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हाइड्रो पावर से जुड़े 150 से अधिक लोगों की नौकरी पर संकट के बादल
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कपकोट में बना उत्तर भारत हाइड्रो पावर कंपनी का प्रोजेक्ट।
- फोटो : BAGESHWAR
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कपकोट/बागेश्वर। लगातार हो रहे घाटे के कारण कपकोट की उत्तर भारत हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी बंदी के कगार पर पहुंच गई है जिससे कंपनी में कार्यरत करीब 150 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल गहरा रहे हैं। प्रबंधन ने यूपीसीएल पर नई लाइन बिछाने में देरी का आरोप लगाया है। बताया कि क्षमता का मात्र 40 प्रतिशत उत्पादन होने से कंपनी का घाटा बढ़ गया है। इससे उबरने के लिए कंपनी ने शासन, प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
कपकोट की इस कंपनी ने 2014 और 2016 से सरयू द्वितीय, सरयू तृतीय के नाम से दो प्रोजेक्ट लगाए हैं। इनमें करीब 150 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इनमें 23 एमवी तक पनबिजली उत्पादन किया जा सकता है, जबकि पर्वतीय पावर लिमिटेड (पीपीएल) मुनार में पांच एमवी बिजली बन सकती है। इस बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए डॉग कंडक्टर (कम क्षमता) वाली लाइन बनी थी। इससे मात्र 15 एमवी बिजली का पारेषण (ट्रांसमिशन) हो रहा है, जबकि इन कंपनियों को 28 एमवी बिजली भेजने के लिए बेहतर लाइन चाहिए। इस जरूरत को पूरा करने के लिए पैंथर कंडक्टर (अधिक क्षमता) वाली 33 केवी लाइन चाहिए।
नई लाइन का कार्य द्वितीय कार्यखंड यूपीसीएल काठगोदाम को सौंपा गया। इसके लिए अगस्त 16 से मार्च 2019 तक वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चली। इस देरी के कारण करीब पांच माह पहले लाइन बनाने का काम शुरू हुआ लेकिन इसके बाद भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। अब यह काम अगले माह पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि अभी 132 केवी उपकेंद्र भी चालू नहीं हो सका है। इस देरी के कारण कंपनी को घाटा हो गया। इसके बंद होने का खतरा है।
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कंपनी के प्रबंधक नरेश गोयल ने बुधवार को डीएम रंजना राजगुरु को हालात की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई। कहा कंपनी के मुताबिक यह लाइन दिसंबर 2016 तक बननी थी। तभी वह 10 साल की तय अवधि में लोन चुका पाते, लेकिन लाइन बनाने में देरी के कारण घाटा हुआ है। डीएम ने उनकी बात शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
कोट : कपकोट-बागेश्वर के बीच पैंथर कंडक्टर वाली 33 केवी लाइन तेजी से बनाई जा रही है। करीब 10 किमी लंबी लाइन का काम बचा है। यह कार्य अक्तूबर 19 तक पूरा होना है। अगर बारिश नहीं हुई तो 10-15 दिन में काम पूरा हो जाएगा। - बीएम भट्ट, ईई, द्वितीय कार्यखंड, यूपीसीएल काठगोदाम
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कपकोट की इस कंपनी ने 2014 और 2016 से सरयू द्वितीय, सरयू तृतीय के नाम से दो प्रोजेक्ट लगाए हैं। इनमें करीब 150 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इनमें 23 एमवी तक पनबिजली उत्पादन किया जा सकता है, जबकि पर्वतीय पावर लिमिटेड (पीपीएल) मुनार में पांच एमवी बिजली बन सकती है। इस बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए डॉग कंडक्टर (कम क्षमता) वाली लाइन बनी थी। इससे मात्र 15 एमवी बिजली का पारेषण (ट्रांसमिशन) हो रहा है, जबकि इन कंपनियों को 28 एमवी बिजली भेजने के लिए बेहतर लाइन चाहिए। इस जरूरत को पूरा करने के लिए पैंथर कंडक्टर (अधिक क्षमता) वाली 33 केवी लाइन चाहिए।
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नई लाइन का कार्य द्वितीय कार्यखंड यूपीसीएल काठगोदाम को सौंपा गया। इसके लिए अगस्त 16 से मार्च 2019 तक वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चली। इस देरी के कारण करीब पांच माह पहले लाइन बनाने का काम शुरू हुआ लेकिन इसके बाद भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। अब यह काम अगले माह पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि अभी 132 केवी उपकेंद्र भी चालू नहीं हो सका है। इस देरी के कारण कंपनी को घाटा हो गया। इसके बंद होने का खतरा है।
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कंपनी के प्रबंधक नरेश गोयल ने बुधवार को डीएम रंजना राजगुरु को हालात की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई। कहा कंपनी के मुताबिक यह लाइन दिसंबर 2016 तक बननी थी। तभी वह 10 साल की तय अवधि में लोन चुका पाते, लेकिन लाइन बनाने में देरी के कारण घाटा हुआ है। डीएम ने उनकी बात शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
कोट : कपकोट-बागेश्वर के बीच पैंथर कंडक्टर वाली 33 केवी लाइन तेजी से बनाई जा रही है। करीब 10 किमी लंबी लाइन का काम बचा है। यह कार्य अक्तूबर 19 तक पूरा होना है। अगर बारिश नहीं हुई तो 10-15 दिन में काम पूरा हो जाएगा। - बीएम भट्ट, ईई, द्वितीय कार्यखंड, यूपीसीएल काठगोदाम