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बागेश्वर में 16.67 हेक्टेयर जंगल जला
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बागेश्वर के झटक्वाली के जंगल में लगी आग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। मंगलवार को भी बागेश्वर जिले में जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी रहा। जिले में आठ स्थानों में जंगलों में आग लगी। आग से कपकोट के ऐठाण गांव में खेत में खड़ी गेहूं की फसल जल गई। इससे किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। गांव के लोगों ने बमुश्किल आग बुझाई। तब तक गेहूं की फसल राख हो चुकी थी। मंगलवार को कपकोट रेंज में पांच, बागेश्वर रेंज में दो और बैजनाथ रेंज के एक जंगल में आग लगी। शीतकाल से अब तक जंगलों में आग लगने की 121 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें 172.67 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। बीते 24 घंटों में जंगलों की आग की आठ घटनाओं में साढ़े 16 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।
सोमवार रात और मंगलवार को बागेश्वर के झटक्वाली, कौसानी के पिनाक मंदिर, बद्रीनाथ के जंगलों में आग लगी रही। जंगल में आग लगने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया। अब भी कई स्थानों में आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार हो रही वनाग्नि की घटनाओं से वातावरण में धुंध छाई हुई है। मंगलवार को अन्य दिनों की अपेक्षा वातावरण में धुंध कम थी। डीएफओ बीएस शाही का कहना है कि आग बुझाने में सभी 29 क्रू स्टेशन तत्परता से जुटे हुए हैं। आग पर काबू पाया जा रहा है।
जंगल में आग लगते ही आग बुझाने दौड़ पड़ते हैं कृष्णा और रेखा
बागेश्व। जंगलों में आग लगने की अधिकांश घटनाओं के पीछे अराजकतत्वों का हाथ माना जाता रहा है। कांडा क्षेत्र में वन विभाग एक मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ वन अधिनियम में मुकदमा भी दर्ज कर चुका है। ऐसे में गरुड़ तहसील के बद्रीनाथ गांव के कृष्णा कुमार और रेखा देवी मिसाल बने हुए हैं। कृष्णा और रेखा बद्रीनाथ के जंगलों में लगी आग को कई बार बुझा चुके हैं। वह आग लगने की घटना होते ही जंगलों की ओर दौड़ लगा देते हैं और अकेले ही आग बुझाने में जुट जाते हैं। कृष्णा कुमार ने बताया कि पेड़, पौधों और वनस्पति को बचाने में ही मानव की भलाई है। इसलिए वह जंगल की आग को बुझाकर सुकून महसूस करते हैं। कहते हैं कि आगे भी वह लोग जंगल की आग बुझाने का काम करते रहेंगे। (संवाद)
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बागेश्वर में वनाधिकारियों, कर्मचारियों के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में वन विभाग में अधिकारी, कर्मचारियों के 209 पदों में से 79 पद रिक्त चल रहे हैं। अधिकारी, कर्मचारियों की कमी जंगलों की आग बुझाने में कहीं न कहीं आढ़े आ रही है। प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सहायक वन संरक्षक के दोनों पद खाली हैं। वन क्षेत्राधिकारी के पांचों पदों पर तैनाती है। उपराजिक के पांच में से तीन पद रिक्त हैं। वन दरोगा के 62 पदों में से 18 रिक्त हैं। वन रक्षक के 68 पदों में से 43 रिक्त हैं। चालक के भी दो पद रिक्त हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही लिपिक संवर्ग में भी तमाम पद रिक्त हैं। डीएफओ बीएस शाही का कहना है कि विभाग में 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। रिक्तियों की पूर्ति के लिए प्रत्येक माह शासन को पत्र भेजा जाता है।
आग पर नियंत्रण के लिए वन विभाग को मिले हैं 1.04 करोड़
बागेश्वर। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने बताया कि अग्निकाल के मार्च तक 92 लाख रुपये का बजट विभाग से मिला है। 12.40 लाख रुपये जिला प्रशासन ने प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि इस रकम से पर्याप्त संसाधन जुटाए गए हैं। फायर वॉचरों की संख्या भी 174 से बढ़ाकर 180 कर दी गई है।
वर्ष 2016 से अब तक हुईं वनाग्नि की घटनाएं
बागेश्वर। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 के अग्निकाल में जिले में जंगलों में आग लगने की 55 घटनाएं हुई थीं। 219.35 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था। वर्ष 2017 में 44 घटनाओं में 88.30 हेक्टेयर, 2018 में 130 घटनाओं में 297.25 हेक्टेयर और वर्ष 2019 में 120 घटनाओं में 184.17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल जले थे। वर्ष 2020 में शीतकाल में जंगलों में आग लगने की केवल 4 घटनाएं हुई। इसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था। शीतकाल से अब तक आग लगने की 121 घटनाओं में 172.67 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हो गया है।
आबादी की ओर आ रहे जानवर
गरुड़ (बागेश्वर)। वन प्रभाग बागेश्वर के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज के जंगल कई दिनों से आग से धधक रहे है। वन कर्मी और ग्रामीण आग बुझाने में लगे है। वानणा, वज्यूला, मजकोट, हुनेरा देवनाई के जंगलों में भीषण आग लगने से जंगली जानवरों का रुख आबादी की ओर बढ़ रहा है। सिमसाल, सेलाबगड़, नरग्वाड़ी, तिलसारी के ग्रामीणों का कहना है कि घुरड़ और काकड़ इस बीच आबादी में दिख रहे है। वन रेंजर हरीश खर्कवाल ने बताया कि तपिश बढ़ने से जंगलों में गिरे पिरूल पर एकदम आग लग रही है। उन्होंने ग्रामीणों से आग बुझाने में ग्रामीणों को सहयोग देने को कहा है।
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सोमवार रात और मंगलवार को बागेश्वर के झटक्वाली, कौसानी के पिनाक मंदिर, बद्रीनाथ के जंगलों में आग लगी रही। जंगल में आग लगने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया। अब भी कई स्थानों में आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार हो रही वनाग्नि की घटनाओं से वातावरण में धुंध छाई हुई है। मंगलवार को अन्य दिनों की अपेक्षा वातावरण में धुंध कम थी। डीएफओ बीएस शाही का कहना है कि आग बुझाने में सभी 29 क्रू स्टेशन तत्परता से जुटे हुए हैं। आग पर काबू पाया जा रहा है।
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जंगल में आग लगते ही आग बुझाने दौड़ पड़ते हैं कृष्णा और रेखा
बागेश्व। जंगलों में आग लगने की अधिकांश घटनाओं के पीछे अराजकतत्वों का हाथ माना जाता रहा है। कांडा क्षेत्र में वन विभाग एक मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ वन अधिनियम में मुकदमा भी दर्ज कर चुका है। ऐसे में गरुड़ तहसील के बद्रीनाथ गांव के कृष्णा कुमार और रेखा देवी मिसाल बने हुए हैं। कृष्णा और रेखा बद्रीनाथ के जंगलों में लगी आग को कई बार बुझा चुके हैं। वह आग लगने की घटना होते ही जंगलों की ओर दौड़ लगा देते हैं और अकेले ही आग बुझाने में जुट जाते हैं। कृष्णा कुमार ने बताया कि पेड़, पौधों और वनस्पति को बचाने में ही मानव की भलाई है। इसलिए वह जंगल की आग को बुझाकर सुकून महसूस करते हैं। कहते हैं कि आगे भी वह लोग जंगल की आग बुझाने का काम करते रहेंगे। (संवाद)
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बागेश्वर में वनाधिकारियों, कर्मचारियों के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में वन विभाग में अधिकारी, कर्मचारियों के 209 पदों में से 79 पद रिक्त चल रहे हैं। अधिकारी, कर्मचारियों की कमी जंगलों की आग बुझाने में कहीं न कहीं आढ़े आ रही है। प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सहायक वन संरक्षक के दोनों पद खाली हैं। वन क्षेत्राधिकारी के पांचों पदों पर तैनाती है। उपराजिक के पांच में से तीन पद रिक्त हैं। वन दरोगा के 62 पदों में से 18 रिक्त हैं। वन रक्षक के 68 पदों में से 43 रिक्त हैं। चालक के भी दो पद रिक्त हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही लिपिक संवर्ग में भी तमाम पद रिक्त हैं। डीएफओ बीएस शाही का कहना है कि विभाग में 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। रिक्तियों की पूर्ति के लिए प्रत्येक माह शासन को पत्र भेजा जाता है।
आग पर नियंत्रण के लिए वन विभाग को मिले हैं 1.04 करोड़
बागेश्वर। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने बताया कि अग्निकाल के मार्च तक 92 लाख रुपये का बजट विभाग से मिला है। 12.40 लाख रुपये जिला प्रशासन ने प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि इस रकम से पर्याप्त संसाधन जुटाए गए हैं। फायर वॉचरों की संख्या भी 174 से बढ़ाकर 180 कर दी गई है।
वर्ष 2016 से अब तक हुईं वनाग्नि की घटनाएं
बागेश्वर। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 के अग्निकाल में जिले में जंगलों में आग लगने की 55 घटनाएं हुई थीं। 219.35 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था। वर्ष 2017 में 44 घटनाओं में 88.30 हेक्टेयर, 2018 में 130 घटनाओं में 297.25 हेक्टेयर और वर्ष 2019 में 120 घटनाओं में 184.17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल जले थे। वर्ष 2020 में शीतकाल में जंगलों में आग लगने की केवल 4 घटनाएं हुई। इसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था। शीतकाल से अब तक आग लगने की 121 घटनाओं में 172.67 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हो गया है।
आबादी की ओर आ रहे जानवर
गरुड़ (बागेश्वर)। वन प्रभाग बागेश्वर के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज के जंगल कई दिनों से आग से धधक रहे है। वन कर्मी और ग्रामीण आग बुझाने में लगे है। वानणा, वज्यूला, मजकोट, हुनेरा देवनाई के जंगलों में भीषण आग लगने से जंगली जानवरों का रुख आबादी की ओर बढ़ रहा है। सिमसाल, सेलाबगड़, नरग्वाड़ी, तिलसारी के ग्रामीणों का कहना है कि घुरड़ और काकड़ इस बीच आबादी में दिख रहे है। वन रेंजर हरीश खर्कवाल ने बताया कि तपिश बढ़ने से जंगलों में गिरे पिरूल पर एकदम आग लग रही है। उन्होंने ग्रामीणों से आग बुझाने में ग्रामीणों को सहयोग देने को कहा है।