Almora News: रोडवेज बस का स्टेयरिंग फेल, बाल-बाल बची लोगों की जिंदगी, छह महीने में हो चुके सात हादसे
बस में 18 यात्री सवार थे। अल्मोड़ा से रवाना होने के एक घंटे बाद आरतोला और पनुवानौला के बीच हाईवे पर अचानक बस का स्टेयरिंग फेल हो गया और बस अनियंत्रित होने लगी। ऐसे में यात्रियों की सांस अटक गई और वह चीखने-चिल्लाने लगे।
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पर्वतीय क्षेत्रों की खतरनाक सड़कों पर रोडवेज बस आए दिन यात्रियों को धोखा दे रही हैं। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर रोडवेज बस का स्टेयरिंग फेल हो गया और चालक ने किसी तरह से बस को नियंत्रित कर लोहे के डिवाइडर से टकरा दी जिससे खाई में गिरने से बच गई।
स्टेयरिंग फेल होने के बाद बस के असंतुलित होने से उसमें सवार 18 यात्रियों समेत चालक और परिचालक की जान बाल-बाल बची। बाद में दूसरी बस से यात्रियों को गंतव्य के लिए भेज दिया। शुक्रवार सुबह पिथौरागढ़ डिपो की बस दिल्ली से लौट रही थी।
बड़ा हादसा टला
बस में 18 यात्री सवार थे। अल्मोड़ा से रवाना होने के एक घंटे बाद आरतोला और पनुवानौला के बीच हाईवे पर अचानक बस का स्टेयरिंग फेल हो गया और वह अनियंत्रित होने लगी। ऐसे में यात्रियों की सांस अटक गई और वह चीखने-चिल्लाने लगे।
चालक ने किसी तरह से अनियंत्रित बस को सड़क के नीचे की ओर लगे डिवाइडर से टकराकर रोका। बस रुकते ही सभी डरे सहमे यात्री बस से उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस डिवाइडर से नहीं रुकती तो बड़ा हादसा हो सकता था। बताया कि घटनास्थल के पास 300 मीटर गहरी खाई है। इसके बाद बस के यात्री दूसरी बस का इंतजार करते रहे। करीब एक घंटे बाद पिथौरागढ़ डिपो की बस मौके पर पहुंची और यात्रियों को उसमें भेजा गया। दो घंटे बाद अल्मोड़ा डिपो से मैकेनिक भेजकर खराबी दूर करने के बाद बस को पिथौरागढ़ भेजा गया।
पनुवानौला और आरतोला के बीच बदहाल है हाईवे
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर पनुवानौला और आरतोला के बीच सड़क बदहाल है। इस दायरे में सड़क गड्ढों से पटी है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। हाईवे के ठीक ऊपर कोटली गांव को जोड़ने के लिए सड़क काटी गई है। बारिश में इस सड़क का मलबा हाईवे में पहुंचने से कलमठ और नाली बंद हो गई हैं, इससे सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
छह महीने में सात बस ने दिया धोखा
इस वर्ष अब तक सात महीनों में जिले में सात बस ने लोगों को धोखा दिया है। इनमें से एक बस का स्टेयरिंग तो एक का ब्रेक फेल हो गया। चालकों ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को पहाड़ी पर टकराते हुए रोका, तब जाकर यात्री सुरक्षित बच सके। वहीं पांच बसों में तकनीकी खराबी के चलते यात्रियों को टैक्सी और केमू बस से गंतव्य को रवाना होना पड़ा।
उम्र पार करने के कगार पर हैं अधिकतर बस
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत पर्वतीय जनपदों में संचालित करने के लिए वर्ष 2015 में अधिकतर बस की खरीद हुई। इनमें से अधिकतर बस उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं और पुरानी हो चुकी हैं। अल्मोड़ा जिले में संचालित 30 में से 22 बस इस साल के अंत में अपनी उम्र पार कर लेंगी और पर्वतीय सड़कों पर चलन से बाहर हो जाएंगीं। अन्य जिलों के भी यही हाल हैं। ऐसे में पुरानी हो चुकीं बस आए दिन यात्रियों को धोखा दे रही हैं। नियमों के मुताबिक खरीद के सात साल या सात लाख किमी दौड़ने वाली बस को पर्वतीय सड़कों पर संचालित नहीं किया जा सकता है।
अल्मोड़ा डिपो के एआरएम राजेंद्र कुमार का कहना है कि स्टेयरिंग फेल होने से बस डिवाइडर से टकराई। मैकेनिक भेजकर बस ठीक की गई। यात्रियों को दूसरी बस से गंतव्य को भेजा गया।