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मेले पहुंची बेशकीमती जड़ीबूटियां
Updated Mon, 15 Jan 2018 10:57 PM IST
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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले में पिथौरागढ़ जिले के दारमा घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र के बौन गांव से कई बेशकीमती जड़ीबूटियां यहां पहुंची हैं। विक्रेताओं के अनुसार अनेक जड़ीबूटियां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताई जा रही हैं।
बौन गांव के सरपंच किशन बोनाल स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं। वह मेले में पिछले 30 साल से भी अधिक समय से जड़ीबूटी लेकर आ रहे हैं। साथ में उनकी प्रधान पत्नी आशा देवी भी आई हैं। बोनाल ने बताया कि वह मेले में जंबू, गंद्राणी, डोलू, कुटकी, बुतेदाना, चिरौता, छिपी, रतनजोड़, तिमूर, हींग, किरवीसी लेकर आए हैं। ये सभी जड़ीबूटियां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इसके अलावा भगवान की पूजा में काम आने जटामांसी भी लाए हैं। बोनाल ने बताया कि उनके गांव में जड़ीबूटियों की खेती की जा रही है। जड़ीबूटियों को तैयार होने में तीन महीने का समय लगता है। समूह के जरिए ही वह जड़ीबूटियों को मेले में लाए हैं।
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बौन गांव के सरपंच किशन बोनाल स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं। वह मेले में पिछले 30 साल से भी अधिक समय से जड़ीबूटी लेकर आ रहे हैं। साथ में उनकी प्रधान पत्नी आशा देवी भी आई हैं। बोनाल ने बताया कि वह मेले में जंबू, गंद्राणी, डोलू, कुटकी, बुतेदाना, चिरौता, छिपी, रतनजोड़, तिमूर, हींग, किरवीसी लेकर आए हैं। ये सभी जड़ीबूटियां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इसके अलावा भगवान की पूजा में काम आने जटामांसी भी लाए हैं। बोनाल ने बताया कि उनके गांव में जड़ीबूटियों की खेती की जा रही है। जड़ीबूटियों को तैयार होने में तीन महीने का समय लगता है। समूह के जरिए ही वह जड़ीबूटियों को मेले में लाए हैं।
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