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बागेश्वर की गर्भवतियों को चमोली में करानी पड़ रही डिलीवरी
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:04 AM IST
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बागेश्वर में आपदाग्रस्त कुंवारी गांव में इस तरह गर्भवती महिलाओं को डोली में लाद और कई किमी पैदल चल प्रसव के लिए पहुंचाना पड़ रहा अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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बेरहम मौसम, दरकते पहाड़ और बंद सड़क आपदा पीड़ित कुंवारी गांव की गर्भवती महिलाओं के लिए खतरे का सबब बनी हैं। आपदा की मार से कुंवारी गांव का अपने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क टूट चुका है। गांव की गर्भवती महिलाओं को बागेश्वर छोड़कर चमोली जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलीवरी करानी पड़ रही है।
उन्हें प्रसव के लिए डोलियों में लाद कई किमी पैदल चलकर, बदहाल पहाड़ी पगडंडियों और उफनाए गाड़-गधेरों को पारकर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। गांव तक पहुंचने के लिए बदियाकोट से 12 किमी खड़ी दूरी तय करनी पड़ती है। कपकोट सीएचसी से गांव की दूरी 45 किमी से अधिक है। कुंवारी को सड़क संपर्क से जोड़ने वाला बदियाकोट-रिखाड़ी मोटर मार्ग बारिश और मलबा आने से बार-बार बाधित हो रहा है।
सुरक्षित प्रसव और अस्पताल के बीच 45 किमी का फासला जोखिम भरा है। इस देखते हुए कुंवारी की गर्भवती महिलाओं के लिए चमोली का थराली प्रसव के लिए अधिक मुफीद साबित हो रहा है। कुंवारी गांव से देवाल की दूरी पैदल सात किमी है। देवाल से थराली तक सड़क संपर्क की सुविधा है। गांव की गर्भवती अपने जिले के कपकोट सीएचसी को छोड़कर चमोली जिले के थराली सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करा रही हैं। हालांकि इसके लिए भी उन्हें कुंवारी से देवाल तक सात किमी पैदल दूरी डोलियों में तय करनी पड़ रही है।
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रास्ते में खतरनाक पहाड़ी पगडंडियां और उफनाए गाड़-गधेरों को भी जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा है। पूर्व विधायक ललित सिंह फर्स्वाण ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर गर्भवतियों की सुध न लेने का आरोप लगाया है।
कुंवारी गांव भेजी स्वास्थ्य विभाग की टीम
कुंवारी गांव की गर्भवती महिलाओं की जानकारी और प्रसव की तैयारी के सिलसिले में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी है। बता दें कि अगस्त माह में गांव की पांच गर्भवती महिलाओं का प्रसव संभावित है। सीएमओ ने बताया कि वह खुद पहली अगस्त को कुंवारी का दौरा करेंगे। जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से पहले कपकोट अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।
लापरवाही पर एएमओ का वेतन रोका
कुंवारी गांव की गर्भवतियों को कपकोट सीएचसी से मदद न मिलने के आरोप की गाज प्रभारी चिकित्साधिकारी पर गिरी है। नाराज डीएम रंजना राजगुरु ने कोषाधिकारी को प्रभारी चिकित्साधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने चेताया कि आपदा प्रभावित कुंवारी गांव में स्वास्थ्य बंदोबस्त से संतुष्ट होने के बाद ही प्रभारी को वेतन मिलेगा। तब तक वेतन पर रोक जारी रहेगी।
डीएम ने सीएमओ का जवाब तलब किया
कुंवारी गांव में गर्भवतियों के हालातों पर डीएम ने सीएमओ डॉ. जेसी मंडल का भी जवाब तलब किया है। गांव की गर्भवती महिलाओं, उनके परीक्षण और प्रसव की तैयारी को लेकर जवाब मांगा गया है। सीएमओ से संभावित प्रसव की कार्ययोजना का ब्योरा तलब किया है। संतुष्ट न होने पर डीएम ने सीएमओ के खिलाफ भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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उन्हें प्रसव के लिए डोलियों में लाद कई किमी पैदल चलकर, बदहाल पहाड़ी पगडंडियों और उफनाए गाड़-गधेरों को पारकर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। गांव तक पहुंचने के लिए बदियाकोट से 12 किमी खड़ी दूरी तय करनी पड़ती है। कपकोट सीएचसी से गांव की दूरी 45 किमी से अधिक है। कुंवारी को सड़क संपर्क से जोड़ने वाला बदियाकोट-रिखाड़ी मोटर मार्ग बारिश और मलबा आने से बार-बार बाधित हो रहा है।
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सुरक्षित प्रसव और अस्पताल के बीच 45 किमी का फासला जोखिम भरा है। इस देखते हुए कुंवारी की गर्भवती महिलाओं के लिए चमोली का थराली प्रसव के लिए अधिक मुफीद साबित हो रहा है। कुंवारी गांव से देवाल की दूरी पैदल सात किमी है। देवाल से थराली तक सड़क संपर्क की सुविधा है। गांव की गर्भवती अपने जिले के कपकोट सीएचसी को छोड़कर चमोली जिले के थराली सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करा रही हैं। हालांकि इसके लिए भी उन्हें कुंवारी से देवाल तक सात किमी पैदल दूरी डोलियों में तय करनी पड़ रही है।
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रास्ते में खतरनाक पहाड़ी पगडंडियां और उफनाए गाड़-गधेरों को भी जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा है। पूर्व विधायक ललित सिंह फर्स्वाण ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर गर्भवतियों की सुध न लेने का आरोप लगाया है।
कुंवारी गांव भेजी स्वास्थ्य विभाग की टीम
कुंवारी गांव की गर्भवती महिलाओं की जानकारी और प्रसव की तैयारी के सिलसिले में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी है। बता दें कि अगस्त माह में गांव की पांच गर्भवती महिलाओं का प्रसव संभावित है। सीएमओ ने बताया कि वह खुद पहली अगस्त को कुंवारी का दौरा करेंगे। जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से पहले कपकोट अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।
लापरवाही पर एएमओ का वेतन रोका
कुंवारी गांव की गर्भवतियों को कपकोट सीएचसी से मदद न मिलने के आरोप की गाज प्रभारी चिकित्साधिकारी पर गिरी है। नाराज डीएम रंजना राजगुरु ने कोषाधिकारी को प्रभारी चिकित्साधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने चेताया कि आपदा प्रभावित कुंवारी गांव में स्वास्थ्य बंदोबस्त से संतुष्ट होने के बाद ही प्रभारी को वेतन मिलेगा। तब तक वेतन पर रोक जारी रहेगी।
डीएम ने सीएमओ का जवाब तलब किया
कुंवारी गांव में गर्भवतियों के हालातों पर डीएम ने सीएमओ डॉ. जेसी मंडल का भी जवाब तलब किया है। गांव की गर्भवती महिलाओं, उनके परीक्षण और प्रसव की तैयारी को लेकर जवाब मांगा गया है। सीएमओ से संभावित प्रसव की कार्ययोजना का ब्योरा तलब किया है। संतुष्ट न होने पर डीएम ने सीएमओ के खिलाफ भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।