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किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है यह हकीकत
देहरादून/एजेंसी
Updated Mon, 24 Jun 2013 06:28 PM IST
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उत्तराखंड आपदा में हकीकत भरी यह दास्तान किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। टिहरी निवासी विजेंद्र सिंह नेगी वह भयावह मंजर जिंदगी भर भुला नहीं पाएंगे।
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उन्होंने केदारनाथ मंदिर के घंटे से नौ घंटे तक लटके रहकर और गर्दन तक गहरे पानी में तैरते शवों पर खड़े होकर अपनी जान बचाई।
36 वर्षीय नेगी के रिश्तेदार और दिल्ली के पर्यटन ऑपरेटर गंगा सिंह भंडारी ने बताया, जब बाढ़ आई तब नेगी मंदिर के पास बने तीन मंजिला होटल में था।
वह होटल की छत से मंदिर की ओर भेर पानी में कूद गया। इस दौरान उसके हाथ में मंदिर का घंटा आ गया और वह उसे पकड़कर सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक लटका रहा।
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संतुलन बनाने के लिए वह पानी में बहते शवों के ऊपर खड़ा रहा। पानी के तेज प्रवाह से उसके कपड़े फट गए लेकिन जीवित रहने की उम्मीद उसकी हिम्मत बंधाती रही।
कपडे़ फट जाने पर उसने अपने लगभग नग्न शरीर को ढकने के लिए आसपास पड़े शवों के कपड़े उतारे। पानी का स्तर कम हो जाने के बाद वह जंगल में दो दिनों तक पड़ा रहा।
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बाद में सेना के हेलीकॉप्टर ने उसे बचाया। इतनी देर तक घंटा पकड़े रहने से नेगी के हाथों में बड़े-बड़े छाले पड़ गए हैं। नेगी को जीवित देखकर उसके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू है।
भंडारी का होटल केदारनाथ मंदिर के पास बना हुआ था। नेगी इसी होटल में ठहरा था। भंडारी ने बताया, मेरा होटल बाढ़ में बह गया।
होटल प्रबंधक और बावर्ची ने ऊंचे स्थानों पर जाकर अपनी जान बचाई।
भंडारी ने बताया कि उसने उत्तराखंड में एक साथ 12 बसें भेजी थीं और अब तक तीन लोगों के मरने की सूचना मिली है। अधिकतर लोग सुरक्षित लौट आए हैं।