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अबकी बार महंगा पड़ेगा प्रचार
Sun, 17 Mar 2019 11:19 PM IST
दीपक नेगी
अंकुर शर्मा/अमर उजाला/बागेश्वर
अंकुर शर्मा/अमर उजाला/बागेश्वर
Published by: दीपक नेगी
Updated Sun, 17 Mar 2019 11:19 PM IST
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जीएसटी
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नेता जी को अबकी बार चुनाव प्रचार महंगा पड़ने वाला है। चुनाव की प्रचार सामग्री पर 5 से 12 फीसदी तक गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का भी भुगतान करना होगा। इससे जहां प्रचार सामग्री की लागत बढ़ जाएगी। वहीं चुनावी खर्च की निर्धारित लिमिट से भी कटौती होगी।
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लोस चुनाव 2019 का बिगुल फुंक चुका है। इन चुनाव के दो साल पूर्व 2017 में जीएसटी लागू हो गया था। जीएसटी में प्रिंटिंग मैटेरियल को भी 5 से 12 फीसदी में श्रेणीबद्ध किया गया है। इधर लोकसभा चुनाव 2014 में वैट सिस्टम लागू था। तब प्रिंटिंग पर पक्का बिल लेने पर पांच फीसदी ही टैक्स देना होता है। इस टैक्स में लीफलेट्स, पोस्टर, बैनर, फ्लैक्सी, होर्डिंग्स शामिल था।
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अब जीएसटी लागू होने के बाद इस प्रचार सामग्री को अलग-अलग टैक्स श्रेणी में बांट दिया गया है। इसमें पांच से 12 फीसदी का टैक्स देना होगा। यानी अगर लीफलेट्स, हैंड बिल्स, छोटे पोस्टर प्रचार के लिए छपवाते हैं तब महज पांच फीसदी टैक्स देना होगा। यदि फ्लैक्सी, होर्डिंग्स, बैनर छपवाया तो 12 फीसदी टैक्स देना होगा। इससे जहां 12 हजार की प्रचार सामग्री महंगी हो गई, वहीं चुनावी खर्च की लिमिट 70 लाख से एक लाख की जगह 12 हजार रुपये ज्यादा घटेगा इससे खर्च भी सीमित होगा।
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टेंट, कुर्सी के भी देने होंगे 18 फीसदी टैक्स
जीएसटी में टेंट पर भी 18 फीसदी टैक्स है। इस तरह एक बड़े नेता की रैली, जन सभा में टेंट का खर्च बढ़ जाएगा। अगर एक रैली का खर्च 1 लाख रुपये है तो 18 हजार तो टैक्स होगा। चुनावी खर्च में जहां पाई-पाई के खर्च की निगरानी हो रही है ऐसे में 18 हजार टैक्स देना परेशानी का सबब हो सकता है।
चुनाव के प्रचार के लिए चाय का हो या रैली का हर खर्च को चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। 10 हजार तक का नकद भुगतान उम्मीदवार कर सकता है इससे अधिक का भुगतान चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर ही होगा। - नीतू भंडारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी