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कारण कवन नाथ नहीं आए जानि कुटिल प्रभु मोहि बिसराए.
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अल्मोड़ा के पनुवानौला की रामलीला में लक्ष्मण सूर्पनखा का मंचन।लक्ष्मण का किरदार कमल जोशी और सू?
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा/सोमेश्वर। श्री राम सांस्कृतिक, सामाजिक सेवा समिति की ओर से शिखर तिराहे पर स्थित पालिका पार्किंग की छत में आयोजित महिला रामलीला में मेघनाद-लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, संजीवनी बूटी लाने, कुंभकरण वध, मेघनाद वध, अहिरावण वध, रावण वध आदि प्रसंग मंचित हुए।
रामलीला कमेटी की ओर से बाड़ेछीना में आयोजित रामलीला में रावण वध, भरत मिलाप, श्री राम राज्याभिषेक हुआ। श्री राम के वनवास की अवधि पूरी होने के बाद भी वह अयोध्या नहीं पहुंचे तो भरत बोले कारण कवन नाथ नहीं आए जानि कुटिल प्रभु मोहि बिसराए...। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक पवन बिष्ट मुख्य अतिथि, गोपाल मटियानी विशिष्ट अतिथि थे। रामलीला का निर्देशन हेम तिवारी ने किया। धीरज और खिलानंद भट्ट ने संचालन किया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कमल बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह गैड़ा, बसंत तिलारा, हिमांशु वर्मा, पंकज पैनवाल, गोविंद बिष्ट, चंचल तिलारा, गोविंद सुप्याल आदि थे।
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सोमनाथ महावीर रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मैदान सोमेश्वर में आयोजित रामलीला में अंतिम दिन अहिरावण वध, राम-रावण युद्ध, रावण वध, विभीषण का राज्याभिषेक, सीता की अग्नि परीक्षा, राम-भरत मिलाप, श्री राम राज्याभिषेक आदि प्रसंगों का मंचन किया गया। वहां यज्ञ और भंडारा भी हुआ। विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी ने शुभारंभ किया। उन्होंने रामलीला मैदान में विधायक निधि से भोजन कक्ष बनाने की घोषणा की।
अध्यक्ष भूपाल सिंह ने सभी सहयोगियों का आभार जताया। इस दौरान सत्यपाल सिंह बोरा, शिवेंद्र बोरा, हरीश जोशी, गिरीश बोरा, गणेश बोरा, त्रिभुवन बोरा, सुरेश बोरा, अनिल गोस्वामी, नंदन बोरा, हरीश भारती आदि थे।
पनुवानौला में रामलीला के पांचवे दिन निषादराज-राम मिलन, सुमंत की व्यथा, दशरथ मरण, भरत-कैकेयी संवाद, शत्रुघ्न-मंथरा संवाद, पिता की मृत्यु की सूचना पर राम विलाप, भरत को राम की चरण पादुका देने आदि प्रसंग मंचित किए गए। राम सूरज बिष्ट, लक्ष्मण कमल जोशी, भरत प्रियांशु भट्ट, शत्रुघ्न कृष्णा राणा, सीता सुमित सुयाल, निषादराज कुंदन सिंह गैड़ा, सुमंत विनोद वर्मा बने।
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रामलीला कमेटी की ओर से बाड़ेछीना में आयोजित रामलीला में रावण वध, भरत मिलाप, श्री राम राज्याभिषेक हुआ। श्री राम के वनवास की अवधि पूरी होने के बाद भी वह अयोध्या नहीं पहुंचे तो भरत बोले कारण कवन नाथ नहीं आए जानि कुटिल प्रभु मोहि बिसराए...। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
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जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक पवन बिष्ट मुख्य अतिथि, गोपाल मटियानी विशिष्ट अतिथि थे। रामलीला का निर्देशन हेम तिवारी ने किया। धीरज और खिलानंद भट्ट ने संचालन किया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कमल बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह गैड़ा, बसंत तिलारा, हिमांशु वर्मा, पंकज पैनवाल, गोविंद बिष्ट, चंचल तिलारा, गोविंद सुप्याल आदि थे।
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सोमनाथ महावीर रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मैदान सोमेश्वर में आयोजित रामलीला में अंतिम दिन अहिरावण वध, राम-रावण युद्ध, रावण वध, विभीषण का राज्याभिषेक, सीता की अग्नि परीक्षा, राम-भरत मिलाप, श्री राम राज्याभिषेक आदि प्रसंगों का मंचन किया गया। वहां यज्ञ और भंडारा भी हुआ। विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी ने शुभारंभ किया। उन्होंने रामलीला मैदान में विधायक निधि से भोजन कक्ष बनाने की घोषणा की।
अध्यक्ष भूपाल सिंह ने सभी सहयोगियों का आभार जताया। इस दौरान सत्यपाल सिंह बोरा, शिवेंद्र बोरा, हरीश जोशी, गिरीश बोरा, गणेश बोरा, त्रिभुवन बोरा, सुरेश बोरा, अनिल गोस्वामी, नंदन बोरा, हरीश भारती आदि थे।
पनुवानौला में रामलीला के पांचवे दिन निषादराज-राम मिलन, सुमंत की व्यथा, दशरथ मरण, भरत-कैकेयी संवाद, शत्रुघ्न-मंथरा संवाद, पिता की मृत्यु की सूचना पर राम विलाप, भरत को राम की चरण पादुका देने आदि प्रसंग मंचित किए गए। राम सूरज बिष्ट, लक्ष्मण कमल जोशी, भरत प्रियांशु भट्ट, शत्रुघ्न कृष्णा राणा, सीता सुमित सुयाल, निषादराज कुंदन सिंह गैड़ा, सुमंत विनोद वर्मा बने।