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सिस्टम का स्टेयरिंग फेल : हादसों से सबक लिया होता तो बच सकती थीं सात जानें

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 11:27 PM IST
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The system's steering failed: Seven lives could have been saved if lessons had been learnt from the accidents.
अल्मोड़ा। भिकियासैंण में मंगलवार सुबह हुआ भीषण बस हादसा उस सिस्टम की विफलता की कहानी है जो बड़े हादसों के बाद भी सबक नहीं लेता। दुर्घटना में जीवित बचे यात्रियों के अनुसार बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया जिसके बाद वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। यदि समय रहते वाहनों की फिटनेस, सड़कों की हालत और सुरक्षा मानकों पर गंभीरता दिखाई गई होती तो इस हादसे में गईं सात जानें शायद बचाई जा सकती थीं।
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प्रदेश में खस्ताहाल बसें, पहाड़ी सड़कों पर मौजूद डेंजर प्वाइंट और कमजोर निगरानी व्यवस्था हर साल सैकड़ों लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। वर्ष 2025 में अब तक सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या लगभग 950 तक पहुंच चुकी है जबकि सड़क हादसों के मामले 1600 के पार हो गए हैं। यह आंकड़े बीते साल की तुलना में कहीं अधिक हैं।
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उत्तराखंड पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में प्रदेश में 1311 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं जो 2025 में बढ़कर 1369 हो गईं। हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या भी 2024 में 770 से बढ़कर 2025 में 917 तक पहुंच गई है। वहीं घायलों की संख्या में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है जो 1145 से बढ़कर करीब 1600 हो चुकी है। पुलिस और यातायात विभाग की ओर से चलाए जा रहे चेकिंग अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद हादसों का ग्राफ नीचे नहीं आ रहा है।
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वाहनों की फिटनेस की अनदेखी बड़ा कारण
विशेषज्ञों और विभागीय रिपोर्टों के अनुसार वाहनों की फिटनेस की अनदेखी सड़क हादसों का बड़ा कारण बनी हुई है। इसके साथ ही यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी, ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना और गलत तरीके से ड्राइविंग करना दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। इन लापरवाहियों की कीमत अक्सर निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

सुप्रीम सख्ती भी बेअसर
भिकियासैंण बस हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा आम लोग अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे। बढ़ते सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त रुख अपना चुका है और संबंधित विभागों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दे चुका है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव ने भी ओवरस्पीड और रेड लाइट जंप करने वाले वाहन चालकों के लाइसेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदल पा रहे हैं।

इन जिलों में हालात चिंताजनक...
अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़, पौड़ी और रुद्रप्रयाग में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है। वहीं पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, टिहरी और देहरादून में हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, चमोली, टिहरी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में घायलों की संख्या भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दर्ज की गई है।


हल्द्वानी। भिकियासैंण में मंगलवार सुबह हुई भीषण बस दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। बस हादसे में जीवित बचे यात्रियों के बयानों के अनुसार स्टेयरिंग खराब हो जाने के कारण बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। खस्ताहाल बसें, सड़कों के डेंजर प्वाइंट समेत तमाम कारणों से प्रदेश में हर वर्ष सैकड़ों लोग अपनी जान गवां रहे हैं।
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दुर्घटनाओं में घायल और मृतकों की संख्या (जनपदवार)
जनपद
दुर्घटनाएं 2024
दुर्घटनाएं 2025
मृतक 2024
मृतक 2025
घायल 2024
घायल 2025
अल्मोड़ा 17
23
8
13
12
29
पिथौरागढ़
18
29
3
32
30
52
चंपावत
19
17
13
12
19
22
बागेश्वर 4
12
4
12
3
10
नैनीताल
118
207
94
120
84
287
यूएस नगर
295
305
189
216
203
244
उत्तरकाशी
13
16
15
12
38
65
टिहरी
44
45
31
42
59
104
चमोली
14
35
9
29
22
50
रुद्रप्रयाग
9
27
21
33
29
40
पौड़ी 22
31
21
22
44
69
देहरादून
397
326
145
172
344
327
हरिद्वार
341
296
217
202
278
303
(सरकारी आंकड़े 15 दिसंबर तक के हैं। इसके बाद हादसों में हताहतों का आंकड़ा बड़ा है।)
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