घट गई गोमती की ‘कल-कल’
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विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शासन से गोमती का जलस्तर बढ़ाने के लिए पर्याप्त उपाय करने की मांग की है। ग्वालदम के समीप गोमुख से निकलने वाली गोमती में दस साल पहले तक पानी उफान पर रहता था। भारी निर्माण से पेड़ों के कटने और रेता बजरी के खनन, औसत बारिश नहीं होने के कारण इसका जलस्तर हर साल घटता जा रहा है।
हालात यह हैं कि अब इस सदानीरा में पानी की जगह पत्थर ही पत्थर ही दिखाई दे रहे हैं। गोमती से कफलखेत नहर निकलती थी पानी कम होने और कृषि क्षेत्र में कंक्रीट का जंगल खड़ा होने के कारण सिंचाई विभाग ने अब नहर को परित्याज्य कर दिया है।
गोमती से कुल 12 नहरें बनी हैं। इनमें से 2.42 किमी लंबी कंस्यारी नहर इससे 52 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 6.83 किमी लंबी ग्वाड़ पजेना नहर से 50 हेक्टेयर, 3.62 किमी लंबी तल्ली हाट नहर से 21 हेक्टेयर, 5.5 किमी लंबी पिंगलो नहर से 60 हेक्टेयर, 1.61 किमी लंबी बयालीसेरा नहर से 13 हेक्टेयर, 6.24 किमी लंबी मन्युड़ा नहर से 74 हेक्टेयर, 8.5 लंबी रातसेरा नहर से 46 हेक्टेयर, 1.4 किमी लंबी रौल्याना नहर से सात हेक्टेयर, 2.5 किमखेत नहर से 12 हेक्टेयर, 6.60 किमी लंबी पैड़ातेला नहर से छह हेक्टेयर, 7.7 किमी लंबी खोली विस्तार ओर 4.83 किमी द्यांगण नहर से 40 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।
बारिश नहीं होने से नदी का जलस्तर घटता जा रहा है। सिंचाई विभाग ने नदी में मेड़ बनाकर नहरों में पानी चलाने की व्यवस्था तो की है, लेकिन कृषि क्षेत्र होने से पानी अंतिम खेत तक पहुंचाने में काश्तकारों के पसीने छूट रहे हैं। सिंचाई विभाग के तमाम दावों के बावजूद कंस्यारी, मन्युड़ा और खोली नहर में पानी अपेक्षा कम चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कम पानी मिलने से उन्हें रात खेतोें में ही बितानी पड़ रही हैं।
एई एनके सती कहते हैं कि सभी नहरें हेड से टेल तक चल रही हैं, जिन गांवोें के काश्तकारों में आपसी किच-किच नहीं है वहां सिंचाई का काम नियमानुसार चल रहा है। किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिले इसके लिए नहरों में बारबंदी लागू की गई है। काश्तकार नियमानुसार सिंचाई करें तो किसी को भी पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। यदि एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो जरूर कुछ परेशानियां बढ़ सकती हैं।