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सीएचसी के संचालन के चक्कर में अन्य अस्पतालों की चरमराई व्यवस्था
Updated Thu, 17 May 2018 11:53 PM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। पीपीपी मोड से हटते ही सीएचसी की व्यवस्था पटरी पर लाना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है। अस्पताल के कुशल संचालन के चक्कर में क्षेत्र के अन्य अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। यहां की व्यवस्था संभालने के लिए दूसरे अस्पतालों से स्वास्थ्यकर्मी बुलाए गए हैं फिर भी यहां पर्याप्त कर्मी नहीं हैं। अब उन अस्पतालों की व्यवस्था भगवान भरोसे हो गई है। इससे सीएचसी के साथ ही उन क्षेत्र के लोगों को भी कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने 14 मई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शील नर्सिंग होम बरेली से अपने संचालन में ले लिया है। लोगों को आशा थी कि पीपीपी मोड हटने पर शासन, विभाग अस्पताल को बेहतर बनाएगा। चार दिन बीतने के बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाएं ढर्रे पर नहीं आ सकी हैं। अस्पताल में ऑपरेटर नहीं होने के कारण एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन कक्षों के ताले आज तक नहीं खुल सके हैं। यही हाल पैथोलॉजी कक्ष का है। रोगी बाहर से महंगे दामों पर जांचें कराने को मजबूर हैं। विभाग ने प्रभारी समेत कुल चार डॉक्टर तैनात किए हैं जिनमें से डॉ. देवेेश गंगवार की पीजी जॉलीग्रांट में नियुक्ति हो गई है। अस्पताल में सिर्फ एक फार्मेसिस्ट हैं।
संचालन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग और एएनएम सेंटर असों से एक-एक फार्मेसिस्ट को लाया गया है। चार स्टाफ नर्सों के सापेक्ष यहां सिर्फ दो ही हैं। यह नर्से एनएचएम, प्राथमिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य केंद्र बदियाकोट से हैं। चार एमएनएम के सापेक्ष एक ही है। एक अन्य को किसी अन्य केंद्र से बुलाया गया है। अस्पताल में वार्ड ब्वॉय भी नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाली, जलमानी, लोहारखेत और उद्यमस्थल से वार्ड ब्वॉय बुलाए गए हैं। रात में अस्पताल की देखरेख के लिए चौकीदार तक नहीं है। काम चलाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग की महिला पर्यावरण मित्र को यहां बुलाया गया है।
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विशेषज्ञों का अकाल
सीएचसी में महत्वपूर्ण रोगों के विशेषज्ञों का अकाल पड़ गया है। अस्पताल में फिजिशयन, सर्जन, बाल रोग, सर्जन, दंत सर्जन के पद सृजित हैं लेकिन इन पर कोई तैनाती नहीं हुई है। चकित्सा विशेषज्ञ नहीं होने से लोगों को इलाज के लिए आज भी पहले की तरह ही बागेश्वर और हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
मैंने रिक्त पदों और अन्य समस्याओं की सूची तैयार करके मुख्य चिकित्साधिकारी को भेज दी है। शीघ्र ही समस्याओं के समाधान की आशा है। अस्पताल के कुशल संचालन के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी कपकोट।
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स्वास्थ्य विभाग ने 14 मई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शील नर्सिंग होम बरेली से अपने संचालन में ले लिया है। लोगों को आशा थी कि पीपीपी मोड हटने पर शासन, विभाग अस्पताल को बेहतर बनाएगा। चार दिन बीतने के बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाएं ढर्रे पर नहीं आ सकी हैं। अस्पताल में ऑपरेटर नहीं होने के कारण एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन कक्षों के ताले आज तक नहीं खुल सके हैं। यही हाल पैथोलॉजी कक्ष का है। रोगी बाहर से महंगे दामों पर जांचें कराने को मजबूर हैं। विभाग ने प्रभारी समेत कुल चार डॉक्टर तैनात किए हैं जिनमें से डॉ. देवेेश गंगवार की पीजी जॉलीग्रांट में नियुक्ति हो गई है। अस्पताल में सिर्फ एक फार्मेसिस्ट हैं।
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संचालन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग और एएनएम सेंटर असों से एक-एक फार्मेसिस्ट को लाया गया है। चार स्टाफ नर्सों के सापेक्ष यहां सिर्फ दो ही हैं। यह नर्से एनएचएम, प्राथमिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य केंद्र बदियाकोट से हैं। चार एमएनएम के सापेक्ष एक ही है। एक अन्य को किसी अन्य केंद्र से बुलाया गया है। अस्पताल में वार्ड ब्वॉय भी नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाली, जलमानी, लोहारखेत और उद्यमस्थल से वार्ड ब्वॉय बुलाए गए हैं। रात में अस्पताल की देखरेख के लिए चौकीदार तक नहीं है। काम चलाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग की महिला पर्यावरण मित्र को यहां बुलाया गया है।
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विशेषज्ञों का अकाल
सीएचसी में महत्वपूर्ण रोगों के विशेषज्ञों का अकाल पड़ गया है। अस्पताल में फिजिशयन, सर्जन, बाल रोग, सर्जन, दंत सर्जन के पद सृजित हैं लेकिन इन पर कोई तैनाती नहीं हुई है। चकित्सा विशेषज्ञ नहीं होने से लोगों को इलाज के लिए आज भी पहले की तरह ही बागेश्वर और हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
मैंने रिक्त पदों और अन्य समस्याओं की सूची तैयार करके मुख्य चिकित्साधिकारी को भेज दी है। शीघ्र ही समस्याओं के समाधान की आशा है। अस्पताल के कुशल संचालन के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी कपकोट।