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तथ्य छुपाने पर काफलीगैर की अंग्रेजी शराब की दुकान का आवंटन निरस्त

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Mar 2021 07:25 PM IST
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Allocation of Kafligar's English liquor shop revoked due to concealment of facts
प्रतीकात्मक
बागेश्वर। तथ्य छुपाकर अंग्रेजी शराब की दुकान हासिल करना अनुज्ञापी को भारी पड़ गया। डीएम विनीत कुमार ने अनुज्ञापी के नाम पर खुली शराब की दुकान का आवंटन निरस्त कर दिया है। धरोहर राशि के रूप में जमा 18.50 लाख की धनराशि जब्त कर ली है। आवेदक को वर्ष 2019 में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के साथ पकड़ा था। आवेदक ने शराब की दुकान के लिए आवेदन करते समय इस तथ्य को छुपाया था। गलत तथ्यों के आधार पर चरित्र प्रमाणपत्र भी बना लिया था। एसडीएम ने अब चरित्र प्रमाणपत्र भी निरस्त कर दिया है।
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मिली जानकारी के अनुसार बीते तीन मार्च को काफलीगैर की अंग्रेजी शराब की दुकान उमेश चंद्र सिंह के नाम आवंटित हुई थी। कुछ दिन पहले जिला आबकारी अधिकारी गोविंद मेहता ने डीएम को सौंपी रिपोर्ट में काफलीगैर की अंग्रेजी शराब की दुकान के अनुज्ञापी पर आवेदन में तथ्य छुपाने की जानकारी दी। बताया कि उक्त व्यक्ति को 30 मार्च 2019 को विभाग ने अवैध शराब के साथ पकड़ा था। अदालत में दोष सिद्ध भी हो गया था लेकिन उसने आवेदन करते समय यह तथ्य छुपा दिए। रिपोर्ट में दुकान का आवंटन निरस्त करने की संस्तुति की थी। इस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम से उसके चरित्र प्रमाणपत्र की पड़ताल कराई। जांच के बाद एसडीएम योगेंद्र सिंह ने चरित्र प्रमाण पत्र भी निरस्त कर दिया।
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डीएम ने दुकान का आवंटन और चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त करने की पुष्टि की है। कहा है कि आवंटी के खिलाफ संबंधित विभाग नियमानुसार अन्य कार्रवाई करेगा। एसडीएम के अनुसार चरित्र प्रमाणपत्र में थाने से जो रिपोर्ट आई थी, उसमें शराब के मामले में दोष सिद्ध होने का उल्लेख नहीं था। आबकारी नीति में स्पष्ट है कि आवेदक विवाद हीन होना चाहिए।
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...और आबकारी विभाग स्वयं ही भूल गया
बागेश्वर। आबकारी महकमे ने उमेश चंद्र सिंह को 30 मार्च 2019 को अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया था। इस बात की पुष्टि स्वयं जिला आबकारी अधिकारी कर रहे हैं। आवेदन के समय आवेदक के प्रपत्रों की ठीक ढंग से पड़ताल नहीं की गई। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि आवेदन के समय मामला पकड़ में नहीं आया। प्रपत्रों की जांच के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। अब मामला पकड़ में आया। यानी कि जिस महकमे ने आरोपी को अवैध शराब के साथ पकड़ा था, वही उसे भूल गया? और वह तथ्यों को छुपाकर दुकान का आवंटन कराने में सफल हो गया। इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
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