा तहसील के सिमकुना गांव से। सिमकुना गांव की आबादी करीब 1500 है। यहां अधिकतर लोग गांव में खेती-बाड़ी से रोजीरोटी चलाते हैं लेकिन कई परिवार रोजगार और जरूरी सुविधाओं के लिए बड़े शहरों में पलायन कर चुके हैं। लॉकडाउन के बाद इन लोगों में से कई बेरोजगार हो गए और गांव की ओर लौटने लगे हैं। वे बेरोजगारी को दूर करने के लिए पुश्तैनी खेतीबाड़ी को आबाद करने में जुट गए हैं। सिमकुना गांव के केशव राम, दीवान राम, सबजीत राम, भुवन राम के परिवार अपने बच्चों के गांव लौटने के बाद 30 साल से बंजर पड़ी जमीन को आबाद करने में लग गए हैं। ग्राम प्रधान मोहन लाल ने बताया कि गांव के अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन से जुड़कर अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में बाहर से लौटने वाले लोग भी बेरोजगारी के चलते खेती-किसानी की ओर लौट रहे हैं, यह सुखद है। प्रधान कहते हैं कि इन लोगों को सरकार से मिलने वाली सहायता दिलाने का भरसक प्रयत्न किया जाएगा।
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