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चाय बोर्ड जल्द ही बंद पड़ी कौसानी फैक्ट्री को करेगा चालू
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अल्मोड़ा। कौसानी में पिछले पांच साल से बंद पड़ी चाय फैक्ट्री को पुन: चालू करने की कवायद उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने शुरू कर दी है। बंद फैक्ट्री को चालू करने को लेकर बोर्ड उपाध्यक्ष और अधिकारियों की 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री के साथ बैठक होगी। जिसके बाद इस फैक्ट्री के पुन: संचालित होने की उम्मीद है।
कौसानी और आसपास के इलाके में काफी बड़े क्षेत्र में चाय बागान हैं। उत्तराखंड चाय बोर्ड के प्रयासों के बाद निजी उद्यमी ने 2001 में कौसानी में चाय फैक्ट्री स्थापित की। पूर्व में फैक्ट्री ठीकठाक चली। बोर्ड के माध्यम से चाय की पत्तियां फैक्ट्री को उपलब्ध कराई जाती थीं। 2001 में चाय की पत्तियों का मूल्य 13 रुपये प्रति किलो निर्धारित था।
शासन के निर्देश पर पहले पांच साल और उसके बाद दो-दो साल में चाय की पत्तियों के रेट रिवाइज होने थे। पर चाय फैक्ट्री मालिक ने बोर्ड को बढ़ी हुई दर से चाय की पत्तियों का भुगतान नहीं किया। 2015 में शासन के निर्देश पर बोर्ड ने फैक्ट्री को चाय की पत्तियों की आपूर्ति रोक दी और फैक्ट्री बंद हो गई। फैक्ट्री मालिक ने चाय की पत्तियों का 44 लाख का रुपये बोर्ड को भुगतान करना था।
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यह मामला न्यायालय में भी पहुंचा। न्यायालय के आदेश के बाद फैक्ट्री मालिक ने उत्तराखंड चाय बोर्ड को 23 लाख रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन अभी भी उस पर 25 लाख रुपये का बकाया है। बागेश्वर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ आरसी भी काटी हुई है। उत्तराखंड चाय बोर्ड ने गरुड़ के हरिनगरी में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत स्वयं फैक्ट्री स्थापित की। कौसानी फैक्ट्री से बेरोजगार हुए तकनीकी कर्मियों को हरिनगरी फैक्ट्री में रोजगार उपलब्ध कराया गया। बोर्ड की योजना अब कौसानी चाय फैक्ट्री को पुन: संचालित करने करने की है।
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कौसानी और आसपास के इलाके में काफी बड़े क्षेत्र में चाय बागान हैं। उत्तराखंड चाय बोर्ड के प्रयासों के बाद निजी उद्यमी ने 2001 में कौसानी में चाय फैक्ट्री स्थापित की। पूर्व में फैक्ट्री ठीकठाक चली। बोर्ड के माध्यम से चाय की पत्तियां फैक्ट्री को उपलब्ध कराई जाती थीं। 2001 में चाय की पत्तियों का मूल्य 13 रुपये प्रति किलो निर्धारित था।
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शासन के निर्देश पर पहले पांच साल और उसके बाद दो-दो साल में चाय की पत्तियों के रेट रिवाइज होने थे। पर चाय फैक्ट्री मालिक ने बोर्ड को बढ़ी हुई दर से चाय की पत्तियों का भुगतान नहीं किया। 2015 में शासन के निर्देश पर बोर्ड ने फैक्ट्री को चाय की पत्तियों की आपूर्ति रोक दी और फैक्ट्री बंद हो गई। फैक्ट्री मालिक ने चाय की पत्तियों का 44 लाख का रुपये बोर्ड को भुगतान करना था।
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यह मामला न्यायालय में भी पहुंचा। न्यायालय के आदेश के बाद फैक्ट्री मालिक ने उत्तराखंड चाय बोर्ड को 23 लाख रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन अभी भी उस पर 25 लाख रुपये का बकाया है। बागेश्वर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ आरसी भी काटी हुई है। उत्तराखंड चाय बोर्ड ने गरुड़ के हरिनगरी में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत स्वयं फैक्ट्री स्थापित की। कौसानी फैक्ट्री से बेरोजगार हुए तकनीकी कर्मियों को हरिनगरी फैक्ट्री में रोजगार उपलब्ध कराया गया। बोर्ड की योजना अब कौसानी चाय फैक्ट्री को पुन: संचालित करने करने की है।