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Bageshwar News: मैदान की कमी ने फीका किया दशहरे का रंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम न होने से दर्शकों में मायूसी
Tue, 20 Oct 2026 11:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:41 PM IST
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अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा का ऐतिहासिक दशहरा इस वर्ष अपनी पूरी भव्यता के साथ संपन्न तो हुआ लेकिन एक बड़ी कमी ने उत्सव के उत्साह को थोड़ा धीमा कर दिया। दशहरा महोत्सव के दौरान इस बार पारंपरिक और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो सका, जिससे महोत्सव में पहुंचे हजारों दर्शकों और स्थानीय लोगों को भारी मायूसी हाथ लगी।
दशहरा महोत्सव के रंगारंग कार्यक्रमों के रद्द होने के पीछे आयोजन स्थल की भौगोलिक मजबूरी मुख्य कारण रही। इस बार पुतला दहन और मुख्य कार्यक्रम एसएसजे परिसर स्थित जूलॉजी मैदान में आयोजित किया गया था। जूलॉजी मैदान का आकार काफी छोटा होने के कारण वहां पुतलों को खड़ा करने और उमड़ने वाले जनसैलाब को नियंत्रित करने के लिए ही जगह बेहद कम बची थी। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए सांस्कृतिक मंच तैयार करना नामुमकिन था। दशहरा महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने दशहरा महोत्सव के आयोजन के लिए उचित जगह नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है।
समिति के अनुसार महोत्सव के भव्य और व्यवस्थित आयोजन के लिए इस बार भी प्रशासन की ओर से स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्पोर्ट्स स्टेडियम आवंटित नहीं किया गया। यदि स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित होता तो वहां पर्याप्त जगह होने के कारण दर्शकों को बैठने की सुविधा भी मिलती और पूर्व वर्षों की भांति भव्य सांस्कृतिक मंच भी सजता। स्टेडियम न मिलने की इसी तकनीकी और प्रशासनिक समस्या के कारण समिति को भारी मन से सांस्कृतिक कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। इधर दशहरा समिति के अध्यक्ष अजीत कार्की ने बताया कि अगर अगली बार जीआईसी मैदान तक रोड नहीं पहुंची तो वह स्टेडियम में घुसकर पुतला जलाएंगे। उन्होंने कहा कि यह बातें उन्होंने कार्यक्रम में अपने संबोधन में भी कही है।
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आयोजन के लिए स्थायी जगह की दरकार: वैभव
दशहरा महोत्सव समिति के सचिव वैभव पांडे ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थगित होने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा दशहरे की भव्यता को देखते हुए इसके सफल आयोजन के लिए पर्याप्त और विस्तृत स्थान की सख्त जरूरत है। जगह की भारी किल्लत के कारण ही हमें बेहद मजबूर होकर अपने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रोकना पड़ा। प्रशासन को या तो स्पोर्ट्स स्टेडियम में महोत्सव आयोजित करने की अनुमति देनी चाहिए या फिर भविष्य के लिए किसी अन्य बड़े मैदान का विकल्प तैयार करना चाहिए। पूर्व में जीआईसी मैदान को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा गया था और वहां तक सुगम पहुंच (सड़क मार्ग) विकसित करने की चर्चाएं भी प्रशासनिक स्तर पर हुई थीं लेकिन धरातल पर अब तक वह योजना आकार नहीं ले पाई है। हमारी प्रशासन से पुरजोर मांग है कि सांस्कृतिक नगरी की इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए आयोजन स्थल की समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए।
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दशहरा महोत्सव के रंगारंग कार्यक्रमों के रद्द होने के पीछे आयोजन स्थल की भौगोलिक मजबूरी मुख्य कारण रही। इस बार पुतला दहन और मुख्य कार्यक्रम एसएसजे परिसर स्थित जूलॉजी मैदान में आयोजित किया गया था। जूलॉजी मैदान का आकार काफी छोटा होने के कारण वहां पुतलों को खड़ा करने और उमड़ने वाले जनसैलाब को नियंत्रित करने के लिए ही जगह बेहद कम बची थी। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए सांस्कृतिक मंच तैयार करना नामुमकिन था। दशहरा महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने दशहरा महोत्सव के आयोजन के लिए उचित जगह नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है।
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समिति के अनुसार महोत्सव के भव्य और व्यवस्थित आयोजन के लिए इस बार भी प्रशासन की ओर से स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्पोर्ट्स स्टेडियम आवंटित नहीं किया गया। यदि स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित होता तो वहां पर्याप्त जगह होने के कारण दर्शकों को बैठने की सुविधा भी मिलती और पूर्व वर्षों की भांति भव्य सांस्कृतिक मंच भी सजता। स्टेडियम न मिलने की इसी तकनीकी और प्रशासनिक समस्या के कारण समिति को भारी मन से सांस्कृतिक कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। इधर दशहरा समिति के अध्यक्ष अजीत कार्की ने बताया कि अगर अगली बार जीआईसी मैदान तक रोड नहीं पहुंची तो वह स्टेडियम में घुसकर पुतला जलाएंगे। उन्होंने कहा कि यह बातें उन्होंने कार्यक्रम में अपने संबोधन में भी कही है।
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आयोजन के लिए स्थायी जगह की दरकार: वैभव
दशहरा महोत्सव समिति के सचिव वैभव पांडे ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थगित होने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा दशहरे की भव्यता को देखते हुए इसके सफल आयोजन के लिए पर्याप्त और विस्तृत स्थान की सख्त जरूरत है। जगह की भारी किल्लत के कारण ही हमें बेहद मजबूर होकर अपने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रोकना पड़ा। प्रशासन को या तो स्पोर्ट्स स्टेडियम में महोत्सव आयोजित करने की अनुमति देनी चाहिए या फिर भविष्य के लिए किसी अन्य बड़े मैदान का विकल्प तैयार करना चाहिए। पूर्व में जीआईसी मैदान को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा गया था और वहां तक सुगम पहुंच (सड़क मार्ग) विकसित करने की चर्चाएं भी प्रशासनिक स्तर पर हुई थीं लेकिन धरातल पर अब तक वह योजना आकार नहीं ले पाई है। हमारी प्रशासन से पुरजोर मांग है कि सांस्कृतिक नगरी की इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए आयोजन स्थल की समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए।