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बरसात आते ही पेशानी पर चिंता की लकीरें
Mon, 24 Jun 2019 11:21 PM IST
दीपक नेगी
almora
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Published by: दीपक नेगी
Updated Mon, 24 Jun 2019 11:21 PM IST
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जूनियर हाईस्कूल के भवन में शरण लिए खैरखेत और बूढ़ाधार के आपदा प्रभावित।
- फोटो : amar ujala
भैंसियाछाना ब्लॉक के खैरखेत गांव के आपदा प्रभावितों को नौ साल बाद भी विस्थापित नहीं किया जा सका है। इधर बरसात नजदीक होने से आपदा प्रभावितों को फिर से चिंता सताने लगी है। आने वाली बरसात में इलाके में फिर से भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।
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बता दें कि 2010 में आयी आपदा से बूढ़ाधार और खैरखेत के ग्रामीणों की करीब डेढ़ सौ नाली भूमि भूस्खलन की भेंट चढ़ गई थी और ग्रामीणों की काफी मात्रा में कृषि भूमि मलबे से पट गई थी। तब से आज तक आपदा पीड़ित खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। आठ दलित परिवारों के 36 लोग बीते नौ सालों से पास में स्थित जूनियर हाईस्कूल के भवन में जिंदगी बिता रहे हैं। इन परिवारों को आज तक विस्थापित नहीं किया जा सका। पूर्व में जिला प्रशासन ने इनके विस्थापन के लिए प्रस्ताव भी भेजा था।
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इस प्रस्ताव के तहत इन्हें मंगलता गांव के निकट विस्थापित किया जाना था लेकिन इसे आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। आज तक इन लोगों के लिए आवास नहीं बन सके। जिस स्कूल में आपदा प्रभावित दिन बिता रहे हैं वहां न तो बिजली कनेक्शन है और ना ही पानी की व्यवस्था है। हालत यह है कि इन लोगों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन भी नहीं मिला और खुले में चूल्हा जलाकर किसी तरह भोजन की व्यवस्था करते हैं। प्रभावित परिवारों ने बताया कि पिछले नौ सालों में उन्हें सिर्फ आश्वासनों में ही छला गया और आज तक आवास नसीब नहीं हुए। इन हालातों में इन परिवारों के युवाओं के रिश्ते भी नहीं हो पा रहे हैं। यह लोग किसी तरह मजदूरी करके पेट पाल रहे हैं।
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