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गंगा की तरह भाग लेते तो शायद बच जाती नंदी और इंदिरा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2020 08:57 PM IST
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Death in Kapkot
इंदिरा देवी (फाइल फोटो) - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। गंगा देवी भाग्यशाली थी कि कपकोट के पुड़कुनी (चचई) के जंगल में धधकी आग की चपेट में आने से बच गई। गंगा ने भागकर अपनी जान बचाई। गंगा देवी ने नंदी देवी और इंदिरा देवी को भी आवाज लगाकर भागने को कहा, लेकिन काल के वश में आई दोनों महिलाएं आग से पार नहीं पा सकीं और जान से हाथ धो बैठीं।
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रविवार को गंगा देवी को भी परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। गंगा देवी के बाएं पैर में गंभीर चोट है। गंगा देवी ने बताया कि वे सुबह सात बजे घास काटने के लिए पुड़कुनी के जंगल पहुंच गई थीं। तीनों जंगल में घास काट रही थीं। नंदी और इंदिरा एक साथ घास काट रहीं थीं, वह (गंगा) उनसे काफी दूर दूसरी पहाड़ी में घास काट रहीं थीं। गंगा बताती हैं कि सुबह करीब 11 बजे जंगल में अचानक आग लग गई। धीरे-धीरे आग उनकी ओर बढ़ने लगी तो गंगा ने जान बचाने के लिए दौड़ लगा दी।
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गंगा ने बताया कि उन्होंने नंदी और इंदिरा को भी भागने के लिए आवाज लगाई लेकिन दोनों भाग नहीं पाईं और आग की लपटों से घिर गईं। गंगा ने बताया कि भागने के दौरान वह कई बार गिरी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और आग के दायरे से बाहर आकर ही रुकी। वहीं से उसने नंदी और इंदिरा के आग की चपेट में आने की सूचना गांव के लोगों को दी।
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नंदी के चार तो इंदिरा के हैं पांच बच्चे, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
बागेश्वर। मृतका नंदी देवी के चार और इंदिरा देवी के पांच बच्चे हैं। दोनों के परिवार खेतीबाड़ी और मजदूरी कर परिवार का भरण, पोषण करते हैं। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर गमगीन नंदी के पुत्र नरेश कुमार (20) ने बताया कि उन्होंने एक भैंस और एक बकरी पाली है। उन्हीं के लिए चारा लेने मां जंगल गई थी। नंदी देवी की बेटी रवीना (16), हिमानी (14), लड़के लक्ष्मण (12) और पति मदन राम का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे मृतका इंदिरा देवी के पति तारा चंद्र आर्या ने बताया कि उनकी एक भैंस, एक गाय और दो बकरियां हैं। उन्हीं के लिए चारा लेने के लिए रोज की भांति पत्नी जंगल गई थी। तारा चंद्र आर्या का कहना है कि इस घटना से उनका परिवार बिखर गया है। वह अकेले कैसे परिवार का भरण पोषण करेंगे, इसकी चिंता सता रही है। तारा चंद्र की तीन पुत्रियां सोनी (16), रेनू (13), दिव्या (4), पुत्र राहुल (11) और कमल (8) है। मां की मौत से बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
बागेश्वर। कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जंगल सुबह 11 बजे से धधक रहा था लेकिन वन कर्मी रात 10 बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे थे। वन विभाग के आला अधिकारियों को रात तक घटना की जानकारी नहीं थी। कहा कि फायर सीजन में भी आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण दो महिलाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस घटना से वन विभाग के इंतजामों पर गंभीर सवाल उठे हैं। पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत सदस्य रेखा देवी ने मृतकों के परिवार को कम से कम 20 लाख रुपये की मदद देने की मांग सरकार से की है।
परिजनों ने लगाया जानबूझकर आग लगाने का आरोप
बागेश्वर। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे नंदी देवी के पुत्र नरेश कुमार और मृतका इंदिरा देवी के पति तारा चंद्र आर्या ने पुड़कुनी के जंगल में जानबूझ कर आग लगाने का आरोप लगाया है। इन लोगों ने कहा है कि एक चरवाहे ने जंगल में आग लगाई थी, इसकी जांच होनी चाहिए।

गमगीन माहौल में बागेश्वर सरयू श्मशान घाट में हुआ अंतिम संस्कार
बागेश्वर। आग की चपेट में आने से मारी गईं नंदी देवी और इंदिरा देवी का रविवार को बागेश्वर के सरयू श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने दोनों के अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद दी। अंतिम संस्कार में चचई गांव के तमाम लोग शामिल थे।
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