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डीजीपीएस सिस्टम से होगी खड़िया खदानों की निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Fri, 21 Apr 2017 11:06 PM IST
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सोने और कोयले की खानों की तरह अब बागेश्वर की खड़िया खदानों की निगरानी डीजीपीएस (डिजिटल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से होगी। इसके लिए खड़िया खदानों का सर्वे शुरू हो गया है। अगले तीन महीनों के भीतर सभी खदानों की लोकेशन और एरिया का डाटा फीडिंग कर ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके बाद खनन विभाग के अधिकारी अवैध माइनिंग पर सीधे सेटेलाइट के जरिए नजर रख सकेंगे।
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में खड़िया का बड़ा कारोबार है। जिले में इस समय लगभग 70 खदानें हैं। इन खदानों से हर साल तीन लाख टन के आसपास खड़िया निकालकर विभिन्न इंडस्ट्रीज को बेची जाती है। हर साल 150 करोड़ के इस खड़िया कारोबार से 20 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को भी मिलता है। सफेद सोना उगलने वाली इन खदानों में बड़ी तादात में अवैध खनन भी होता है। खनन माफिया लीज पर स्वीकृत भूमि से पीलरों को खिसकाकर बाहर भी खनन करते हैं। इसी अवैध खनन की शिकायत पर हाईकोर्ट ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश में चार माह के लिए खड़िया खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। खड़िया खदानों में अवैध खनन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने सभी खदानों की डीजीपीएस सिस्टम से निगरानी करने का फैसला लिया है।
खनन विभाग ने स्पेस साइंस डिपार्टमेंट के सहयोग से सभी खदानों की सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। हर माइन की बाउंड्री लाइन में लगे पिलर के आधार पर डाटा फीडिंग की जाएगी। इसमें माइनिंग एरिया की लोकेशन, खदान का क्षेत्रफल, दूरी सहित सभी जानकारियां फीड रहेंगी। इसके बाद इस डाटा को खनन विभाग की वेबसाइट में डालकर ऑनलाइन कर दिया जाएगा। बाउंड्री लाइन से बाहर अवैध माइनिंग होने पर खनन विभाग को सेटेलाइट से सीधे जानकारी हो जाएगी। खनन विभाग के अधिकारी देहरादून में बैठकर अवैध खनन पर नजर रख सकेंगे।
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राज्य सरकार के निर्देश पर डीजीपीएस के जरिए खड़िया खदानों की निगरानी के लिए डाटा तैयार किया जा रहा है। इसमें माइन की पूरी लोकेशन और एरिया फीड रहेगा। इसको खनन विभाग की वेबसाइट में ऑनलाइन किया जाएगा। कोई भी खनन कर्ता बाउंड्री पीलर को हटा नहीं सकेगा। अगले तीन-चार महीनों में यह कार्य पूरा हो जाएगा। राजपाल लेघा उप निदेशक, खनन विभाग
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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में खड़िया का बड़ा कारोबार है। जिले में इस समय लगभग 70 खदानें हैं। इन खदानों से हर साल तीन लाख टन के आसपास खड़िया निकालकर विभिन्न इंडस्ट्रीज को बेची जाती है। हर साल 150 करोड़ के इस खड़िया कारोबार से 20 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को भी मिलता है। सफेद सोना उगलने वाली इन खदानों में बड़ी तादात में अवैध खनन भी होता है। खनन माफिया लीज पर स्वीकृत भूमि से पीलरों को खिसकाकर बाहर भी खनन करते हैं। इसी अवैध खनन की शिकायत पर हाईकोर्ट ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश में चार माह के लिए खड़िया खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। खड़िया खदानों में अवैध खनन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने सभी खदानों की डीजीपीएस सिस्टम से निगरानी करने का फैसला लिया है।
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खनन विभाग ने स्पेस साइंस डिपार्टमेंट के सहयोग से सभी खदानों की सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। हर माइन की बाउंड्री लाइन में लगे पिलर के आधार पर डाटा फीडिंग की जाएगी। इसमें माइनिंग एरिया की लोकेशन, खदान का क्षेत्रफल, दूरी सहित सभी जानकारियां फीड रहेंगी। इसके बाद इस डाटा को खनन विभाग की वेबसाइट में डालकर ऑनलाइन कर दिया जाएगा। बाउंड्री लाइन से बाहर अवैध माइनिंग होने पर खनन विभाग को सेटेलाइट से सीधे जानकारी हो जाएगी। खनन विभाग के अधिकारी देहरादून में बैठकर अवैध खनन पर नजर रख सकेंगे।
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राज्य सरकार के निर्देश पर डीजीपीएस के जरिए खड़िया खदानों की निगरानी के लिए डाटा तैयार किया जा रहा है। इसमें माइन की पूरी लोकेशन और एरिया फीड रहेगा। इसको खनन विभाग की वेबसाइट में ऑनलाइन किया जाएगा। कोई भी खनन कर्ता बाउंड्री पीलर को हटा नहीं सकेगा। अगले तीन-चार महीनों में यह कार्य पूरा हो जाएगा। राजपाल लेघा उप निदेशक, खनन विभाग