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Almora News: दहशत की दहाड़ पर काबू... सल्ट में बाघ को किया ट्रैंकुलाइज
Fri, 04 Sep 2026 01:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:00 AM IST
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। तड़म ग्रामसभा के भौनखाल क्षेत्र में एक बाघ को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू कर लिया गया है। वन विभाग की टीम ने बुधवार देर रात उसे सुरक्षित कब्जे में लेकर रेस्क्यू वाहन से रामनगर के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया। लगातार हमलों की घटनाओं के बाद बाघ के पकड़े जाने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
सल्ट विकासखंड के मोहान वन रेंज के डभरा-सौराल गांव के तोक घोड़ीधार में तीन अगस्त को 21 वर्षीय शालू की वन्यजीव के हमले में मौत के बाद से वन विभाग क्षेत्र में लगातार निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रहा था। ट्रैप कैमरे, ड्रोन, लाइव कैमरे, गश्ती दल और पिंजरों की मदद से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
इसी बीच मंगलवार रात तड़म ग्रामसभा के भौनखाल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी के आवास के बाहर एक बाघ ने गाय को निवाला बना लिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ गाय को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। सूचना मिलने पर बुधवार को रेंजर हेमा कर्नाटक के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को पकड़ने की रणनीति तैयार की।
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मरी गाय को बनाया रेस्क्यू का चारा
वन विभाग ने मरी हुई गाय को घटनास्थल से नहीं हटाया। टीम को आशंका थी कि अधूरा शिकार छोड़कर भागा बाघ रात में दोबारा गाय के पास लौट सकता है। इसी रणनीति के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों और वनकर्मियों ने चिकित्सा प्रभारी के आवास के भीतर से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की।
रात करीब 10 बजे बाघ मरी हुई गाय के पास पहुंचा। रेस्क्यू टीम इसी मौके का इंतजार कर रही थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ट्रैंकुलाइजिंग गन से बाघ को बेहोश कर दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित कब्जे में लेकर रेस्क्यू वाहन से ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया।
रेस्क्यू अभियान में नैनीताल वन प्रभाग के डॉ. हिमांशु पांगती, पश्चिमी वृत्त के डॉ. राहुल सती और मोहान रेंज के वनकर्मी शामिल रहे।
निगरानी और गश्त जारी रहेगी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञ टीम का रेस्क्यू अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में गश्त, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी के साथ पिंजरों की निगरानी तथा ग्रामीणों को जागरूक करने का अभियान जारी रहेगा।
बाघ की ओर से गाय को निवाला बनाए जाने की सूचना क्षेत्रीय पटवारी और वन क्षेत्राधिकारी को दी गई, जिसके बाद विशेषज्ञ टीम को रेस्क्यू के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना बड़ा बाघ पहली बार देखा है। रेस्क्यू की कार्रवाई से ग्रामीणों ने थोड़ी राहत जरूर ली है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। गांव के आसपास कई अन्य तोकों में भी बाघों की आवाजाही बनी हुई है जिससे ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। -दयाल सिंह, पूर्व प्रधान, तड़म
घोड़ीधार में शालिनी (शालू) की मौत को एक माह बीत चुका है। लेकिन वन विभाग अब तक बाघ को पकड़ने में सफल नहीं हुआ है। भौनखाल में रेस्क्यू किया गया बाघ घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर है, जबकि प्रभावित गांवों के आसपास रोजाना कई बाघों की मौजूदगी देखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में बाघ पकड़ने के लिए एक भी पिंजरा नहीं लगाया गया है, जबकि लगा पिंजरा तेंदुए के लिए है। उन्होंने वन विभाग से रेस्क्यू अभियान तेज करने और बाघ पकड़ने के लिए उचित पिंजरे लगाने की मांग की। -भरत बिष्ट, प्रधानपति एवं वार्ड सदस्य, डभरा-सौराल
भौनखाल क्षेत्र से एक बाघ का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर दिया गया है। अभी भी वन विभाग की टीम को अलर्ट में रखा गया है। वह क्षेत्र में लगातार गश्त कर लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे। -अभिमन्यू सिंह, डीएफओ, अल्मोड़ा वन प्रभाग
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सल्ट विकासखंड के मोहान वन रेंज के डभरा-सौराल गांव के तोक घोड़ीधार में तीन अगस्त को 21 वर्षीय शालू की वन्यजीव के हमले में मौत के बाद से वन विभाग क्षेत्र में लगातार निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रहा था। ट्रैप कैमरे, ड्रोन, लाइव कैमरे, गश्ती दल और पिंजरों की मदद से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
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इसी बीच मंगलवार रात तड़म ग्रामसभा के भौनखाल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी के आवास के बाहर एक बाघ ने गाय को निवाला बना लिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ गाय को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। सूचना मिलने पर बुधवार को रेंजर हेमा कर्नाटक के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को पकड़ने की रणनीति तैयार की।
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मरी गाय को बनाया रेस्क्यू का चारा
वन विभाग ने मरी हुई गाय को घटनास्थल से नहीं हटाया। टीम को आशंका थी कि अधूरा शिकार छोड़कर भागा बाघ रात में दोबारा गाय के पास लौट सकता है। इसी रणनीति के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों और वनकर्मियों ने चिकित्सा प्रभारी के आवास के भीतर से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की।
रात करीब 10 बजे बाघ मरी हुई गाय के पास पहुंचा। रेस्क्यू टीम इसी मौके का इंतजार कर रही थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ट्रैंकुलाइजिंग गन से बाघ को बेहोश कर दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित कब्जे में लेकर रेस्क्यू वाहन से ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया।
रेस्क्यू अभियान में नैनीताल वन प्रभाग के डॉ. हिमांशु पांगती, पश्चिमी वृत्त के डॉ. राहुल सती और मोहान रेंज के वनकर्मी शामिल रहे।
निगरानी और गश्त जारी रहेगी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञ टीम का रेस्क्यू अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में गश्त, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी के साथ पिंजरों की निगरानी तथा ग्रामीणों को जागरूक करने का अभियान जारी रहेगा।
बाघ की ओर से गाय को निवाला बनाए जाने की सूचना क्षेत्रीय पटवारी और वन क्षेत्राधिकारी को दी गई, जिसके बाद विशेषज्ञ टीम को रेस्क्यू के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना बड़ा बाघ पहली बार देखा है। रेस्क्यू की कार्रवाई से ग्रामीणों ने थोड़ी राहत जरूर ली है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। गांव के आसपास कई अन्य तोकों में भी बाघों की आवाजाही बनी हुई है जिससे ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। -दयाल सिंह, पूर्व प्रधान, तड़म
घोड़ीधार में शालिनी (शालू) की मौत को एक माह बीत चुका है। लेकिन वन विभाग अब तक बाघ को पकड़ने में सफल नहीं हुआ है। भौनखाल में रेस्क्यू किया गया बाघ घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर है, जबकि प्रभावित गांवों के आसपास रोजाना कई बाघों की मौजूदगी देखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में बाघ पकड़ने के लिए एक भी पिंजरा नहीं लगाया गया है, जबकि लगा पिंजरा तेंदुए के लिए है। उन्होंने वन विभाग से रेस्क्यू अभियान तेज करने और बाघ पकड़ने के लिए उचित पिंजरे लगाने की मांग की। -भरत बिष्ट, प्रधानपति एवं वार्ड सदस्य, डभरा-सौराल
भौनखाल क्षेत्र से एक बाघ का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर दिया गया है। अभी भी वन विभाग की टीम को अलर्ट में रखा गया है। वह क्षेत्र में लगातार गश्त कर लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे। -अभिमन्यू सिंह, डीएफओ, अल्मोड़ा वन प्रभाग