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साहित्य की चुनौतियों पर चर्चा

Tue, 23 Sep 2014 05:33 AM IST
Bageshwar
Bageshwar Updated Tue, 23 Sep 2014 05:33 AM IST
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बागेश्वर। प्रकटेश्वर मंदिर में नागरिक मंच की ओर से ‘साहित्यिक विमर्श के दौरान उत्तराखंड राज्य आंदोलन और आज तक के परिदृश्य’ पर चर्चा हुई। उत्तराखंड के ज्वलंत मसलों के साथ ही साहित्य जगत के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी पर विचार विमर्श हुआ। ऐसे ही सरोकारों से जुड़े त्रेपन सिंह चौहान के उपन्यास ‘हे ब्वारी’ का विमोचन हुआ और पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। शंभू राणा की पुस्तक ‘माफ करना हे पिता’ और वन आंदोलन की चेतना से जुड़ी ‘दावानल’ पर भी चर्चा हुई। वक्तओं ने कहा कि साहित्य मानवीय चेतनाओं को झकझोरने वाला सबसे सशक्त माध्यम है, लेकिन महंगा होने की वजह से यह आम लोगों की पहुंच से दूर है। इस मौके पर डा श्मशेर सिंह बिष्ट, त्रेपन सिंह चौहान, पूर्व पुलिस महानिदेशक बीके राय, नागरिक मंच के अध्यक्ष पंकज पांडे, घनश्याम शर्मा, डब्बू मेहता, दीप जोशी, गिरीश रावत, भुवन चौबे,गणेश दत्त पांडे आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता सुनील कांडपाल ने संचालन डा शरद भट्ट ने किया।
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