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सुनौली गांव पहुंची गांव बचाओ यात्रा
अमर उजाला अल्मोड़ा
Updated Thu, 20 Oct 2016 11:01 PM IST
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छात्रों को संबोधित करते डा. जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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पद्म श्री डा. अनिल जोशी के नेतृत्व में निकली गांव बचाओ यात्रा बागेश्वर से पौड़ीधार, कठपुड़ियाछीना और ताकुला होकर अल्मोड़ा जिले के सुनौली गांव पहुंची। सुनौली में हुई सभा में डा. अनिल जोशी ने कहा कि आज हमारे सामने अपने भविष्य को सुधारने की चुनौती है। हमारे जनप्रतिनिधि आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि गांवों के विकास का ढांचा कैसा हो। नेतागण गांव से दूर हो गए हैं। हालत यह है कि चुनाव जीतने के बाद खुद जनप्रतिनिधि अपने गांव ही छोड़ देते हैं।
डा. जोशी ने कहा कि गांव के विकास की ठोस और व्यवहारिक योजनाएं नहीं बनी तो आने वाली पीढ़ी हमें कोसेगी। उन्होंने राज्य में चल रही शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि हमारी शिक्षा संसाधनों पर आधारित होनी चाहिए। हमें ऐसे चरित्र पढ़ाए जाने चाहिए जो बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की प्रेरणा दे सकें। उन्होंने कहा कि सुनौली में विद्यालय के बच्चों ने यह बता दिया कि उन्हें कैसी शिक्षा की जरूरत है और गांवों का विकास किस तरह होना चाहिए। जबकि यह बात हमारे नेतागणों को समझने की जरूरत है।
अध्यक्षता करते हुए देव सिंह पिलख्वाल ने कहा कि सरकार को गांवों से पलायन रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। संचालन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर जोशी ने कहा कि सुनौली क्षेत्र बिनसर अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है। यहां जंगली जानवर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। हालत यह है कि खाने के लिए सब्जियां नहीं मिल पा रही है। इस मौके पर चंद्र सिंह बिष्ट, राजेंद्र प्रसाद टम्टा समेत कई लोगों ने विचार रखे। इससे पहले सुनौली पहुंचने पर गांव बचाओ यात्रा में पहुंचे डा. जोशी और अन्य लोगों का ग्रामीणों और जीआईसी के छात्रों ने स्वागत किया।
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जीआईसी सुनौली में हुई विचार गोष्ठी में विद्यालय के छात्रों ने खुलकर विचार रखे और गांव की समस्याएं बताई। बच्चों ने बताया कि नेताओं ने गांव-गांव में स्कूल तो खोल दिए हैं, लेकिन स्कूलों की हालत बहुत खराब है।
उन्होंने कहा कि जहां बच्चे हैं वहां शिक्षक नहीं है जहां शिक्षक हैं वहां बच्चे नहीं है। व्यवसायिक शिक्षा के अभाव में पलायन हो रहा है। गांव-गांव में शराब पहुंच गई है। हालत यह है कि ग्रामीण इलाकों में शराब बनाई भी जा रही है। युवा, बूढ़े शराब का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शराब बंदी सख्ती से लागू होनी चाहिए। जंगली जानवर खेतों को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर गांव में पानी, बिजली, स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है। बच्चों की बात सुनकर पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा कि हमारा उत्तराखंड कैसा हो इस बारे में गांव-गांव में चर्चा होनी जरुरी है।
डा. जोशी ने कहा कि गांव के विकास की ठोस और व्यवहारिक योजनाएं नहीं बनी तो आने वाली पीढ़ी हमें कोसेगी। उन्होंने राज्य में चल रही शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि हमारी शिक्षा संसाधनों पर आधारित होनी चाहिए। हमें ऐसे चरित्र पढ़ाए जाने चाहिए जो बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की प्रेरणा दे सकें। उन्होंने कहा कि सुनौली में विद्यालय के बच्चों ने यह बता दिया कि उन्हें कैसी शिक्षा की जरूरत है और गांवों का विकास किस तरह होना चाहिए। जबकि यह बात हमारे नेतागणों को समझने की जरूरत है।
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अध्यक्षता करते हुए देव सिंह पिलख्वाल ने कहा कि सरकार को गांवों से पलायन रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। संचालन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर जोशी ने कहा कि सुनौली क्षेत्र बिनसर अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है। यहां जंगली जानवर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। हालत यह है कि खाने के लिए सब्जियां नहीं मिल पा रही है। इस मौके पर चंद्र सिंह बिष्ट, राजेंद्र प्रसाद टम्टा समेत कई लोगों ने विचार रखे। इससे पहले सुनौली पहुंचने पर गांव बचाओ यात्रा में पहुंचे डा. जोशी और अन्य लोगों का ग्रामीणों और जीआईसी के छात्रों ने स्वागत किया।
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जीआईसी सुनौली में हुई विचार गोष्ठी में विद्यालय के छात्रों ने खुलकर विचार रखे और गांव की समस्याएं बताई। बच्चों ने बताया कि नेताओं ने गांव-गांव में स्कूल तो खोल दिए हैं, लेकिन स्कूलों की हालत बहुत खराब है।
उन्होंने कहा कि जहां बच्चे हैं वहां शिक्षक नहीं है जहां शिक्षक हैं वहां बच्चे नहीं है। व्यवसायिक शिक्षा के अभाव में पलायन हो रहा है। गांव-गांव में शराब पहुंच गई है। हालत यह है कि ग्रामीण इलाकों में शराब बनाई भी जा रही है। युवा, बूढ़े शराब का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शराब बंदी सख्ती से लागू होनी चाहिए। जंगली जानवर खेतों को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर गांव में पानी, बिजली, स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है। बच्चों की बात सुनकर पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा कि हमारा उत्तराखंड कैसा हो इस बारे में गांव-गांव में चर्चा होनी जरुरी है।