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पूरी नहीं हो सकी अलग ब्लॉक बनाने की हसरत
ब्यूूराे, अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Mon, 21 Sep 2015 01:17 AM IST
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अलग ब्लॉकों के गठन की मांग जिले की मांग के साथ ही उठी थी। जिला तो 1997 में बन गया, लेकिन अलग ब्लॉकों की हसरत पूरी नहीं हो सकी है।
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छोटी प्रशासनिक इकाईयों का गठन न होने के कारण गांवों का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। ब्लॉकों का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण अधिकारी भी हर ग्राम पंचायत में नहीं पहुंच पाते हैं।
अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण गांवों में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगते रहते हैं। क्षेत्र के लोगों ने अलग ब्लॉकों का शीघ्र गठन नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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लौबांज, रवांईखाल, शामा, चौड़ास्थल, कमेड़ीदेवी, कांडा, कठपुड़ियाछीना, नाकुरी, बनलेख को अलग ब्लॉक बनाने की मांग बागेश्वर जिले की मांग के साथ ही उठी थी। ढाई लाख की आबादी वाले इस जिले में सिर्फ तीन ब्लॉक हैं।
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इनमें बागेश्वर, कपकोट, गरुड़ शामिल हैं। ब्लॉक बागेश्वर के अंतिम ग्राम पंचायत नंदीगांव की दूरी करीब 50 किमी जबकि कपकोट ब्लॉक के अंतिम ग्राम पंचायत बोरबलड़ा की दूरी 52 किमी है।
बोरबलड़ा के ग्रामीण ब्लॉक मुख्यालय दूसरे दिन पहुंचते हैं। यह गांव सड़क से भी नहीं जुड़ सका है। अलग ब्लॉक न बनने के कारण गांवों के विकास पर बुरा असर पड़ा है।
ग्रामीणों को पैदल चलने के लिए ढंग की पगडंडियां भी नहीं हैं। स्कूलों में शिक्षक तो अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। लोगों को पीने का पानी भी पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पा रहा है।
रोजगार का भी बुरा हाल है। मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी के कारण दूरस्थ गांवों से ग्रामीणों का जिला मुख्यालय, कपकोट, गरुड़ तहसील समेत हल्द्वानी की ओर पलायन बढ़ता जा रहा है।
पिछले दिनों ब्लॉक के अधिकारियों ने कांडा, कठपुड़ियाछीना ब्लॉक के लिए रायशुमारी की। इनमें ग्राम पंचायतों ने एकमत से अनापत्ति प्रमाण पत्र सौंपे हैं। कुछ लोग रायशुमारी पर सवालिया निशान भी लगाने लगे हैं।
कठपुड़ियाछीना ब्लॉक जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र रावत, चौड़ास्थल को अलग ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू ने कहा कि शीघ्र ब्लॉक नहीं बने तो आंदोलन होगा।
बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास और कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव पास कराकर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।