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पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीण आज भी सरकारी बस सेवा रोडवेज के सफर से वंचित
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अल्मोड़ा। जिले के दुर्गम पर्वतीय इलाकों के हजारों ग्रामीण आज भी सरकारी ‘सवारी’ रोडवेज का सफर करने से वंचित हैं। कई सालों से पर्वतीय रूटों पर रोडवेज की बसों का संचालन बंद है। लोड फैक्टर कम होने की वजह से यह बसें बंद हुई है। पर्वतीय रूटों पर केमू और टैक्सी ही यात्रियों का सफर का सहारा है।
प्रदेश के पर्वतीय और दूरस्थ मार्गों पर रोडवेज की बसों का संचालन बेहद कम है। इन जगह यात्रियों के लिए केमू की बसें और टैक्सियां ही जीवनरेखा मानी जाती है। रोडवेज से मिली जानकारी के मुताबिक कई साल पहले तक अल्मोड़ा-रानीखेत-रामनगर दिल्ली, अल्मोड़ा-लमगड़ा-बरेली, अल्मोड़ा-शीतलाखेत- रानीखेत रूटों पर बसों का संचालन होता था।
इन बसों के संचालन से पर्वतीय क्षेत्र के हजारों ग्रामीण लाभान्वित होते थे। लोड फैक्टर कम होने के कारण इन बसों का संचालन लंबे समय से बंद है। इन रूटों पर यात्रियों को अब केमू और टैक्सियों का ही सहारा मिलता है।
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कुछ रूटों पर केमू की बसें भी नहीं चलती हैं। रोडवेज की बसों की अपेक्षा टैक्सियों का किराया काफी ज्यादा है। इस कारण टैक्सियों से सफर करने पर यात्रियों की जेब भी ढीली होती है।
पर्वतीय रूटों पर नहीं चलतीं रोडवेज की बसें
दिल्ली-अल्मोड़ा-लमगड़ा-बरेली
अल्मोड़ा-शीतलाखेत-रानीखेत
अल्मोड़ा-खेती-बरेली
अल्मोड़ा-बागेश्वर-रीमा दोफाड़
अल्मोड़ा-ध्याड़ी
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़-झूलाघाट
अल्मोड़ा-रानीखेत-झूलाघाट
अल्मोड़ा-दन्यां-भनोली-खेती
कुछ समय पूर्व तक मजखाली के लिए रोडवेज की बस चलती थी। वर्तमान में सेवा का संचालन बंद है। इस कारण मजखाली से जिला मुख्यालय अल्मोड़ा आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बस का संचालन जल्द किया जाए। - ललित अधिकारी, मजखाली
पर्वतीय क्षेत्रों में रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने के कारण यात्री काफी परेशान है। जिला मुख्यालय आने जाने के लिए टैक्सी ही एकमात्र सहारा है। यहां से अल्मोड़ा जाने के लिए टैक्सी का किराया 100 रुपये है। जिससे यात्रियों की जेब ढीली हो रही है। - हरीश कपकोटी, लमगड़ा
यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए निगम तत्पर है। वर्तमान में रोडवेज की शिड्यूल की सभी बसों का संचालन किया जा रहा है। निगम के दिशा-निर्देशों के तहत ही बसें संचालित की जा रही है। यात्रियों को किसी भी तरह की दिक्कतें नहीं होने दी जाएंगी। - विजय तिवारी, एजीएम रोडवेज डिपो अल्मोड़ा
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प्रदेश के पर्वतीय और दूरस्थ मार्गों पर रोडवेज की बसों का संचालन बेहद कम है। इन जगह यात्रियों के लिए केमू की बसें और टैक्सियां ही जीवनरेखा मानी जाती है। रोडवेज से मिली जानकारी के मुताबिक कई साल पहले तक अल्मोड़ा-रानीखेत-रामनगर दिल्ली, अल्मोड़ा-लमगड़ा-बरेली, अल्मोड़ा-शीतलाखेत- रानीखेत रूटों पर बसों का संचालन होता था।
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इन बसों के संचालन से पर्वतीय क्षेत्र के हजारों ग्रामीण लाभान्वित होते थे। लोड फैक्टर कम होने के कारण इन बसों का संचालन लंबे समय से बंद है। इन रूटों पर यात्रियों को अब केमू और टैक्सियों का ही सहारा मिलता है।
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कुछ रूटों पर केमू की बसें भी नहीं चलती हैं। रोडवेज की बसों की अपेक्षा टैक्सियों का किराया काफी ज्यादा है। इस कारण टैक्सियों से सफर करने पर यात्रियों की जेब भी ढीली होती है।
पर्वतीय रूटों पर नहीं चलतीं रोडवेज की बसें
दिल्ली-अल्मोड़ा-लमगड़ा-बरेली
अल्मोड़ा-शीतलाखेत-रानीखेत
अल्मोड़ा-खेती-बरेली
अल्मोड़ा-बागेश्वर-रीमा दोफाड़
अल्मोड़ा-ध्याड़ी
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़-झूलाघाट
अल्मोड़ा-रानीखेत-झूलाघाट
अल्मोड़ा-दन्यां-भनोली-खेती
कुछ समय पूर्व तक मजखाली के लिए रोडवेज की बस चलती थी। वर्तमान में सेवा का संचालन बंद है। इस कारण मजखाली से जिला मुख्यालय अल्मोड़ा आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बस का संचालन जल्द किया जाए। - ललित अधिकारी, मजखाली
पर्वतीय क्षेत्रों में रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने के कारण यात्री काफी परेशान है। जिला मुख्यालय आने जाने के लिए टैक्सी ही एकमात्र सहारा है। यहां से अल्मोड़ा जाने के लिए टैक्सी का किराया 100 रुपये है। जिससे यात्रियों की जेब ढीली हो रही है। - हरीश कपकोटी, लमगड़ा
यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए निगम तत्पर है। वर्तमान में रोडवेज की शिड्यूल की सभी बसों का संचालन किया जा रहा है। निगम के दिशा-निर्देशों के तहत ही बसें संचालित की जा रही है। यात्रियों को किसी भी तरह की दिक्कतें नहीं होने दी जाएंगी। - विजय तिवारी, एजीएम रोडवेज डिपो अल्मोड़ा