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उक्रांद के बेबीनार में पलायन रोकने को ठोस नीति बनाने पर जोर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2020 04:39 PM IST
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'Talk of employing migrants is not full fill'
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। 20 साल कई सवाल वेबीनार कार्यक्रम में उक्रांद और माले नेताओं ने कोविड-19 के बाद प्रदेश की बदलती राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि प्रवासियों को रोजगार देने की तमाम बातें हो रहीं हैं, जो सिर्फ अभी तक हवा हवाई हैं।
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कोरोना के बाद संकट बढ़ा है। सरकार को ठोस और जमीनी योजना पर कार्य करने की जरूरत है। चर्चा में दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने माले नेता इंद्रेश मैखुरी, वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी, शिवानंद चमोली, उक्रांद नेता डॉ.नारायण सिंह जंतवाल और पुष्पेश त्रिपाठी से उत्तराखंड के वर्तमान हालातों पर चर्चा की। कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार को यहां कृषि, पर्यटन आधारित उद्योगों पर कार्य करने जरूरत है। माले के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि सरकारें चाहे कितनी भी बात कर ले कोविड-19 के बाद संकट और बढ़ा है। पलायन के पीछे सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।
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पत्रकार हृदयेश जोशी ने भारत के अन्य क्षेत्रों की समस्याओं को उत्तराखंड से जोड़ते हुए कहा कि जिस ढंग से आदिवासी क्षेत्रों में या झारखंड,उड़ीसा, छत्तीसगढ़, बिहार आदि के नीति नियंता वहां के प्राकृतिक संसाधनों को बड़ी पूंजीपतियों के हवाले कर विकास का ढिंढोरा पीटते हैं। उसी तरह सरकार उत्तराखंड में भी यहां के जल,जंगल, जमीन को लगातार बड़े लोगों के हवाले कर रही है, इसके लिए क्षेत्रीय ताकतों को एक होना होगा।
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पुष्पेश त्रिपाठी ने मौजूदा हालातों में रिखाड़ीखाल की 23 वर्षीय महिला की प्रसव पीड़ा से मौत का मामला उठाते हुए कहा कि,जो सरकारें प्रकृति प्रदत्त प्रसव से किसी महिला की रक्षा नहीं कर पाती वह बाहर से आए प्रवासियों और बेरोजगारों के लिए कैसे नीतियां बना रहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 95 ब्लॉकों में राज्य बनने से पूर्व बेहतर सेवाएं थीं। लेकिन इन्हें ठीक ठाक करने के बजाय सरकार इन्हें पीपीपी मोड में दे रही हैं। डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि यहां की सरकारें नारों से चलती हैं। सरकार के पास कोई रोड मैप नहीं है जिसे वह लागू कर सके। शिवानंद चमोली ने बेबाकी से कहा कि जो काम सरकारों को करना चाहिए था वह यहां के युवाओं ने अलग-अलग टुकड़ों में किया है।
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