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Bageshwar News: पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थल के विकास को मदद की दरकार
Mon, 13 May 2024 12:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 13 May 2024 12:22 AM IST
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बागेश्वर। कपकोट का दुलम गांव पैराग्लाइडिंग की अपार संभावनाओं को समेटे है। यहां समय-समय पर पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षण शिविर होते हैं, बावजूद अब तक शासन-प्रशासन से पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थल के विकास पर ध्यान नहीं दिया है। प्रशिक्षण स्थल पर बने गड्ढे और असमतल ढलान प्रशिक्षुओं की कड़ी परीक्षा लेते हैं। इस दौरान चोट लगने का खतरा भी रहता है।
दुलम गांव में वर्ष 2014 में पहली बार पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। बाद में पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन और पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर कई प्रशिक्षण शिविर लगाए जा चुके हैं। गांव में पैराग्लाइडिंग सीखने के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन उसे विकास की दरकार है। प्रशिक्षण के दौरान टेक ऑफ लेने के लिए प्रशिक्षुओं को असमतल ढलान पर दौड़ना पड़ता है। टेक ऑफ वाली ढलान के नीचे दोनों ओर बड़े गड्ढे बने हैं। इन गड्ढों में गिरने से बड़ा हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है। प्रशिक्षण स्थल के लैंडिंग मैदान के नीचे की ओर सुरक्षा दीवार लगाने की भी जरूरत है।
इनसेट
तंत्र करे मदद तो चमक उठेगा क्षेत्र
बागेश्वर। दुलम गांव के पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण शिविर लगने के बाद कई युवाओं का रुझान इस खेल की तरफ हुआ। पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के साथ मिलकर शिविर में ट्रेनर के रूप में सहयोग करने वाले गांव के बंटी कोरंगा बताते हैं कि गांव में पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध है। बाहर के लोग भी यहां आते हैं, लेकिन स्थल विकास नहीं होने से प्रशिक्षुओं को दिक्कत होती है। शासन-प्रशासन अगर प्रशिक्षण स्थल का विकास करे और दुलम को पैराग्लाइडिंग से जोड़कर प्रमोट करे तो साहसिक खेलकूद में क्षेत्र को विशिष्ट पहचान मिल सकती है।
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इनसेट
प्रशिक्षुओं की सुरक्षा का इंतजाम जरूरी
बागेश्वर। पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष और पैराग्लाइडर पायलट जगदीश जोशी बताते हैं कि पैराग्लाइडिंग जोखिम भरा खेल है। दुलम में टेक ऑफ वाले ढलान पर बने गड्ढों को भरने और ढलान को दौड़ने लायक बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जून में दुलम गांव में प्रशिक्षण शिविर प्रस्तावित है। बाहरी राज्यों के प्रशिक्षु भी इसमें शामिल होंगे। तब तक प्रशिक्षण स्थल को दुरुस्त नहीं किया गया तो प्रशिक्षुओं को परेशानी हो सकती है।
कोट
दुलम गांव के पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थल का प्रोजेक्ट मेरी प्राथमिकता में है। मैंने क्षेत्रवासियों से इस स्थान को विकसित करने का वादा किया है। जल्द ही इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा। - सुरेश गढि़या, विधायक कपकोट
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दुलम गांव में वर्ष 2014 में पहली बार पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। बाद में पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन और पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर कई प्रशिक्षण शिविर लगाए जा चुके हैं। गांव में पैराग्लाइडिंग सीखने के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन उसे विकास की दरकार है। प्रशिक्षण के दौरान टेक ऑफ लेने के लिए प्रशिक्षुओं को असमतल ढलान पर दौड़ना पड़ता है। टेक ऑफ वाली ढलान के नीचे दोनों ओर बड़े गड्ढे बने हैं। इन गड्ढों में गिरने से बड़ा हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है। प्रशिक्षण स्थल के लैंडिंग मैदान के नीचे की ओर सुरक्षा दीवार लगाने की भी जरूरत है।
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तंत्र करे मदद तो चमक उठेगा क्षेत्र
बागेश्वर। दुलम गांव के पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण शिविर लगने के बाद कई युवाओं का रुझान इस खेल की तरफ हुआ। पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के साथ मिलकर शिविर में ट्रेनर के रूप में सहयोग करने वाले गांव के बंटी कोरंगा बताते हैं कि गांव में पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध है। बाहर के लोग भी यहां आते हैं, लेकिन स्थल विकास नहीं होने से प्रशिक्षुओं को दिक्कत होती है। शासन-प्रशासन अगर प्रशिक्षण स्थल का विकास करे और दुलम को पैराग्लाइडिंग से जोड़कर प्रमोट करे तो साहसिक खेलकूद में क्षेत्र को विशिष्ट पहचान मिल सकती है।
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प्रशिक्षुओं की सुरक्षा का इंतजाम जरूरी
बागेश्वर। पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष और पैराग्लाइडर पायलट जगदीश जोशी बताते हैं कि पैराग्लाइडिंग जोखिम भरा खेल है। दुलम में टेक ऑफ वाले ढलान पर बने गड्ढों को भरने और ढलान को दौड़ने लायक बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जून में दुलम गांव में प्रशिक्षण शिविर प्रस्तावित है। बाहरी राज्यों के प्रशिक्षु भी इसमें शामिल होंगे। तब तक प्रशिक्षण स्थल को दुरुस्त नहीं किया गया तो प्रशिक्षुओं को परेशानी हो सकती है।
कोट
दुलम गांव के पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थल का प्रोजेक्ट मेरी प्राथमिकता में है। मैंने क्षेत्रवासियों से इस स्थान को विकसित करने का वादा किया है। जल्द ही इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा। - सुरेश गढि़या, विधायक कपकोट