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विधायक आवास पर धरने पर बैठे ग्रामीण
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:24 PM IST
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बागेश्वर। सड़क के लिए संघर्ष कर रहे तिपोला के बाशिंदों का सब्र मंगलवार को जवाब दे गया। मिलने का समय देने के बावजूद विधायक के आवास पर नहीं मिलने पर ग्रामीण आवास के प्रवेश द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। वहां उन्होंने खूब हंगामा काटा और प्रदर्शन किया। विधायक की वादाखिलाफी से नाराज होकर रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा भी लगाया। बाद में डीएम को ज्ञापन भी सौंपा।
मंगलवार को तिपोला के ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर विधायक चंदन रामदास से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। विधायक ने उन्हें सुबह मिलने का वक्त दिया था लेकिन वह नहीं मिले। बताया गया कि वह मीटिंग के सिलसिले में देहरादून चले गए हैं। इसपर ग्रामीण भड़क उठे और मुख्य प्रवेश द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने सड़क और पुुल निर्माण की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
घंटा भर धरना-प्रदर्शन के बाद ग्रामीण डीएम मिले और जल्द से जल्द सड़क और पुुल बनाने की मांग की। इस दौरान प्रधान गुसाई राम, दयाल सिंह, मोहन सिंह, सुंदर सिंह, संजय सिंह, पनीराम, दिनेश सिंह, प्रेमा, सरूली, बसंती, नारायणी, चनुली, सुनीता आदि थे।
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सात साल से सड़क का इंतजार
कमोवेश सड़क सुविधा से वंचित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की तरह ही तिपोला के ग्रामीण दशकों से गांव तक सड़क पहुंचने का सपना देख रहे हैं। 2011 में सड़क को स्वीकृति मिलने के बाद भी सड़क नहीं बनी है। पिछले सात साल से सड़क निर्माण की फाइल शासन-प्रशासन में धूल फांक रही है।
बारिश में बच्चे नहीं जा पाते स्कूल
तिपोला के ग्रामीणों को जेठाई सड़क तक पहुंचने के लिए चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। दूसरी ओर बच्चों को सात किमी दूर स्थित स्कूल के लिए बरसाती नदी पार कर जाना पड़ता है। मौसम खराब होने या फिर बारिश होने पर वह स्कूल नहीं जा पाते हैं। बीमारी आदि आपात स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है।
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मंगलवार को तिपोला के ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर विधायक चंदन रामदास से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। विधायक ने उन्हें सुबह मिलने का वक्त दिया था लेकिन वह नहीं मिले। बताया गया कि वह मीटिंग के सिलसिले में देहरादून चले गए हैं। इसपर ग्रामीण भड़क उठे और मुख्य प्रवेश द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने सड़क और पुुल निर्माण की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
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घंटा भर धरना-प्रदर्शन के बाद ग्रामीण डीएम मिले और जल्द से जल्द सड़क और पुुल बनाने की मांग की। इस दौरान प्रधान गुसाई राम, दयाल सिंह, मोहन सिंह, सुंदर सिंह, संजय सिंह, पनीराम, दिनेश सिंह, प्रेमा, सरूली, बसंती, नारायणी, चनुली, सुनीता आदि थे।
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सात साल से सड़क का इंतजार
कमोवेश सड़क सुविधा से वंचित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की तरह ही तिपोला के ग्रामीण दशकों से गांव तक सड़क पहुंचने का सपना देख रहे हैं। 2011 में सड़क को स्वीकृति मिलने के बाद भी सड़क नहीं बनी है। पिछले सात साल से सड़क निर्माण की फाइल शासन-प्रशासन में धूल फांक रही है।
बारिश में बच्चे नहीं जा पाते स्कूल
तिपोला के ग्रामीणों को जेठाई सड़क तक पहुंचने के लिए चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। दूसरी ओर बच्चों को सात किमी दूर स्थित स्कूल के लिए बरसाती नदी पार कर जाना पड़ता है। मौसम खराब होने या फिर बारिश होने पर वह स्कूल नहीं जा पाते हैं। बीमारी आदि आपात स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है।