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मशरूम उत्पादकों पर पड़ी लॉकडाउन की मार
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बागेश्वर में मशरूम उत्पादक प्रताप सिंह गढ़िया के वहां पैदा हुई मशरूम। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। लॉकडाउन की मार मशरूम उत्पादकों पर भी पड़ी है। लॉकडाउन के बाद से मशरूम की बिक्री प्रभावित हुई है। बागेश्वर के प्रमुख मशरूम उत्पादक प्रताप सिंह गढ़िया और भगवत सिंह कोरंगा बताते हैं कि लॉकडाउन की अवधि में खुलने वाली सब्जी की दुकानों पर भी अब मशरूम नहीं बिक रहा है।
मशरूम के खराब होने की डर से स्थानीय सब्जी विक्रेताओं ने भी इसकी खरीदारी कम कर दी है। इसका असर सीधे मशरूम का उत्पादन करने वाले लोगों पर पड़ा है। मशरूम उत्पादक प्रताप सिंह गढ़िया ने बताया कि लॉकडाउन के बादसे मशरूम की खरीदारी बंद है। सुबह सात बजे से एक बजे के बीच खुलने वाली दुकानों में भी इसकी बिक्री नहीं हो रही है। लोग उनके घर पर आकर मशरूम खरीदते थे लेकिन अब लोग भी मशरूम खरीदने के लिए नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बिक्री नहीं होने उनकी करीब 50 किलो मशरूम बर्बाद हो गई है, जिससे उन्हें 10 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। बताया कि दिसंबर में उन्होंने 20 क्विंटल बटन मशरूम की पैदावार की थी, जिसमें से 50 किलो बर्बाद हो गई है। वहीं मशरूम उत्पादक भगवत सिंह कोरंगा कहते हैं कि अब भी उनके पास काफी मशरूम पड़ी है। बिक्री नहीं हुई तो वह खराब हो जाएगी।
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मशरूम के खराब होने की डर से स्थानीय सब्जी विक्रेताओं ने भी इसकी खरीदारी कम कर दी है। इसका असर सीधे मशरूम का उत्पादन करने वाले लोगों पर पड़ा है। मशरूम उत्पादक प्रताप सिंह गढ़िया ने बताया कि लॉकडाउन के बादसे मशरूम की खरीदारी बंद है। सुबह सात बजे से एक बजे के बीच खुलने वाली दुकानों में भी इसकी बिक्री नहीं हो रही है। लोग उनके घर पर आकर मशरूम खरीदते थे लेकिन अब लोग भी मशरूम खरीदने के लिए नहीं आ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि बिक्री नहीं होने उनकी करीब 50 किलो मशरूम बर्बाद हो गई है, जिससे उन्हें 10 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। बताया कि दिसंबर में उन्होंने 20 क्विंटल बटन मशरूम की पैदावार की थी, जिसमें से 50 किलो बर्बाद हो गई है। वहीं मशरूम उत्पादक भगवत सिंह कोरंगा कहते हैं कि अब भी उनके पास काफी मशरूम पड़ी है। बिक्री नहीं हुई तो वह खराब हो जाएगी।
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