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UK: सरकार कहे अटैचमेंट खत्म...मंत्री का पत्र बोले- अटैच करो, बागेश्वर मामले में दावे-पैरवी की पोल खुली

Sat, 04 Jul 2026 12:06 PM IST
Heera कमल कांडपाल
कमल कांडपाल Published by: Heera Updated Sat, 04 Jul 2026 12:06 PM IST
सार

अटैचमेंट खत्म करने के सरकारी दावों के बीच शिक्षा मंत्री के नाम से एक कर्मचारी को अटैच करने का पत्र वायरल हुआ, जिससे सरकारी नीति पर सवाल उठे हैं।

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A letter attaching an employee went viral amid government claims of ending attachments in bageshwar
जारी पत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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प्रदेश में एक तरफ जहां सरकार और शिक्षा महकमा सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने तथा संबद्धीकरण (अटैचमेंट) की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने नीति और नियत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नाम से जारी एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है जिसने विभागीय दावों की पोल खोल दी है। इस पत्र में सीईओ बागेश्वर को निर्देशित किया गया है कि कृपया अनुरोध के अनुसार कार्ययोजित करें।

जिले के करुली निवासी जानकी देवी ने शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था। पत्र में अपनी बीमारी का हवाला देते हुए मांग की थी कि उनके पुत्र त्रिलोक सिंह जो जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज शामा (अशासकीय विद्यालय) में लिपिक के पद पर तैनात हैं उन्हें घर से विद्यालय की दूरी अधिक होने के कारण बीईओ कार्यालय कपकोट में अटैच किया जाए।

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इससे पहले भी उन्हें वहीं अटैच किया गया था लेकिन बीते दिनों अटैचमेंट समाप्त होने के आदेश के बाद उन्हें दोबारा मूल तैनाती स्थल भेजा जा रहा था। महिला ने शिक्षा मंत्री से विशेष अनुमति के तहत अपने पुत्र को दोबारा बीईओ कार्यालय कपकोट में ही कार्ययोजित करने की गुहार लगाई थी जिस पर मंत्री कार्यालय से पैरवी का यह पत्र वायरल हुआ है। 

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अशासकीय कर्मी का सरकारी दफ्तर में कैसे हुआ अटैचमेंट?
इस पत्र के सामने आते ही शिक्षा महकमे में खलबली मच गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो कर्मचारी एक अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय का है, उसे सरकारी बीईओ कार्यालय में किस नियम के तहत संबद्ध किया जा सकता है? इस बारे में जब संवाद न्यूज एजेंसी ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से बात की तो उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई। मंत्री ने साफ कहा कि पूरे प्रदेश में अटैचमेंट को खत्म करने के सख्त निर्देश हैं, ऐसे में यह आदेश बेहद संदेहास्पद है।

शिक्षा मंत्री ने फोन पर ही सीईओ को लगाई फटकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने तत्काल फोन पर ही मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) विनय कुमार को लाइन पर लिया और फटकार लगाई। उन्होंने पूछा कि अशासकीय विद्यालय वाला कर्मी हमारे सरकारी विभाग में कैसे अटैच हो गया? क्या वह नियम से बड़ा आदमी है। मंत्री ने आशंका जताई कि या तो उनके कार्यालय से किसी ने गलत पत्र जारी कर दिया है या फिर इस पत्र पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने अधिकारी को निर्देशित किया कि उक्त कर्मी को तुरंत वापस उसके मूल विद्यालय भेजा जाए और इस पूरे मामले की गहन जांच की जाए कि आखिर यह जुगाड़ तंत्र किसकी शह पर चल रहा था। उन्होंने फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर प्राथमिकी दर्ज कराने के भी निर्देश दिए हैं।

पूरे प्रदेश में अटैचमेंट की व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। अशासकीय विद्यालय के किसी भी कर्मचारी को सरकारी बीईओ कार्यालय में अटैच करने का कोई नियम नहीं है। मामला संज्ञान में आते ही मैंने तुरंत सीईओ को फटकार लगाई है। उक्त कर्मी का अटैचमेंट निरस्त कर उसे वापस मूल विद्यालय भेजने और पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यदि विभागीय स्तर पर किसी ने लापरवाही की है या मेरे फर्जी हस्ताक्षरों का सहारा लिया गया है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। - डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार

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