पहाड़ की पीड़ा: खाली होते गांवों की बेबस कहानी, युवा कर गए पलायन, बुढ़ापे का है रैनबसेरा
अल्मोड़ा के मौलेखाल में सड़क न होने से खदेरागांव में पिछले दिनों एक वृद्धा की मौत हो गई थी। इस गांव की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां की 60 फीसदी आबादी इसलिए पलायन कर गई क्योंकि गांव तक सड़क नहीं है।
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अल्मोड़ा के मौलेखाल में सड़क न होने से खदेरागांव में पिछले दिनों एक वृद्धा की मौत हो गई थी। इस गांव की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां की 60 फीसदी आबादी इसलिए पलायन कर गई क्योंकि गांव तक सड़क नहीं है। ऐसे में बीमार और गर्भवतियां समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे थे। एक दशक पूर्व इस गांव में 500 की आबादी थी जो अब केवल 200 रह गई है। हालात यह हैं कि गांव में युवा नहीं हैं और सिर्फ बुजुर्गों का बसेरा है।
बूढ़ी आंखें अब भी गांव तक सड़क पहुंचने के साथ फिर से यहां बसासत बढ़ने की उम्मीद कर रही है मगर उनकी यह उम्मीद कब पूरी होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। स्वीकृति के 17 साल बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकी है।
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- वर्ष 2017 में सड़क स्वीकृत हुई थी। इसका अब तक अता-पता नहीं है। सड़क न होने से यहां के लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं और दम तोड़ रहे हैं। पूरा गांव पलायन की मार झेल रहा है। -हेमा देवी, प्रधान।
- हमारी आंखें सड़क देखने के लिए पथरा गईं हैं। अब तो उम्र के इस पड़ाव में बगैर वाहन के गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल है। सड़क न होने से युवाओं ने गांव से पलायन करना पड़ा है। -कुंदन सिंह।
- सड़क न होने से एक महिला ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद शासन-प्रशासन को संज्ञान लेकर सड़क निर्माण की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इसका खामियाजा किसी अन्य को न भुगतना पड़े। -बुवेर सिंह।
- हमें यह लग रहा है कि आज भी हम गुलाम हैं। विकास के लिए गांवों को सड़क से जोड़ने के खूब दावे हो रहे हैं, लेकिन हमारे गांव के लोग सड़क न होने से मर रहे हैं। -जमन सिंह।
- कोट- सल्ट से खदेरागांव होते हुए देवीखाल तक सड़क प्रस्तावित है। पूर्व में सड़क के कुछ हिस्से का निर्माण किया गया जो विवाद के चलते रोक दिया गया। न्यायालय में वाद विचाराधीन होने से सड़क निर्माण रुका है। -जेसी पांडे, सहायक अभियंता, लोनिवि, सल्ट।