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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   A few ruins of the locals engaged in many homes of the Nilmaphi village from the escape

पलायन से नायलमाफी गांव के कई घरों में लगे ताले कुछ हुए खंडहर।

Mon, 30 Jul 2018 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Mon, 30 Jul 2018 12:09 AM IST
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A few ruins of the locals engaged in many homes of the Nilmaphi village from the escape
पलायन से नायलमाफी गांव के कई घरों में लगे ताले कुछ हुए खंडहर। - फोटो : अमर उजाला
आजादी मिले लंबा समय बीतने के बावजूद बागेेेश्वर विकासखंड का सुदूरवर्ती नायलमाफी गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सका है। सड़क न होने से इस गांव के लोगों को गाड़ी पकड़ने के लिए डेढ़ कि लोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। सड़क न होने से इस गांव के करीब 50 परिवार पलायन कर बागेश्वर, हल्द्वानी, दिल्ली मुरादाबाद, बरेली आदि शहरों में चले गए हैं। गांव में कई घरों में ताले लगे हैं, कई घर खंडहर में तब्दील हो गए हैं। 
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 ग्रामीणों के समक्ष बड़ी समस्या तब आती है जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है। उपचार हेतु अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को उसे डोली में बैठाकर डेढ़ किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क पर लाना पड़ता है।  इस गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल भी नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार विकास की दृष्टि से पिछड़े नायलमाफी ग्राम पंचायत की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना केेेे अनुसार साढ़े चार सौ सेे भी अधिक है। पहले इस गांव में करीब 150 परिवार रहते थे। इनमें से पचास परिवार बाहर पलायन कर चुके हैं। गांव में रह रहे परिवारों में 75 परिवार सैनिकों, पूर्व सैनिकों  और उनके आश्रितों के हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण अधिकारी भी गांव के भ्रमण पर आने से कतराते हैं।
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इनका कहना है 
गांव में प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। गांव में शाक सब्जी और फल प्रचुर मात्रा में होते हैं। सड़क नहीं होने से किसान इसे बाजार नहीं ले जा पाते हैं। फल सब्जी  गांव में ही सड़ जाते हैं।
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-नंदन प्रसाद ग्राम प्रधान नायलमाफी  

गांव में बच्चों की शिक्षा की ठोस व्यवस्था नहीं है। माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के लिए बच्चों को दो किमी की खड़ी चढ़ाई पार करके भटखोला जाना पड़ता है। सड़क के बिना गांव के विकास की कल्पना अधूरी ही है।
-हरीश मिश्रा निवासी नायलमाफी  

 ग्रामीणों को गाड़ी पकड़ने के लिए डेढ़ किमी की खड़ी चढ़ाई पारकर कठपुड़ियाछीना और भटखोला जाना पड़ता है। रोगियों को डोली में बैठाकर सड़क मार्ग तक ले जाने में तो पसीने ही छूट जाते हैं।
भुवन मिश्रा निवासी नायलमाफी 
 
मोटर सड़क तो दूर गांव में पगडंडियां भी ढंग की नहीं हैं। सिंचाई की ठोस व्यवस्था भी नहीं है। इससे कृषि पर विपरीत असर पड़ रहा है। अधिकारियों का भ्रमण न होने से विकास योजनाओं की भी जानकारी नहीं मिल पाती हैं।
 -कमलकांत मिश्रा निवासी-नायलमाफी 

 गांव में रोजगार के कोई साधन नहीं है। सड़क के बनने से कृषि, शाकभाजी और फलोत्पादन को नए आयाम मिलते। इससे पलायन पर काफी हद तक रोक लगती।
जगदीश मिश्रा निवासी नायलमाफी..


- नायलमाफी गांव को यातायात से जोड़ने के लिए 5.425 किमी लंबी कठपुड़ियाछीना-नायलमाफी-मनाछीना सड़क की डीपीआर तैयार कर गत मार्च महीने में शासन के माध्यम से भारत सरकार को भेज दी गई है। इस सड़क के निर्माण में 2.03 हेक्टेयर नाप भूमि और 2.54 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी। वन और राजस्व विभाग ने सड़क निर्माण में प्रभावित होने वाली भूमि का संयुक्त निरीक्षण कर लिया है। वन अधिनियम के निस्तारण के लिए पत्रावली तैयार की जा रही है। 

-राजेंद्र प्रसाद। अधिशासी अभियंता, पीएमजीएवाई बागेश्वर 
      
-नायलमाफी गांव को सड़क से जोड़ने के उनके शुरू से प्रयास रहे हैं। जनसंख्या कम होने के कारण गांव पीएमजीएसवाई के तहत नहीं जुड़ पा रहा था। अब केंद्र सरकार ने शासन के अनुरोध पर 400 से अधिक जनसंख्या वाले सभी गांवों को इस योजना के तहत जोड़ने का निर्णय लिया है। पीएमजीएवाई ने गांव को सड़क से जोड़ने के लिए डीपीआर तैयार कर भेज दी है। सड़क के निर्माण के लिए बजट दिलाने में पूरा सहयोग दूंगा। 
चंदन राम दास। विधायक विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर    
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