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ग्राम पंचायतों में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं

Mon, 23 Apr 2018 11:28 PM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:28 PM IST
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ग्राम पंचायतों में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं
बागेश्वर। एक ओर ग्राम पंचायतों को सुविधा संपन्न बनाने की बात कही जाती है दूसरी ओर गांवों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ग्राम पंचायतों के पास वित्तीय अधिकार नहीं होने से जरूरत के अनुसार विकास कार्य तक नहीं हो पाते हैं। बागेश्वर जिले में आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी बिजली और संचार जैसी सुविधाएं तक नहीं हैं।
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बागेश्वर जनपद में 416 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें आबाद ग्रामों की संख्या 847 है। 2.62 लाख की आबादी वाले जिले की 2.30 लाख की आबादी गांवों में रहती है। इसके बावजूद गांवों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, बिजली, पेयजल, संचार, पथ प्रकाश व्यवस्था, सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। आधी अधूरी सुविधाओं का लाभ जनता को नहीं मिल पाता है। बागेश्वर जिले में बिजली नहीं होने से 60 गांवों के 1400 परिवार आज भी अंधेरे में रह रहे हैं। कपकोट के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार की सुविधा लोगों को नहीं मिल सकी है। सड़कें बनने के बावजूद लोग पैदल चल रहे हैं। असुविधाओं के कारण गांवों से पलायन बढ़ रहा है।
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गांवों को अधिकार संपन्न बनाए जाने की जरूरत है। पंचायती राज एक्ट लागू है, लेकिन ग्राम प्रधानों के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं हैं। ऐसे में विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है। एक वर्ष में अधिकतम पांच लाख रुपये का बजट मिलता है। इससे गांव में जरूरत के अनुसार विकास कार्य नहीं हो पाते हैं। विधायक निधि, सांसद निधि सहित अन्य वित्तीय स्वीकृति के लिए ग्राम प्रधानों की सहमति का प्रावधान होना चाहिए।
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- कैलाश गढ़िया, अध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन।

ग्राम पंचायतों में बड़ा बदलाव आया है। ग्राम पंचाय लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। ग्रामीणों को उनके अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी दी गई है। आज पंचायतों में महिलाएं, एससीएसटी और पिछड़े वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की बैठकों में पंचायत प्रतिनिधि अपनी समस्याएं सदन में रखते हैं। विकासखंड और जिला पंचायत के माध्यम से गांवों में विकास योजनाएं संचालित होती हैं। बच्चों को लोकतंत्र और उसमें निहित अधिकारों की जानकारी देने के लिए गांवों में बाल पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है।
- पूनम पाठक, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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