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10 बेड के अस्पताल में 55 रोगी
अमर उजाला ब्यूरो, कपकोट (बागेश्वर)।
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:33 PM IST
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धरमघर के बास्ती में इस तरह जमीन पर लेटाकर हुआ पीड़ितों का इलाज।
- फोटो : अमर उजाला
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तहसील मुख्यालय स्थित 10 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को गडेरा गांव से फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए कई मरीजों को भर्ती किया गया। शनिवार को मरीजों की संख्या बढ़कर 55 हो गई। अव्यवस्थाओं के चलते डॉक्टरों ने फर्श पर लिटाकर ही मरीजों का उपचार किया।
अस्पताल में 12 डाक्टरों के सापेक्ष सिर्फ चार ही डॉक्टर तैनात हैं। एक्सरे तकनीनिशयन न होने से कक्ष में ताला लगा है जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने के लिए जिला अस्पताल से सप्ताह में एक दिन रेडियोलॉजिस्ट आते हैं।
75 हजार की आबादी वाली कपकोट तहसील बाढ़ भूूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील है जबकि भूकंप की दृष्टि से यह जोन पांच में आती है।
यहां सिर्फ 10 बेड का ही अस्पताल है। शुक्रवार को गडेरा गांव के फूडप्वाइजनिंग 19 पीड़ित यहां पहुंचे शनिवार को यह संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई। अस्पताल में बेडों की संख्या काफी कम होने के कारण डाक्टरों को एक बेड पर दो-दो तो बाकी मरीजों को जमीन पर लिटाकर उपचार करना पड़ा।
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अस्पताल में डाक्टरों के साथ ही जीएनएम के दो और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की काफी कमी है जिस कारण मरीजों के उपचार में दिक्कत हो रही है। अव्यवस्थाओं को ऐसा मंजर है कि सिंटेक्स में पानी चढ़ाने के लिए तक कर्मी नहीं है जिससे शौचालयों में पानी की आपूर्ति प्रभावित रहती है।
एक्सरे मशीन के लिए तकनीशियन तो अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के पूर्णकालिक रेडियोलॉजिस्ट नही हैं। इस काम के लिए लोगों को 25 से 35 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश गढ़िया ने कहा कि शुक्रवार और शनिवार को मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि उनके लिए कंबल तक घरों से लाने से लाने पड़े। उन्होंने लोगों से आपदा प्रभावित क्षेत्र के अस्पताल की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
सीएचसी कपकोट की समस्या संज्ञान में हैं। डॉक्टरों, जीएनएम और चतुर्थश्रेणियों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए जिला अस्पताल से हर बृहस्पतिवार को रेडियोलॉजिस्ट को भेजा जा रहा है। - डॉ. जेसी मंडल, मुख्य चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।
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अस्पताल में 12 डाक्टरों के सापेक्ष सिर्फ चार ही डॉक्टर तैनात हैं। एक्सरे तकनीनिशयन न होने से कक्ष में ताला लगा है जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने के लिए जिला अस्पताल से सप्ताह में एक दिन रेडियोलॉजिस्ट आते हैं।
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75 हजार की आबादी वाली कपकोट तहसील बाढ़ भूूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील है जबकि भूकंप की दृष्टि से यह जोन पांच में आती है।
यहां सिर्फ 10 बेड का ही अस्पताल है। शुक्रवार को गडेरा गांव के फूडप्वाइजनिंग 19 पीड़ित यहां पहुंचे शनिवार को यह संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई। अस्पताल में बेडों की संख्या काफी कम होने के कारण डाक्टरों को एक बेड पर दो-दो तो बाकी मरीजों को जमीन पर लिटाकर उपचार करना पड़ा।
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अस्पताल में डाक्टरों के साथ ही जीएनएम के दो और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की काफी कमी है जिस कारण मरीजों के उपचार में दिक्कत हो रही है। अव्यवस्थाओं को ऐसा मंजर है कि सिंटेक्स में पानी चढ़ाने के लिए तक कर्मी नहीं है जिससे शौचालयों में पानी की आपूर्ति प्रभावित रहती है।
एक्सरे मशीन के लिए तकनीशियन तो अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के पूर्णकालिक रेडियोलॉजिस्ट नही हैं। इस काम के लिए लोगों को 25 से 35 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश गढ़िया ने कहा कि शुक्रवार और शनिवार को मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि उनके लिए कंबल तक घरों से लाने से लाने पड़े। उन्होंने लोगों से आपदा प्रभावित क्षेत्र के अस्पताल की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
सीएचसी कपकोट की समस्या संज्ञान में हैं। डॉक्टरों, जीएनएम और चतुर्थश्रेणियों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए जिला अस्पताल से हर बृहस्पतिवार को रेडियोलॉजिस्ट को भेजा जा रहा है। - डॉ. जेसी मंडल, मुख्य चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।