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जंगली सूअर खेत खोदकर हजारों की गडेरी खा गए
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:06 PM IST
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मजबे गांव में सुअरों द्वारा खोदे गए गडेरी के खेत।
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली सूअर काश्तकारों के दुश्मन बन गए हैं। सुअरों ने मजबे सहित आसपास के दर्जनों गांवों में खेत खोदकर हजारों रुपये की गडेरी खा दी है। इस गांवों में सब्जी उत्पादन करने वाले किसान जंगली सूअरों के आतंक से परेशान हैं।
बागेश्वर के मजबे, डुंगरगांव, नैल आदि गांवों में सुअरों का आतंक बना हुआ है। झुंडों में आ रहे सूअर इन दिनों तैयार हो रही गडेरी को खा रहे हैं। मजबे गांव में सुअरों ने खेत खोदकर गडेरी तहस-नहस कर दी। काश्तकार महेश जोशी ने बताया कि काफी मेहनत से खेतों में गडेरी तैयार की थी। रात में सुअर आकर फसल चौपट कर गए। उन्होंने बताया कि सुअर मक्का, धान सहित अन्य फसलों को भी तहस-नहस कर रहे हैं।
इससे पूर्व सुअरों ने गणिया डोबा गांव में भी गडेरी सहित अन्य सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाया था। गांव गरीब मंच के संयोजक विशन सिंह टंगड़िया का कहना है कि प्रशासन व वन विभाग की ओर से काश्तकारों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं। गांवों में खेतीबाड़ी कर गुजर-बसर कर रहे गरीब लोगों की मेहनत पर जंगली जानवर पानी फेर रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से काश्तकारों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने और प्रभावित काश्तकारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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बागेश्वर के मजबे, डुंगरगांव, नैल आदि गांवों में सुअरों का आतंक बना हुआ है। झुंडों में आ रहे सूअर इन दिनों तैयार हो रही गडेरी को खा रहे हैं। मजबे गांव में सुअरों ने खेत खोदकर गडेरी तहस-नहस कर दी। काश्तकार महेश जोशी ने बताया कि काफी मेहनत से खेतों में गडेरी तैयार की थी। रात में सुअर आकर फसल चौपट कर गए। उन्होंने बताया कि सुअर मक्का, धान सहित अन्य फसलों को भी तहस-नहस कर रहे हैं।
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इससे पूर्व सुअरों ने गणिया डोबा गांव में भी गडेरी सहित अन्य सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाया था। गांव गरीब मंच के संयोजक विशन सिंह टंगड़िया का कहना है कि प्रशासन व वन विभाग की ओर से काश्तकारों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं। गांवों में खेतीबाड़ी कर गुजर-बसर कर रहे गरीब लोगों की मेहनत पर जंगली जानवर पानी फेर रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से काश्तकारों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने और प्रभावित काश्तकारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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