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नरगड़ा के लोगों को मूलभूत सुविधाओं की दरकार
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बागेश्वर के नरगड़ा गांव में क्षतिग्रस्त रास्ते से गुजरतीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। एक ओर देश आजादी का अमृत काल मना रहा है, वहीं दूसरी ओर कई गांव स्वतंत्र देश में भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ऐसे ही गांवों में शामिल है, कपकोट तहसील का नरगड़ा गांव। तहसील मुख्यालय से मात्र आठ किमी की दूरी पर बसे गांव को अब तक मोटर मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है।
ग्रामीण पेयजल, स्वास्थ्य और सिंचाई आदि परेशानियों से जूझ रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में गांव की करीब 40 प्रतिशत आबादी पलायन कर चुकी है। नरगड़ा ग्राम पंचायत सात तोकों से मिलकर बना है। गांव में 89 परिवार निवास करते हैं, हालांकि अधिकतर परिवारों में केवल बुजुर्ग की गांव में बसे हैं।
बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में युवा पीढ़ी गांव से पलायन करती जा रही है। गांव के लिए मोटर मार्ग तो स्वीकृत है लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। मानसून काल से पैदल रास्ते भी ध्वस्त पड़े हैं। पैदल रास्ता कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। बदहाल रास्ते से तहसील मुख्यालय तक आने के लिए आठ किमी की दौड़ लगानी पड़ती है।
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बीमार होने पर लोगों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। हालांकि गांव से तीन किमी की चढ़ाई पार करने पर मोटर मार्ग बना है, लेकिन इस मार्ग से कपकोट पहुंचने के लिए 17 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पांच किमी दूरी पर फरसाली गांव में है। लोग इलाज करवाने के लिए कपकोट सीएचसी पर निर्भर हैं। गांव के किटौरा और रसगढ़ा तोक में पेयजल संकट है। मानसून सीजन की पहली बारिश में पेयजल लाइन टूट गई थी। अब तक लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
तीन साल से काट रहे तहसील के चक्कर
बागेश्वर। नरगड़ा की ग्राम प्रधान भागीरथी देवी ने बताया कि सुविधाओं की मांग के लिए तीन साल से कभी वह और कभी उनके पति तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम को प्रत्येक समस्या को लेकर ज्ञापन दिया गया है। बावजूद इसके गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
नरगड़ा गांव की समस्याओं के लिए मिले सभी ज्ञापनों को संबंधित विभागों को भेजा गया है। विभागीय अधिकारियों को जल्द से जल्द समस्याओं का संज्ञान लेकर प्राथमिकता से निदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
पारितोष वर्मा, एसडीएम कपकोट।
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ग्रामीण पेयजल, स्वास्थ्य और सिंचाई आदि परेशानियों से जूझ रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में गांव की करीब 40 प्रतिशत आबादी पलायन कर चुकी है। नरगड़ा ग्राम पंचायत सात तोकों से मिलकर बना है। गांव में 89 परिवार निवास करते हैं, हालांकि अधिकतर परिवारों में केवल बुजुर्ग की गांव में बसे हैं।
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बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में युवा पीढ़ी गांव से पलायन करती जा रही है। गांव के लिए मोटर मार्ग तो स्वीकृत है लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। मानसून काल से पैदल रास्ते भी ध्वस्त पड़े हैं। पैदल रास्ता कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। बदहाल रास्ते से तहसील मुख्यालय तक आने के लिए आठ किमी की दौड़ लगानी पड़ती है।
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बीमार होने पर लोगों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। हालांकि गांव से तीन किमी की चढ़ाई पार करने पर मोटर मार्ग बना है, लेकिन इस मार्ग से कपकोट पहुंचने के लिए 17 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पांच किमी दूरी पर फरसाली गांव में है। लोग इलाज करवाने के लिए कपकोट सीएचसी पर निर्भर हैं। गांव के किटौरा और रसगढ़ा तोक में पेयजल संकट है। मानसून सीजन की पहली बारिश में पेयजल लाइन टूट गई थी। अब तक लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
तीन साल से काट रहे तहसील के चक्कर
बागेश्वर। नरगड़ा की ग्राम प्रधान भागीरथी देवी ने बताया कि सुविधाओं की मांग के लिए तीन साल से कभी वह और कभी उनके पति तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम को प्रत्येक समस्या को लेकर ज्ञापन दिया गया है। बावजूद इसके गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
नरगड़ा गांव की समस्याओं के लिए मिले सभी ज्ञापनों को संबंधित विभागों को भेजा गया है। विभागीय अधिकारियों को जल्द से जल्द समस्याओं का संज्ञान लेकर प्राथमिकता से निदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
पारितोष वर्मा, एसडीएम कपकोट।