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बिजली ने रुलाया, पानी भी नहीं आया
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अल्मोड़ा में बिजली लाइनों की लॉपिंग करते विद्युत विभाग के कर्मचारी। संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। साढ़े आठ घंटे की बिजली कटौती ने लोगों को परेशान कर दिया। बिजली न होने से कोसी स्थित जल संस्थान के तीनों पंप ठप रहे। इससे नगर समेत आसपास की करीब डेढ़ लाख की आबादी पानी के लिए भी तरस गई।
बिजली कटौती से लोगों के घरों में इंवर्टर भी जवाब दे गए। लोग अपने मोबाइल फोन भी चार्ज नहीं कर पाए। कोसी स्थित जल संस्थान के तीनों पंप ठप रहे। इससे कोसी से एडम्स, सर्किट हाउस पातालदेवी आदि टैंकों में पेयजल सप्लाई नहीं हो पाई। इस कारण नगर समेत कसारदेवी, डीनापानी, चितई पंत, सिराड़, फलसीमा, पपरसली, लोधिया, बर्शिमी, पहल, सैनार, खत्याड़ी आदि इलाकों की करीब डेढ़ लाख की आबादी पानी के लिए परेशान रही।
लोगों ने स्थानीय नौलों से पानी लाकर किसी तरह काम चलाया। लोग दिन भर जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिकारियों से फोन कर बिजली पानी के बारे में पूछते रहे। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सनवाल ने कहा कि बिजली आपूर्ति निर्धारित समय पर नहीं किए जाने से लोग अधिक परेशान रहे।
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इसलिए हुई कटौती
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (ऊर्जा निगम) ने रविवार को 33 केवी विद्युत उप संस्थान लक्ष्मेश्वर, बख, खत्याड़ी, कोसी, सोमेश्वर, तोली, दन्या, जैंती, लमगड़ा, तोली, ताकुला में 33 केवी विद्युत लाइनों के ऊपर से गुजर रहे पेड़ों की टहनियों की लॉपिंग की। इससे चलते सुबह दस बसे से बिजली आपूर्ति ठप रही। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से भी स्यालीधार स्थित 132 केवी विद्युत उप केंद्र में सुधारीकरण का काम किया गया। इस संस्थान से जुड़े क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।
लोगों की पीड़ा
रविवार को ही पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और आज ही पानी नहीं आया। शहर में पानी वितरण की व्यवस्था बेहतर नहीं है।-बालम चिलवाल, पूर्वी पोखरखाली (अल्मोड़ा)
बिजली और पानी के लिए दिन भर तरसते रहे। पानी वितरण की व्यवस्था ढर्रे में नहीं आ पा रही है। कभी बिजली न होने से पानी नहीं आता है तो कभी कोसी में सिल्ट आ जाती है। - नवीन चंद्र जोशी, जाखनदेवी (अल्मोड़ा)
दुगालखोला में लंबे समय से पानी की अनियमित आपूर्ति हो रही है। रविवार को पानी न आने से और भी मुसीबतें बढ़ गई है। पानी की आपूर्ति जल्द बहाल किया जाए।-जगत सिंह गैड़ा, दुगालखोला (अल्मोड़ा)
रविवार के बदले अन्य दिन सुधारीकरण किया जाता तो बेहतर रहता। रविवार को अवकाश रहने से अधिकतर लोगों को पानी, बिजली की जरूरत पड़ती है। -दीप लाल साह, पूर्व उपाध्यक्ष व्यापार मंडल अल्मोड़ा
विभाग का पक्ष (नोट... इसे अलग लगाएं... लोगों की पीड़ा में न लगाएं, कैच लाइन के साथ)
दिवाली पर लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति कराने के लिए 33 केवी लाइनों के आसपास से गुजर रही पेड़ की टहनियों की लॉपिंग की गई। इस वजह से बिजली आपूर्ति में व्यवधान रहा। शाम को बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है।
-कन्हैया जी मिश्रा, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम अल्मोड़ा
सुबह के समय जिन मोहल्लों में पानी दिया जाता है वहां जलापूर्ति हुई लेकिन 10 बजे बाद पेयजल आपूर्ति बाधित रही। रात को पंप चले तो सोमवार की सुबह लोगों को पानी की आपूर्ति की जाएगी।
-अरुण कुमार सोनी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान अल्मोड़ा
बागेश्वर का भी यही हाल
बागेश्वर। बिजली गुल होने के कारण कुटीर और लघु उद्योगों का कामकाज प्रभावित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में ऑनलाइन और बिजली से संबंधित कारोबारियों को भी दिक्कत हुई। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद अफजाल ने कहा कि जिले के तीनों विकासखंडों में बिजली के तारों को छू रहे पेड़ों की टहनियों की लॉपिंग का काम किया गया। बारिश के दौरान जिन बिजली की लाइनों को नुकसान हुआ था। उनकी भी मरम्मत की गई। पूरे दिन काम चलता रहा जिसके कारण आपूर्ति बाधित रही। संवाद
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बिजली कटौती से लोगों के घरों में इंवर्टर भी जवाब दे गए। लोग अपने मोबाइल फोन भी चार्ज नहीं कर पाए। कोसी स्थित जल संस्थान के तीनों पंप ठप रहे। इससे कोसी से एडम्स, सर्किट हाउस पातालदेवी आदि टैंकों में पेयजल सप्लाई नहीं हो पाई। इस कारण नगर समेत कसारदेवी, डीनापानी, चितई पंत, सिराड़, फलसीमा, पपरसली, लोधिया, बर्शिमी, पहल, सैनार, खत्याड़ी आदि इलाकों की करीब डेढ़ लाख की आबादी पानी के लिए परेशान रही।
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लोगों ने स्थानीय नौलों से पानी लाकर किसी तरह काम चलाया। लोग दिन भर जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिकारियों से फोन कर बिजली पानी के बारे में पूछते रहे। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सनवाल ने कहा कि बिजली आपूर्ति निर्धारित समय पर नहीं किए जाने से लोग अधिक परेशान रहे।
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इसलिए हुई कटौती
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (ऊर्जा निगम) ने रविवार को 33 केवी विद्युत उप संस्थान लक्ष्मेश्वर, बख, खत्याड़ी, कोसी, सोमेश्वर, तोली, दन्या, जैंती, लमगड़ा, तोली, ताकुला में 33 केवी विद्युत लाइनों के ऊपर से गुजर रहे पेड़ों की टहनियों की लॉपिंग की। इससे चलते सुबह दस बसे से बिजली आपूर्ति ठप रही। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से भी स्यालीधार स्थित 132 केवी विद्युत उप केंद्र में सुधारीकरण का काम किया गया। इस संस्थान से जुड़े क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।
लोगों की पीड़ा
रविवार को ही पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और आज ही पानी नहीं आया। शहर में पानी वितरण की व्यवस्था बेहतर नहीं है।-बालम चिलवाल, पूर्वी पोखरखाली (अल्मोड़ा)
बिजली और पानी के लिए दिन भर तरसते रहे। पानी वितरण की व्यवस्था ढर्रे में नहीं आ पा रही है। कभी बिजली न होने से पानी नहीं आता है तो कभी कोसी में सिल्ट आ जाती है। - नवीन चंद्र जोशी, जाखनदेवी (अल्मोड़ा)
दुगालखोला में लंबे समय से पानी की अनियमित आपूर्ति हो रही है। रविवार को पानी न आने से और भी मुसीबतें बढ़ गई है। पानी की आपूर्ति जल्द बहाल किया जाए।-जगत सिंह गैड़ा, दुगालखोला (अल्मोड़ा)
रविवार के बदले अन्य दिन सुधारीकरण किया जाता तो बेहतर रहता। रविवार को अवकाश रहने से अधिकतर लोगों को पानी, बिजली की जरूरत पड़ती है। -दीप लाल साह, पूर्व उपाध्यक्ष व्यापार मंडल अल्मोड़ा
विभाग का पक्ष (नोट... इसे अलग लगाएं... लोगों की पीड़ा में न लगाएं, कैच लाइन के साथ)
दिवाली पर लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति कराने के लिए 33 केवी लाइनों के आसपास से गुजर रही पेड़ की टहनियों की लॉपिंग की गई। इस वजह से बिजली आपूर्ति में व्यवधान रहा। शाम को बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है।
-कन्हैया जी मिश्रा, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम अल्मोड़ा
सुबह के समय जिन मोहल्लों में पानी दिया जाता है वहां जलापूर्ति हुई लेकिन 10 बजे बाद पेयजल आपूर्ति बाधित रही। रात को पंप चले तो सोमवार की सुबह लोगों को पानी की आपूर्ति की जाएगी।
-अरुण कुमार सोनी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान अल्मोड़ा
बागेश्वर का भी यही हाल
बागेश्वर। बिजली गुल होने के कारण कुटीर और लघु उद्योगों का कामकाज प्रभावित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में ऑनलाइन और बिजली से संबंधित कारोबारियों को भी दिक्कत हुई। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद अफजाल ने कहा कि जिले के तीनों विकासखंडों में बिजली के तारों को छू रहे पेड़ों की टहनियों की लॉपिंग का काम किया गया। बारिश के दौरान जिन बिजली की लाइनों को नुकसान हुआ था। उनकी भी मरम्मत की गई। पूरे दिन काम चलता रहा जिसके कारण आपूर्ति बाधित रही। संवाद