फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Promotion work is not possible at the premises without changing rules

नियम बदले बिना उद्गम स्थल पर संवर्द्धन कार्य संभव नहीं

Mon, 24 Apr 2017 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 24 Apr 2017 10:20 PM IST
विज्ञापन

वैज्ञानिकों का सुझाव है कि दिनों दिन सूख रही नदियों और गाड़-गधेरों को पुनर्जीवित और रिचार्ज करने के लिए नदियों के उद्गम स्थल और जल संग्रहण क्षेत्रों के आसपास जल संवर्द्धन के कार्य किए जाने चाहिए, लेकिन नदियों के अधिकांश उद्गम स्थल रिजर्व फॉरेस्ट में स्थित हैं। रिजर्व फॉरेस्ट में किसी भी तरह के यांत्रिक कार्य करने पर रोक है। यही वजह है कि आज तक नदियों के उद्गम स्थलों में जल संवर्द्धन के कार्य नहीं हो सके हैं। जानकारों का मानना है कि नदियों के उद्गम स्थल पर जल संवर्द्धन के कार्य करने के लिए वन नीति में भी परिवर्तन किया जाना चाहिए।             

विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि पहाड़ी इलाकों में अधिकतर नदियों का जल स्तर लगातार घट रहा है। हाल के कुछ दशकों में अल्मोड़ा जिले से होकर निकलने वाली कोसी, गगास, पश्चिमी रामगंगा, सरयू, पनार आदि प्रमुख नदियों की दर्जनों सहायक नदियां और सैकड़ों गाड़, गधेरे सूख गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश का पानी पर्याप्त मात्रा में धरती के भीतर नहीं पहुंचने से जल स्रोत रिचार्ज नहीं होते हैं जिससे भूमिगत जल भंडार समाप्त होते जा रहे हैं। अल्मोड़ा जिले के भटकोट रिजर्व फॉरेस्ट के अंतर्गत स्थित धार पानी धार पर 11 छोटी नदियों का उद्गम स्थल है। इनमें कोसी, गगास, गोमती, तड़ागताल की सहायक नदियां शामिल हैं। कुछ दशक पहले तक गर्मी में भी इन नदियों के उद्गम स्थल पर काफी पानी रहता था, लेकिन हाल के कुछ सालों में भूमिगत जल भंडार समाप्त हो जाने के कारण यह नदियां उद्गम स्थल पर ही सूख जाती हैं।             
विज्ञापन


लंबे समय से कुमाऊं की नदियों पर अध्ययन कर रहे कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में भूगोल विभाग के प्रोफेसर और भूगोल विभाग के अंतर्गत संचालित एनआरडीएमएस के निदेशक डा. जेएस रावत का कहना है कि इन नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए धारपानीधार के ऊपर की तरफ यांत्रिक कार्य करने की जरूरत है जिससे बारिश का अधिक से अधिक पानी धरती के भीतर चला जाए। उन्होंने इस स्थान पर छोटे-छोटे गड्ढे (इन्फिल्ट्रेशन ट्रंच) और इन्फिल्ट्रेशन होल बनाने के साथ ही गधेरों का पानी रोकने के लिए छोटे-छोटे अवरोध बनाने का सुझाव दिया है, लेकिन वन कानूनों की जटिलता के चलते इस पर तुरंत कार्य हो पाना संभव नहीं है। दरअसल वन कानूनों के मुताबिक रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कोई अन्य विभाग किसी भी तरह के यांत्रिक कार्य नहीं कर सकता। हालांकि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने धारपानी धार इलाके में जल संवर्द्धन कार्य के लिए कोई योजना भी तैयार नहीं की।             

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed