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बगैर सिग्नल के कैसे होगा डिजिटल पेमेंट का सपना पूरा
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Sat, 03 Dec 2016 11:30 PM IST
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जिले के सुदूरवर्ती कई गांवों में संचार सुविधा नहीं होने के कारण वहां मोबाइल फोन शोपीस बने हुए हैं। लोगों को मोबाइल फोन पर बात करने के लिए पहाड़ियों पर चढ़ना उतरना पड़ता है। बोराचक झारकोट, गोगिना समेत दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां इंटरनेट तो दूर मोबाइल फोनों पर घंटी घनघनाने की भी बड़ी चुनौती है। उन क्षेत्रों में घटने वाली किसी घटना की सूचना तीसरे दिन तहसील मुुुख्यालय पर पहुंचती है। इन हालातों के बीच अब कैश लेस इकॉनोमी और डिजिटल पेमेंट को लेकर चल रही कवायद लोगों के लिए किसी सपने से भी कम नहीं है। वह कहते हैं कैश लेस इकॉनामी सुविधाजनक तो है लेकिन बगैर संचार सेवा यह कैसे कामयाब होगी।
इन दिनों 500 और 1000 के नोट बंद होने से कैश लेस इकॉनोमी, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल फोनों से होने वाले इंटरनेट बैंकिंग की बात जगह जगह जोरों पर है। जिले की भौगोलिक स्थिति इतनी जटिल है कि जहां मोबाइल फोन टावर हैं भी वहां की आड़ी तिरछी पहाड़ियां सिग्नलों को मोबाइल फोनों तक आने ही नहीं देती। बागेश्वर ब्लॉक के पल्ला कमस्यार के सिमकूना, देवतोली, धारी मध्या, बगराटी, बोहाला, तुपेड़, दोफाड़, कपकोट ब्लॉक के कन्यालीकोट, जगथाना, पुड़कुनी, बोरबलड़ा, कुंवारी, बड़ेत, नौकोड़ी, हरसिंग्याबगड़, गोगिना, मल्खाडुंगर्चा, रातिरकेठी, हाम्टीकापड़ी, नामतीचेटाबगड़, खेती, लाथी, चुचेर, सनगाड़, बास्ती, गडेरा, जारती, जुनायल समेत दर्जनों गांवों में लैंड लाइन फोन की कोई सुविधा नहीं है। दो सौ से भी अधिक तोक गांवों में बिजली की रोशनी तक नहीं पहुंची है।
ग्रामीण हर्ष सिंह कोरंगा, पोखर सिंह दानू, मालती देवी, प्रेमा रावत, पुष्पा आर्या ने कहा कि उनके गांवों में मोबाइल फोन की सुविधा नहीं हैै तो मोबाइल फोन से रुपए का आदान प्रदान कैसे होगा। कैश लेस व्यवस्था तो अच्छी है लेकिन केंद्र सरकार को इसे संचालित करने से पहले गांवों में लैंड लाइन, इंटरनेट और ब्राडबैंड सेवा देनी चाहिए। संचार सुविधा नहीं होने से उन्हें रसोई गैस की बुकिंग कराने में भारी दिक्कतें होती हैं।
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इन दिनों 500 और 1000 के नोट बंद होने से कैश लेस इकॉनोमी, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल फोनों से होने वाले इंटरनेट बैंकिंग की बात जगह जगह जोरों पर है। जिले की भौगोलिक स्थिति इतनी जटिल है कि जहां मोबाइल फोन टावर हैं भी वहां की आड़ी तिरछी पहाड़ियां सिग्नलों को मोबाइल फोनों तक आने ही नहीं देती। बागेश्वर ब्लॉक के पल्ला कमस्यार के सिमकूना, देवतोली, धारी मध्या, बगराटी, बोहाला, तुपेड़, दोफाड़, कपकोट ब्लॉक के कन्यालीकोट, जगथाना, पुड़कुनी, बोरबलड़ा, कुंवारी, बड़ेत, नौकोड़ी, हरसिंग्याबगड़, गोगिना, मल्खाडुंगर्चा, रातिरकेठी, हाम्टीकापड़ी, नामतीचेटाबगड़, खेती, लाथी, चुचेर, सनगाड़, बास्ती, गडेरा, जारती, जुनायल समेत दर्जनों गांवों में लैंड लाइन फोन की कोई सुविधा नहीं है। दो सौ से भी अधिक तोक गांवों में बिजली की रोशनी तक नहीं पहुंची है।
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ग्रामीण हर्ष सिंह कोरंगा, पोखर सिंह दानू, मालती देवी, प्रेमा रावत, पुष्पा आर्या ने कहा कि उनके गांवों में मोबाइल फोन की सुविधा नहीं हैै तो मोबाइल फोन से रुपए का आदान प्रदान कैसे होगा। कैश लेस व्यवस्था तो अच्छी है लेकिन केंद्र सरकार को इसे संचालित करने से पहले गांवों में लैंड लाइन, इंटरनेट और ब्राडबैंड सेवा देनी चाहिए। संचार सुविधा नहीं होने से उन्हें रसोई गैस की बुकिंग कराने में भारी दिक्कतें होती हैं।
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