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खनन से खत्म हो जाएगा देवली गांव का वजूद

Wed, 02 Jan 2019 11:37 PM IST
Almora desk ब्यूरो/बागेश्वर
ब्यूरो/बागेश्वर Published by: Almora desk Updated Wed, 02 Jan 2019 11:37 PM IST
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Devli village will end with mining 
खनन के नाम पर खूबसूरत देवली गांव काे बदरंग करने की है तैयारी। - फोटो : अमर उजाला

पहाड़ में जल संरक्षण के लिए वरदान माने जाने वाले बांज के जंगल के ठीक नीचे स्थित देवली गांव को नेस्तनाबूद करने की तैयारी है। गांव वालों के अनुसार खनन से पहाड़ को बर्बाद कर रहे माफिया ने गांव में घरों से ठीक नीचे से खनन की अनुमति हासिल कर ली है। ये भी तब जब गांव के 95 फीसदी से अधिक लोग खनन के विरोध में हैं। 

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ऐसे में गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए लामबंद हो रहे इस माटी के बेटो और खनन माफिया में टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने पट्टा स्वीकृति की बात को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि देवली गांव में 17 हेक्टेयर में खनन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।  
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आपदा के लिहाज से संवेदनशील और धार्मिक महत्व का गांव
देवली गांव आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। गांव की जमीन हर बरसात में धंस रही है। अतीत में गांव के घरों को एक ढाल से दूसरी ढाल में शिफ्ट भी किया जा चुका है। बद्रीनाथ मंदिर की तर्ज पर यहां भी बद्रीनाथ का मंदिर, हरज्यू मंदिर और बद्रीनाथ का कुंड भी है। गांव में जब भी खनन की सुगबुगाहट हुई है तब-तब ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए जिला प्रशासन में आपत्ति दर्ज कराई है। बुजुर्गों के अनुसार यदि गांव की प्राकृतिक स्थिति से छेड़छाड़ की गई तो कभी भी बड़ी आपदा आ सकती है। खड़िया खनन से गांव के बद्रीनाथ कुंड, मंदिर, रास्ते, गौचर भूमि, उपजाऊ खेत, मकानों को गंभीर खतरे की आशंका बनी हुई है। 
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17.824 हेक्टेयर में होगा खनन 
देवली गांव में 17.824 हेक्टेयर भूमि पर खनन की योजना बनाई गई है। खनन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक देवली गांव में देवभूमि माइंस ने खड़िया खनन के लिए आवेदन किया था। 

प्रशासन को गुमराह किया माफिया ने
गांव के बाशिंदों के अनुसार खनन माफिया ने पांच फीसदी ग्रामीणों की सहमति ली, वह भी धोखे से। जिन ग्रामीणों से सहमति ली, वे कम पढ़े लिखे और अनपढ़ हैं। उनसे ये कहकर कागजों में दस्तखत कराए गए कि गांव के पानी को दूसरे गांव वाले ले जा रहे हैं। इसके विरोध में और गांव में पेयजल लाइन बनाने के लिए प्रशासन को पत्र देना है। गांव के 95 फीसदी लोगों से सहमति ली ही नहीं गई, कुछ लोगों की फर्जी सहमति का पत्र भी जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिया गया।   

रिवर्स पलायन की सरकार की योजना को झटका
सरकार की रिवर्स पलायन की अपील पर गांव के करीब आधा दर्जन से भी अधिक लोगों ने हाल-फिलहाल में गांव में पक्के मकान बना लिए। महानगरों में रोजगार के लिए गए ये लोग अब गांव वापसी की तैयारी में थे लेकिन खड़िया खनन होने की स्थिति में प्रदूषण के बीच रहने के लिए यहां लोग आने से रहे। 

चाय बागान, कुदरती पर्यटन के लिए मुफीद गांव
देवली गांव की जलवायु चाय बागानों के मुफीद है। उत्तर ढाल, गांव के सामने हिमालय की लंबी श्रृंखला, माटी में नमी और पानी की उपलब्धता ये सारी बातें यहां चाय बागान के विकास में मददगार हैं। गांव वाले इस पर काम भी करते लेकिन खनन माफिया के मंसूबे कामयाब हुए तो इस सुंदर गांव को विद्रूप होने से कोई नहीं बचा सकेगा।

विरोध तीव्र होने की आशंका
गांव के भूमिधर, नरेश, नवीन, प्रकाश, आनंद, विपिन, हरीश चतुर्वेदी, हरीश, विपिन, माधवानंद, शेखर, लीलाधर, ललित, ख्यालीदत्त, सुरेश, सुरेश द्वितीय, विशनदत्त, रमेश, गंगादत्त भट्ट समेत लगभग सभी ने गांव में खनन न होने देने का एलान किया है। इसके चलते गांव में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है।

देवली गांव में खड़िया खनन के लिए आवेदन आया हुआ था जिसे शासन को फारवर्ड किया गया है। फिलहाल खनन पट्टा स्वीकृति का पत्र हमें नहीं मिला है। यदि ग्रामीणों का विरोध होगा तो आवेदन निरस्त भी हो सकता है। किसी भी गांव में जबरन खनन नहीं किया जाएगा।  
- रंजना राजगुरु, डीएम बागेश्वर 

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