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हड़ताल से स्वजल के साढ़े 32 करोड़ के कार्य प्रभावित
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कार्य बहिष्कार कर विकास भवन अल्मोड़ा में कार्यालय में बैठक करते आंदोलित स्वजल कार्मिक।
- फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। स्वजल कर्मचारियों को मार्च माह से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है और न ही उन्हें लंबित देयक मिले हैं। प्रांतीय आह्वान पर पिछले पंद्रह दिन से कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं। कर्मचारियों के कार्यबहिष्कार पर रहने से अल्मोड़ा और बागेश्वर में स्वजल विभाग की ओर से होने वाले कामों पर भी असर पड़ा है। हड़ताल से जहां अल्मोड़ा के गांवों में 25 करोड़ रुपये से होने वाले ठोस और तरल अव शिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कार्यों पर असर पड़ा है। वहीं बागेश्वर में करीब 7.46 करोड़ का काम प्रभावित हुआ है।
वेतन के लाले, हम परिवार कैसे पालें
बागेश्वर/अल्मोड़ा। हड़ताली स्वजल कर्मियों ने बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार के दौरान स्वजल कार्यालय में नारेबाजी की। कहा कि मार्च के महीने से उन लोगों को वेतन नहीं मिला है। स्वजल कर्मियों ने सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वेतन का भुगतान होने पर तक वह लोग काम पर नहीं लौटेंगे। वहां कस्तूरबा नंद, आनंद पांडे, संजय बिष्ट, पूरन प्रकाश आदि थे। इधर अल्मोड़ा में बृहस्पतिवार को भी कार्मिकों ने कार्य बहिष्कार कर बैठक की। उन्होंने कहा कि सरकार अन्य विभागों के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान लगातार कर रही है, लेकिन स्वजल विभाग के कार्मिक वेतन से वंचित चल रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष बीएस कन्याल, मनीष दुम्का, धर्मपाल कार्की, संजय ओझा, किशन नेगी, आनंद खोलिया, पंकज बनकोटी आदि ने भाग लिया। संवाद
हड़ताल से प्रभावित कार्य
- अल्मोड़ा के 245 गांवों में 21 करोड़ लागत से चल रहे ठोस और तरल अवशिष्ट प्रबंधन के कार्य।
- 3.75 करोड़ से 253 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण।
- खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस के बेस लाइन का सर्वे कार्य शुरू नहीं।
- बागेश्वर जिले की 106 ग्राम पंचायतों में 7.42 करोड़ रुपये से ठोस अवशिष्ट प्रबंधक का काम
स्वजल कर्मचारियों की मांगें
- सात माह के वेतन और लंबित देयकों का 40 लाख का भुगतान करने।
- अगस्त 2019 से स्वजल विभाग में पदों की निरंतरता जारी रखने।
- जल जीवन मिशन के छीने गए कार्य को स्वजल को माध्यम से कराने।
क्या कहते हैं कर्मचारी
स्वजल कर्मचारियों को बीते सात महीने से वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है। इस कारण पूरे प्रदेश के स्वजल विभाग के कार्मिकों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। सरकार को जल्द वेतन भुगतान करना चाहिए। - बीएस कन्याल, अल्मोड़ा
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स्वजल की थीम पर केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना लागू की है। जिले में स्वजल ने 15 पेयजल योजनाओं की डीपीआर भी बना दी गई थी, लेकिन अब जल जीवन मिशन के कार्य स्वजल से हटा दिए गए हैं। - मनीष दुम्का, अल्मोड़ा
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स्वजल द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए गए कार्यों के बाद राज्य को कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं, लेकिन अब स्वजल विभाग की अनदेखी करना अनुचित है। सात माह के वेतन का जल्द भुगतान होना चाहिए। - धर्मपाल कार्की, अल्मोड़ा
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सरकार अन्य विभागों के कार्मिकों को नियमित वेतन भुगतान कर रही है, लेकिन कार्य करने के बावजूद स्वजल कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं करना अन्यायपूर्ण है। कर्मचारियों को अर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। - किशन नेगी, अल्मोड़ा
सात महीने से वेतन मिलने से गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मेरी बेटी बाहर पढ़ती है। उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए पत्नी के जेवर गिरवी रखने पड़े हैं। सरकार को हमारी इस तरह अनदेखी नहीं करनी चाहिए। - ध्यान चंद्र लोहनी, बागेश्वर
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7 महीने से वेतन न मिलने से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। उधारी से काम चलाया जा रहा है। लोग भी कब तक उधार देंगे। सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए। हमें जल्द वेतन का भुगतान किया जाए। - पूरन सिंह, बागेश्वर
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सात महीने से वेतन नहीं मिला है। इस कारण घर की आवश्यकताएं पूरी करना काफी मुश्किल हो गया है। घर का खर्च चलाने के लिए परिचितों से उधार लेना पड़ रहा है। कैसे परिवार का भरण पोषण होगा, यह सोचकर परेशान हैं। - नरेंद्र बम, बागेश्वर
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वेतन न मिलने से बुरे हाल हो गए हैं। परिवार चलाने के लिए लोगों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। हम किन मुश्किलों में परिवार चला रहे हैं, हम लोग ही जानते हैं। सरकार को स्वजल कर्मियों की दिक्कतों पर ध्यान देना चाहिए। - चंदन सिंह मलड़ा, बागेश्वर
कुछ ने पत्नी के जेवर रखे गिरवी, कुछ ‘भीख’ मांगने को मजबूर
आंदोलन कर रहे स्वजल कर्मियों का कहना है कि सात माह से वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए भी उन्हेें रिश्तेदारों और परिचितों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में एक कर्मचारी ने भरे गले से कहा कि बेटी की पढ़ाई के लिए उन्हें पत्नी के जेवर तक गिरवी रखने पड़ रहे हैं। परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। दुकानदारों की उधारी इतनी हो गई है कि अब उधार मांगने से भी झिझक लगने लगी है। कहा कि सात महीने तक वेतन न मिले तो क्या हालात पैदा हो गए होंगे, इसका अंदाजा सरकार स्वयं लगा सकती है।
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वेतन के लाले, हम परिवार कैसे पालें
बागेश्वर/अल्मोड़ा। हड़ताली स्वजल कर्मियों ने बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार के दौरान स्वजल कार्यालय में नारेबाजी की। कहा कि मार्च के महीने से उन लोगों को वेतन नहीं मिला है। स्वजल कर्मियों ने सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वेतन का भुगतान होने पर तक वह लोग काम पर नहीं लौटेंगे। वहां कस्तूरबा नंद, आनंद पांडे, संजय बिष्ट, पूरन प्रकाश आदि थे। इधर अल्मोड़ा में बृहस्पतिवार को भी कार्मिकों ने कार्य बहिष्कार कर बैठक की। उन्होंने कहा कि सरकार अन्य विभागों के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान लगातार कर रही है, लेकिन स्वजल विभाग के कार्मिक वेतन से वंचित चल रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष बीएस कन्याल, मनीष दुम्का, धर्मपाल कार्की, संजय ओझा, किशन नेगी, आनंद खोलिया, पंकज बनकोटी आदि ने भाग लिया। संवाद
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हड़ताल से प्रभावित कार्य
- अल्मोड़ा के 245 गांवों में 21 करोड़ लागत से चल रहे ठोस और तरल अवशिष्ट प्रबंधन के कार्य।
- 3.75 करोड़ से 253 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण।
- खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस के बेस लाइन का सर्वे कार्य शुरू नहीं।
- बागेश्वर जिले की 106 ग्राम पंचायतों में 7.42 करोड़ रुपये से ठोस अवशिष्ट प्रबंधक का काम
स्वजल कर्मचारियों की मांगें
- सात माह के वेतन और लंबित देयकों का 40 लाख का भुगतान करने।
- अगस्त 2019 से स्वजल विभाग में पदों की निरंतरता जारी रखने।
- जल जीवन मिशन के छीने गए कार्य को स्वजल को माध्यम से कराने।
क्या कहते हैं कर्मचारी
स्वजल कर्मचारियों को बीते सात महीने से वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है। इस कारण पूरे प्रदेश के स्वजल विभाग के कार्मिकों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। सरकार को जल्द वेतन भुगतान करना चाहिए। - बीएस कन्याल, अल्मोड़ा
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स्वजल की थीम पर केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना लागू की है। जिले में स्वजल ने 15 पेयजल योजनाओं की डीपीआर भी बना दी गई थी, लेकिन अब जल जीवन मिशन के कार्य स्वजल से हटा दिए गए हैं। - मनीष दुम्का, अल्मोड़ा
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स्वजल द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए गए कार्यों के बाद राज्य को कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं, लेकिन अब स्वजल विभाग की अनदेखी करना अनुचित है। सात माह के वेतन का जल्द भुगतान होना चाहिए। - धर्मपाल कार्की, अल्मोड़ा
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सरकार अन्य विभागों के कार्मिकों को नियमित वेतन भुगतान कर रही है, लेकिन कार्य करने के बावजूद स्वजल कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं करना अन्यायपूर्ण है। कर्मचारियों को अर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। - किशन नेगी, अल्मोड़ा
सात महीने से वेतन मिलने से गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मेरी बेटी बाहर पढ़ती है। उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए पत्नी के जेवर गिरवी रखने पड़े हैं। सरकार को हमारी इस तरह अनदेखी नहीं करनी चाहिए। - ध्यान चंद्र लोहनी, बागेश्वर
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7 महीने से वेतन न मिलने से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। उधारी से काम चलाया जा रहा है। लोग भी कब तक उधार देंगे। सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए। हमें जल्द वेतन का भुगतान किया जाए। - पूरन सिंह, बागेश्वर
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सात महीने से वेतन नहीं मिला है। इस कारण घर की आवश्यकताएं पूरी करना काफी मुश्किल हो गया है। घर का खर्च चलाने के लिए परिचितों से उधार लेना पड़ रहा है। कैसे परिवार का भरण पोषण होगा, यह सोचकर परेशान हैं। - नरेंद्र बम, बागेश्वर
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वेतन न मिलने से बुरे हाल हो गए हैं। परिवार चलाने के लिए लोगों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। हम किन मुश्किलों में परिवार चला रहे हैं, हम लोग ही जानते हैं। सरकार को स्वजल कर्मियों की दिक्कतों पर ध्यान देना चाहिए। - चंदन सिंह मलड़ा, बागेश्वर
कुछ ने पत्नी के जेवर रखे गिरवी, कुछ ‘भीख’ मांगने को मजबूर
आंदोलन कर रहे स्वजल कर्मियों का कहना है कि सात माह से वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए भी उन्हेें रिश्तेदारों और परिचितों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में एक कर्मचारी ने भरे गले से कहा कि बेटी की पढ़ाई के लिए उन्हें पत्नी के जेवर तक गिरवी रखने पड़ रहे हैं। परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। दुकानदारों की उधारी इतनी हो गई है कि अब उधार मांगने से भी झिझक लगने लगी है। कहा कि सात महीने तक वेतन न मिले तो क्या हालात पैदा हो गए होंगे, इसका अंदाजा सरकार स्वयं लगा सकती है।