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खतरे में उत्तराखंडी अस्मिता विषय पर संगोष्ठी
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संगोष्ठी में शामिल होने आए लोग।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की ओर से ‘खतरे में है उत्तराखंडी अस्मिता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में त्रिवेंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कृषि भूमि की असीमित खरीद काले कानून को निरस्त करने की मांग उठी। इस दौरान आगामी 27 सितंबर को किसान आंदोलन के भारत बंद का समर्थन करने पर भी सहमति बनी।
संगोष्ठी में उत्तराखंड को पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य क्षेत्रों की तरह संविधान के अनुच्छेद 371 के अंतर्गत संरक्षण के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने और पर्वतीय क्षेत्रों में बेनाप भूमि को ग्राम समाज को सौंपने की मांग की गई। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार नवीन जोशी ने कहा कि उत्तराखंडियों ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को देश और दुनिया में बखूबी स्थापित किया पर पूर्वोत्तर राज्यों की तरह यहां की राजनीतिक अस्मिता की रक्षा करने में चूक गए।
इसकी वजह से राज्य की यह दुर्दशा हुई है। राज्य बनने के बाद यहां प्राकृतिक संसाधनों, जल, जंगल जमीन की निर्मम लूट हुई है, जिसकी वजह से सशक्त भू कानून की मांग उठ रही है। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि यहां की अस्मिता को बचाने के लिए एकजुट होना बहुत जरूरी हो गया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर दत्त जोशी, कर्मचारी नेता चंद्रमणि भट्ट, डॉ. हयात सिंह रावत, पैरा मिलिट्री (सेवानिवृत्त) संघ के मंडलीय अध्यक्ष मनोहर सिंह नेगी, जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेश परिहार आदि ने भी अपने विचार रखे।
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संगोष्ठी में उत्तराखंड को पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य क्षेत्रों की तरह संविधान के अनुच्छेद 371 के अंतर्गत संरक्षण के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने और पर्वतीय क्षेत्रों में बेनाप भूमि को ग्राम समाज को सौंपने की मांग की गई। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार नवीन जोशी ने कहा कि उत्तराखंडियों ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को देश और दुनिया में बखूबी स्थापित किया पर पूर्वोत्तर राज्यों की तरह यहां की राजनीतिक अस्मिता की रक्षा करने में चूक गए।
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इसकी वजह से राज्य की यह दुर्दशा हुई है। राज्य बनने के बाद यहां प्राकृतिक संसाधनों, जल, जंगल जमीन की निर्मम लूट हुई है, जिसकी वजह से सशक्त भू कानून की मांग उठ रही है। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि यहां की अस्मिता को बचाने के लिए एकजुट होना बहुत जरूरी हो गया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर दत्त जोशी, कर्मचारी नेता चंद्रमणि भट्ट, डॉ. हयात सिंह रावत, पैरा मिलिट्री (सेवानिवृत्त) संघ के मंडलीय अध्यक्ष मनोहर सिंह नेगी, जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेश परिहार आदि ने भी अपने विचार रखे।