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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Due to the existence of two schools of survival in danger

पलायन के कारण दो विद्यालयों का अस्तित्व खतरे में

Sun, 17 Dec 2017 10:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर। Updated Sun, 17 Dec 2017 10:06 PM IST
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पलायन के कारण बागेश्वर विकास खंड के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत ठांगा के तुषरेड़ा के 25 घरों में ताले लटक गए हैं। पलायन की जबरदस्त मार गांव के दो स्कूलों पर भी पड़ी है। राजकीय प्राइमरी स्कूल में बच्चों की संख्या घटकर चार तो राजूहा में आठ रह गई है। गांव को यातायात से जोड़ने के लिए पांच किमी लंबी सड़क की दरकार है। सड़क निर्माण के लिए नेताओं ने आश्वासन तो दिए, लेकिन निर्माण के नाम पर आज तक एक फावड़ा नहीं चलने से ग्रामीणों में गुस्सा है। गुस्साए पूर्व सैनिकों ने कहा यदि सड़क का निर्माण शीघ्र शुरू न हुआ तो ग्रामीणों के सहयोग से श्रमदान करके सड़क का निर्माण शुरू कर देंगे।

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तुषरेड़ा गांव में बुनियादी सुविधाओं का पहले से ही अभाव रहा है। सड़क से गांव की दूरी पांच किमी है। गाड़ी पकड़ने के लिए ग्रामीणों को पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। सड़क के बगैर गांव का विकास भी ठप है। यातायात की सुविधा नहीं होने से गांव के 25 परिवार बेड़ीनाग, हल्द्वानी और दिल्ली चले गए हैं। पलायन से गांव की प्राइमरी पाठशाला और राजूहा में ताले लटकने का खतरा है। इनमें क्रमश: चार और आठ बच्चे रह गए हैं। गांव का विकास नहीं होने से ग्रामीण अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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पूर्व सैनिक विशन सिंह भंडारी का कहना है गांव सैनिक बहुल है। विकास के तमाम दावों के बाद भी गांव को सड़क से नहीं जोड़ा जाना सैनिकों का अपमान है। प्रस्तावित धामपुर-बेड़ीनाग-तुषरेड़ा-देवतोली सड़क का निर्माण शीघ्र न हुआ तो पूर्व सैनिकों और युवाओं को मजबूर होकर निर्माण के लिए फावड़े हाथ में लेने पड़ेंगे। -  विशन सिंह भंडारी।
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 सड़क नहीं होने से गांव खाली होता जा रहा है। गांव में उत्पादित सब्जियां, दूध और फल बाजार तक नहीं पहुंच पाते। सड़क नहीं बनी तो लोकसभा चुनाव के बहिष्कार को मजबूर होना पड़ेगा।
- सामाजिक कार्यकर्ता खुशाल सिंह धानिक।

 सड़क नहीं होने का बहाना बनाकर गांव में अधिकारी और कर्मचारी नहीं आते। इससे गांव का विकास होना तो दूर ग्रामीणों को विकास योजनाओं की जानकारी तक नहीं मिल पाती है।

- पूर्व प्रधान मादो सिंह ।

सड़क नहीं होने से खास तौर पर पारिवारिक पेंशन लेने कांडा और बेड़ीनाग जाने में कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। गांव में यदि किसी की तबियत बिगड़ गई तो डोली में बैठाकर अस्पताल ले जाने में ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
- मोहनी देवी।

 

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