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विधायक जी! चुनाव से पहले बना दो पैदल पुल, नहीं तो जनता खिसका देगी जमीन
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बागेश्वर के भकूना में ट्राली से नदी पार करते पूर्व विधायक फर्स्वाण। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते देख राजनीतिक पार्टियों पर सियासी रंग गहराने लगा है। एक-दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिसके चलते लंबे समय से चली आ रही समस्याएं भी उजागर होने लगी हैं। ताजा मामला कालापैरकापड़ी गांव के भकुना तोक से पिथौरागढ़ के नाचनी बाजार को जोड़ने के लगाई गई ट्रॉली का है। पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने फेसबुक लाइव करते हुए विधायक बलवंत सिंह भौर्याल को चुनाव से पहले पुल निर्माण कराने की चुनौती दी है। साथ ही चेताया है कि अगर चुनाव से पहले पुल नहीं बना तो क्षेत्र के लोग उनकी सियासी जमीन खिसका देंगे।
भकूना तोक से नाचनी बाजार को जोड़ने वाला पैदल पुल जुलाई 2018 में रामगंगा नदी के तेज बहाव से ध्वस्त हो गया था। पुल दो जिलों को जोड़ने के अलावा क्षेत्र के लोगों के रोजाना आवाजाही का एकमात्र माध्यम था। पुल ध्वस्त होने के बाद नदी पार करने के लिए लोनिवि की ओर से रामगंगा नदी पर एक ट्रॉली लगाई गई है। ग्रामीण रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए इसी ट्रॉली पर झूलते हुए जोखिम उठाकर नदी पार करते हैं। बारिश के दिनों में नदी उफान पर है और नदी पार करना जोखिम भरा हो रहा है। ऐसे में लोग जल्द पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।
महरगाढ़ घाटी के भ्रमण पर गए पूर्व विधायक फर्स्वाण बृहस्पतिवार को ट्रॉली पर सवार हुए और फेसबुक के जरिये लाइव करके ट्रॉली से आवाजाही में होने वाली परेशानी बताई। तीन वर्ष बाद भी पैदल पुल का निर्माण नहीं होने पर क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रामगंगा नदी ने आपदा में बागेश्वर, पिथौरागढ़ क्षेत्र में कटाव किया था। पिथौरागढ़ की ओर से कांग्रेस के विधायक होने के बावजूद नदी पर सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के क्षेत्रीय विधायक पुल निर्माण और सुरक्षा दीवार की पहल तक नहीं करा सके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल का गृह क्षेत्र होने के बावजूद डबल इंजन की सरकार ने इस क्षेत्र को उपेक्षित रखा है, जिसका जवाब उन्हें आगामी चुनाव में मिल जाएगा।
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भकूना तोक से नाचनी बाजार को जोड़ने वाला पैदल पुल जुलाई 2018 में रामगंगा नदी के तेज बहाव से ध्वस्त हो गया था। पुल दो जिलों को जोड़ने के अलावा क्षेत्र के लोगों के रोजाना आवाजाही का एकमात्र माध्यम था। पुल ध्वस्त होने के बाद नदी पार करने के लिए लोनिवि की ओर से रामगंगा नदी पर एक ट्रॉली लगाई गई है। ग्रामीण रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए इसी ट्रॉली पर झूलते हुए जोखिम उठाकर नदी पार करते हैं। बारिश के दिनों में नदी उफान पर है और नदी पार करना जोखिम भरा हो रहा है। ऐसे में लोग जल्द पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।
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महरगाढ़ घाटी के भ्रमण पर गए पूर्व विधायक फर्स्वाण बृहस्पतिवार को ट्रॉली पर सवार हुए और फेसबुक के जरिये लाइव करके ट्रॉली से आवाजाही में होने वाली परेशानी बताई। तीन वर्ष बाद भी पैदल पुल का निर्माण नहीं होने पर क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रामगंगा नदी ने आपदा में बागेश्वर, पिथौरागढ़ क्षेत्र में कटाव किया था। पिथौरागढ़ की ओर से कांग्रेस के विधायक होने के बावजूद नदी पर सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के क्षेत्रीय विधायक पुल निर्माण और सुरक्षा दीवार की पहल तक नहीं करा सके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल का गृह क्षेत्र होने के बावजूद डबल इंजन की सरकार ने इस क्षेत्र को उपेक्षित रखा है, जिसका जवाब उन्हें आगामी चुनाव में मिल जाएगा।
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