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Almora News: वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद प्रहलाद सिंह बिष्ट नहीं रहे

Thu, 16 Oct 2025 12:40 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Thu, 16 Oct 2025 12:40 AM IST
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Senior litterateur and educationist Prahlad Singh Bisht is no more.
वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद प्रहलाद सिंह बिष्ट।
अल्मोड़ा। वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद प्रहलाद सिंह बिष्ट का निधन हो गया है। वह 90 साल के थे। साहित्यकारों और विभिन्न संगठनों ने उनके निधन पर शोक जताया है।
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जिले के धौलादेवी विकासखंड के डुंगरा गांव निवासी प्रहलाद सिंह बिष्ट का स्वास्थ्य बीते कुछ दिनों से खराब चल रहा था। उन्होंने डुंगरा स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली। वह जीआईसी पालीगुणादित्य से 1997 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत हुए थे। उनके बड़े पुत्र त्रिभुवन बिष्ट पीएमजीएसवाई चंपावत खंड के अधिशासी अभियंता हैं जबकि छोटे पुत्र हिमांशु बिष्ट जीआईसी भनोली में प्रभारी प्रधानाचार्य है। विधायक मोहन सिंह मेहरा ने प्रहलाद के निधन को साहित्य और शिक्षा जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति करार दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य और शिक्षा जगत में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन पर जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, क्षेत्र पंचायत सदस्या चित्रलेखा सिंगवाल, मोहन सिंह सिंगवाल, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य महेंद्र बिष्ट, दलीप सिंह सिंगवाल, शंकर बिष्ट ने शोक जताया है।
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मैदसौन की शौर्यगाथा पुस्तक प्रकाशित करने की ख्वाहिश रह गई अधूरी
अल्मोड़ा। छात्र जीवन में कॉलेज की पत्रिका के संपादक रहे वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद प्रहलाद सिंह बिष्ट ने छात्र-छात्राओं में साहित्य की अलख जगाई थी। हाल में ही उन्होंने मैदसौन की शौर्यगाथा पुस्तक लिखने का काम पूरा किया। इस पुस्तक को प्रकाशित करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन इससे पहले ही वह दुनिया छोड़कर चले गए। उनका जीते जी पुस्तक प्रकाशित करने का सपना अधूरा रह गया।
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प्रहलाद सिंह बिष्ट ने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी विषय से एमए और आगरा विश्वविद्यालय से बीएड किया था। एक साहित्यकार के साथ ही वह शिक्षाविद भी थे। वर्ष 1962 से 1997 तक विभिन्न इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता और प्रधानाचार्य रहे। इसके अलावा प्रतिनियुक्ति पर परियोजना अधिकारी और जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी भी रहे। बचपन से ही उनकी साहित्य में गहरी रूचि थी। कई पत्र-पत्रिकाओं ने उनकी कहानियां और लेख प्रकाशित हुए। राजकीय इंटर कॉलेज लोहाघाट की पत्रिका वाणी विचारक और ज्योत्सना के प्रधान संपादक भी रहे। इस पत्रिका के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों में साहित्य की अलख जगाई थी।

वर्ष 1965-66 में एसएसजे परिसर की पत्रिका आस्था का प्रधान संपादक रहे। कत्यूरी मानसरोवर पत्रिका के संयुक्त संपादक रहे। वर्ष 2010 में लखीमपुर (खीरी) उत्तर प्रदेश में हुए साहित्य सम्मेलन में उन्हें राष्ट्र कवि वंशीधर शुक्ल स्मृति सम्मान से नवाजा गया था। परिजनों ने उनकी पुस्तक को प्रकाशित करने का निर्णय लिया है।

सड़क से सदन तक शिक्षकों के अधिकारों के लिए लड़े
अल्मोड़ा। शिक्षक नेता रहे प्रहलाद सिंह बिष्ट ने शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष किया। उनके छोटे पुत्र जीआईसी भनोली के प्रभारी प्रधानाचार्य हिमांशु बिष्ट ने बताया कि प्रहलाद सिंह बिष्ट राजकीय शिक्षक संघ कुमाऊं मंडल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष रहे। संवाद


एनसीसी के कैप्टन भी रहे बिष्ट

अल्मोड़ा। प्रहलाद सिंह बिष्ट लंबे समय तक एनसीसी के कैप्टन भी रहे। एनसीसी सीनियर वर्ग कैप्टन के अभिनवी प्रशिक्षण में सर्वोत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण के लिए उन्हें जनरल मैथ्यू थामस महानिदेशक ने 20 फरवरी 1980 को प्रशस्त्रि प्रत्र देकर सम्मानित किया था।
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