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Almora News: श्रीपूर्णा के लिए फ्रांस से आई बारात, कुमाऊंनी रंग में रंगा और्हेल्यैं का प्यार

Fri, 13 Feb 2026 12:17 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Fri, 13 Feb 2026 12:17 PM IST
सार

अल्मोड़ा के कसारदेवी मंदिर में फ्रांस के दूल्हे और अल्मोड़ा की श्रीपूर्णा कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंध गए।

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The wedding procession arrived from France, and the love of the Aurelians was painted in Kumaoni colours
दुल्हन श्रीपूर्णा को अंगूठी पहनाता दूल्हा और्हेल्यैं गैरंपों। - फोटो : स्रोत स्वयं

विस्तार

अल्मोड़ा के कसारदेवी की वादियों में गुरुवार को एक अनोखा संगम देखने को मिला। फ्रांस के और्हेल्यैं गैरंपों और अल्मोड़ा की श्रीपूर्णा कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंध गए। विदेशी बारात जब ढोल-दमाऊ और छोलिया नृत्य दल के साथ रिजॉर्ट तक पहुंची तो पूरा माहौल लोक-संस्कृति के रंग में सराबोर हो गया।

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श्रीपूर्णा, नगर के चीनाखान निवासी और ओएनजीसी से सेवानिवृत्त डीजीएम ध्रुव रंजन जोशी व प्रतिभा जोशी की पुत्री हैं। उन्होंने दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और भारतीय विद्या भवन से टेलीविजन एवं फिल्म प्रोडक्शन में परास्नातक किया। ग्राफिक डिजाइन में डिप्लोमा के बाद वर्ष 2020 में फ्रांस की टू लूज यूनिवर्सिटी से मार्केट मैनेजिंग एंड कम्युनिकेशन में एमएससी की डिग्री हासिल की। वर्ष 2021 से वह फ्रांस की एक कंपनी में डेटा एनालिस्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले पांच वर्षों से फ्रांस में रह रहीं श्रीपूर्णा अब और्हेल्यैं की जीवनसंगिनी बन गई हैं।

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सनातन परंपरा में सजा विवाह

विवाह से पहले हल्दी, मेहंदी और गणेश पूजा जैसे सभी पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न हुए। गणेश पूजा के बाद बारात निकली, जिसमें फ्रांस से आए दो दर्जन से अधिक मेहमान शामिल थे। कुमाऊंनी विधि-विधान से मंत्रोच्चार के बीच धूलि अर्घ्य, कन्यादान, जयमाल और सात फेरों की रस्में निभाई गईं। फेरे पूरे होते ही दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया और मेहमानों ने पुष्पवर्षा कर नवदम्पति को आशीर्वाद दिया।

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कुमाऊंनी वेशभूषा में सजे बाराती

विदेशी मेहमान पूरी तरह भारतीय रंग में रंगे नजर आए। महिलाओं ने रंगवाली पिछौड़ा, साड़ी और घाघरा-चोली धारण की जबकि पुरुष कुर्ता-पायजामा और शेरवानी में दिखे। कई मेहमानों ने कुमाऊंनी टोपी पहनकर स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान भी जताया। बारात में शामिल विदेशी मेहमानों ने कुमाऊंनी गीतों पर जमकर नृत्य किया। छोलिया नृत्य दल की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। ढोल-दमाऊ की गूंज के साथ पारंपरिक नृत्य और उत्साह ने समारोह को यादगार बना दिया।

डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए यूरोप छोड़ अल्मोड़ा को चुना

दूल्हे और्हेल्यैं ने बताया कि डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए यूरोप में विवाह स्थलों की कमी नहीं है, लेकिन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और उत्तराखंड की आध्यात्मिक शांति ने उन्हें अल्मोड़ा में विवाह करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार यह समारोह केवल पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव भी है। वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं। कसारदेवी की पहाड़ियों के बीच यह अंतरराष्ट्रीय विवाह कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक मेल-जोल का सुंदर उदाहरण बन गया।

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