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पहली बरसात भी नहीं झेल पाई सड़क की सुरक्षा दीवार
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ऐना-जाख मोटर मार्ग पर इस तरह से ध्वस्त हुई है सड़क की सुरक्षा दीवार। अमर उजाला
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तहसील के सुदूरवर्ती ऐना-जाख-भिटारकोट सड़क की सुरक्षा दीवार नैड़ी के समीप मल्याल नदी में समा गई। बताया जा रहा है कि 20 दिन पहले ही सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य हुआ और एक बरसात भी नहीं झेल पाई। ग्रामीणों ने कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग उठाई है।
ऐना-जाख मोटर मार्ग का इन दिनों सुधारीकरण कार्य चल रहा है। यह कार्य एनपीसीसी करा रही है। आठ किमी लंबी इस सड़क में मल्याल नदी के ऊपर 34 मीटर लंबा पुल बन रहा है। साथ ही में सोलिंग और सुरक्षा दीवार बनाने का कार्य भी चल रहा है। ग्रामीणों ने कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। भिटारकोट निवासी सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सिंह नेगी, सुरेंद्र कुमार, इंद्र लाल आदि का कहना है कि मल्यालनदी के कटाव से सड़क को बचाने के लिए 20 दिन पहले ही दीवार बनाई गई थी लेकिन एक ही बाढ़ में दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि तकरीबन दीवार का 20 मीटर से लंबा हिस्सा नदी में समा गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई गई है। कहा कि जनता के धन का दुरुपयोग कतई सहन नहीं किया जाएगा। यदि जांच नहीं हुई तो आंदोलन होगा।
-मामला संज्ञान में है। दरअसल मल्यालनदी में बाढ़ आई थी, बाढ़ में बड़े पेड़ और बोल्डर बहकर आ गए, जिस कारण सुरक्षा दीवार को खतरा हो गया। वहां निरीक्षण कर फिर से दीवार का निर्माण कराया जाएगा। कार्य की गुणवत्ता खराब होने का मतलब ही नहीं है। -आदित्य कुमार मंडल, ईई, एनपीसीसी।
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ऐना-जाख मोटर मार्ग का इन दिनों सुधारीकरण कार्य चल रहा है। यह कार्य एनपीसीसी करा रही है। आठ किमी लंबी इस सड़क में मल्याल नदी के ऊपर 34 मीटर लंबा पुल बन रहा है। साथ ही में सोलिंग और सुरक्षा दीवार बनाने का कार्य भी चल रहा है। ग्रामीणों ने कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। भिटारकोट निवासी सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सिंह नेगी, सुरेंद्र कुमार, इंद्र लाल आदि का कहना है कि मल्यालनदी के कटाव से सड़क को बचाने के लिए 20 दिन पहले ही दीवार बनाई गई थी लेकिन एक ही बाढ़ में दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि तकरीबन दीवार का 20 मीटर से लंबा हिस्सा नदी में समा गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई गई है। कहा कि जनता के धन का दुरुपयोग कतई सहन नहीं किया जाएगा। यदि जांच नहीं हुई तो आंदोलन होगा।
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-मामला संज्ञान में है। दरअसल मल्यालनदी में बाढ़ आई थी, बाढ़ में बड़े पेड़ और बोल्डर बहकर आ गए, जिस कारण सुरक्षा दीवार को खतरा हो गया। वहां निरीक्षण कर फिर से दीवार का निर्माण कराया जाएगा। कार्य की गुणवत्ता खराब होने का मतलब ही नहीं है। -आदित्य कुमार मंडल, ईई, एनपीसीसी।
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