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कुचौली गांव में कुशंडी ऋषि की हवन कुंड खोज निकाली

Sat, 08 Apr 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Sat, 08 Apr 2017 11:03 PM IST
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In Kuchauli village, Kushandi sage discovered Havan Kund
कुचौली गांव में मिले हवनकुंड की पूजा करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

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 जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर कुचौली गांव में ग्रामीणों को वर्षों पूर्व मलबे में दबा एक हवन कुंड मिला है। ग्रामीणों ने वहां अब पूजा अर्चना शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थल पर कुंड मिला है। वहां वर्षों पूर्व कुशंडी ऋषि ने तपस्या की थी। मुनि ने वहां रहने के लिए गुफा और धर्मशाला बनाई थी। वह भी मलबे में दबे हैं। उन्हें भी खोजने का काम शुरू कर दिया है। 


भद्रकाली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष और कुचौली गांव निवासी योगेश पंत के अनुसार उनका गांव कुशंडी ऋषि की तपोभूमि रही है। ऋषि के तप करने से इसका नाम पहले कुसौली था जो बिगड़कर अब कुचौली हो गया है। उन्होंने अपने बुजुर्गों से गांव में कुशंडी ऋषि की गाथा और उनकी तपस्थली के बारे में सुना था। जिस जगह पर उन्होंने तप किया था वह भूस्खलन के मलबे से दबी हुई है। पहले अनेक लोगों ने उस जगह को खोजने का प्रयास किया लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। 
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उन्होंने उस जगह को खोज निकालने की ठानी। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार छह अप्रैल को कुछ लोगों के सहयोग से कुशंडी ऋषि की तपस्थली से मलबा हटाने का काम शुरू किया। करीब चार पांच फीट गहरे तक मलबा हटाने पर उन्हें वहां हवन कुंड दिखाई दिया। कुंड नजर आते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। कुंड की सफाई के बाद विधिवत पूजा की गई। इस काम में स्वतंत्रता संग्राम उत्तराधिकारी परिषद के उपाध्यक्ष योगेश चंद्र, रमाकांत पंत आदि का सहयोग मिला। 
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कहा कि अब वह गुफा और धर्मशाला खोजने का प्रयास कर रहे हैं। पंत ने बताया कि पहले गांव में ब्राह्मणों के 28 परिवार थे जो रोजगार और अन्य कारणों से इधर उधर पलायन कर चुके हैं, जबकि  अब गांव में अनुसूचित जाति के 30 35 परिवार रह गए हैं। मंदिर कमेटी के मनीष पांडे ने शासन प्रशासन से समस्याओं के समाधान में सहयोग की अपील की है। पुरातत्व अंवेषक अल्मोड़ा चंद्र सिंह चौहान का कहना है कि कुंड किस काल है, इसके बारे में बिना स्थलीय निरीक्षण के कुछ नहीं बताया जा सकता है। 

 
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