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तेंदुए ने गाय और कुत्ते को बनाया निवाला

Wed, 14 Nov 2018 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Wed, 14 Nov 2018 12:22 AM IST
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leopard killed cow and a dog
बागेश्वर के जंगल में आदमखोर की तलाश करते शिकारी लखपत और सहयोगी। - फोटो : अमर उजाला
नगर और आसपास आदमखोर के आतंक के बीच तेंदुए ने एक गाय और कुत्ते को निवाला बना लिया। ट्यूशन जा रही एक बच्ची गाय के शिकार के दौरान तेंदुए के हमले से बाल-बाल बची। नगर के मंडलसेरा से लेकर, घटबगड़, बागनाथ वार्ड, द्यांगण, नदीगांव में तेंदुआ रात भर घरों की छत पर गुर्राता रहा।  
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सोमवार आधी रात के वक्त तेंदुए ने मंडलसेरा में दस्तक दी। इस बीच तेंदुए ने सड़क किनारे एक लावारिस गाय का शिकार किया। तेंदुए को सुबह करीब साढ़े पांच बजे पुराने सीएमओ कार्यालय के पास गाय को निवाला बनाते हुए देखा गया। इस बीच एक छात्रा ट्यूशन पढ़ने जा रहीं थीं। तभी स्थानीय निवासी हरीश चंद्र ने पास ही तेंदुए को शिकार को निवाला बनाते हुए देखा।
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हरीश ने छात्रा को सचेत करते हुए मौके पर जाने से रोक दिया। दूसरी ओर रातभर तेंदुआ मंडलसेरा के घरों छत और सड़कों पर गुर्राता रहा। देर रात ही तेंदुए ने घटबगड़ और बागनाथ वार्ड में भी दस्तक दी। तेंदुए ने घटबगड़ वार्ड में एक आवारा कुत्ते का शिकार भी किया। इससे पहले तेंदुआ आधी रात तक घरों की छत पर गुर्राता रहा।  
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शिकारी लखपत ने संभाला मोर्चा   
आदमखोर के आतंक से निजात दिलाने के लिए शिकारी लखपत ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार शाम बागेश्वर पहुंचते ही शिकारी ने आदमखोर की तलाश मेें नगर और आसपास सटे जंगलों में रैकी की। इसके साथ ही उसे ढेर करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।   

देर रात तक कांबिंग के बाद भी आमदखोर के सटीक सुराग नहीं मिले। शिकारी लखपत ने बताया कि सुबह तड़के तक आदमखोर को ट्रैस करने का काम चलता रहेगा। इधर, शिकारी लखपत के साथ ही पौड़ी के शिकारी जॉय व्हीकिल ने भी वन कर्मियों के साथ आदमखोर की तलाश में जंगल मेें कांबिंग की। वन, पुलिस, राजस्व विभाग की टीमों ने भी प्रभावित क्षेत्रों में गश्त की। 


रातभर तेंदुए के आतंक से ठीक से सो नहीं सके। सुबह एक बालिका तेंदुए के हमले से बाल-बाल बची। बच्चों का स्कूल जाना तक बंद हो गया है। 
- हरीश चंद्र लोबियाल 
 
शाम ढलने और सुबह तड़के तक घर से बाहर निकलने में डर लग रहा है। छोटे बच्चों की चिंता बनी है। अभी तक आदमखोर नहीं पकड़ा गया है। इससे और हमलों का खतरा भी बना है।  
- अमरा देवी 
 
वन विभाग और सरकारी मशीनरी अब तक आदमखोर से निपटने में नाकामयाब साबित हुई है। आदमखोरों के आतंक से निजात के लिए ठोस, प्रभावी कार्ययोजना की जरूरत है।  
- सुरेश चंद्र पांडे 

आदमखोर के हमलों का खतरा लगातार बना है लेकिन अबतक वह खुलेआम घूम रहा है। आतंक के चलते घर से बाहर निकलना और बच्चों को अकेले छोड़ना तक दूभर हो गया है।  
- मंजू कनवाल 
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