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सिंचाई विभाग की क्षतिग्रस्त डेढ़ दर्जन नहरें नहीं दुरुस्त
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अल्मोड़ा। सिंचाई विभाग की अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत क्षतिग्रस्त डेढ़ दर्जन नहरें सालों बाद भी दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। जिस कारण सिंचित क्षेत्रों के किसानों को खेती के लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। घाटी वाले इलाकों में इन दिनों धान की रोपाई का सीजन भी चल रहा है। इस कारण काश्तकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सिंचाई विभाग के अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत हवालबाग, ताकुला, लमगड़ा, धौलादेवी और भैंसियाछाना विकासखंड में कुल 128 नहरें हैं। जिनकी कुल लंबाई 323.72 किमी है। 128 नहरों में से स्रोतों में पानी नहीं होने पर 12 नहरों का विभाग पूर्व में ही परित्याग कर चुका है। जबकि 18 नहरें क्षतिग्रस्त चल रही हैं।
यह नहरें आपदा और सड़कों के निर्माण के चलते आए मलबे से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इनमें से कई नहरों के हैड भी क्षतिगस्त पड़े हैं। जिनको विभाग दुरुस्त नहीं कर सका है। पानी के अभाव में सिंचित क्षेत्रों में खेती के लिए किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। खेती के लिए किसान बारिश पर ही निर्भर हैं।
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विभाग के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि नहरों के रखरखाव और क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त करने के लिए शासन को 3.46 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से विभाग को मात्र दस फीसदी ही बजट मिल पाया है। जिससे नहरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
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सिंचाई विभाग के अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत हवालबाग, ताकुला, लमगड़ा, धौलादेवी और भैंसियाछाना विकासखंड में कुल 128 नहरें हैं। जिनकी कुल लंबाई 323.72 किमी है। 128 नहरों में से स्रोतों में पानी नहीं होने पर 12 नहरों का विभाग पूर्व में ही परित्याग कर चुका है। जबकि 18 नहरें क्षतिग्रस्त चल रही हैं।
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यह नहरें आपदा और सड़कों के निर्माण के चलते आए मलबे से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इनमें से कई नहरों के हैड भी क्षतिगस्त पड़े हैं। जिनको विभाग दुरुस्त नहीं कर सका है। पानी के अभाव में सिंचित क्षेत्रों में खेती के लिए किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। खेती के लिए किसान बारिश पर ही निर्भर हैं।
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विभाग के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि नहरों के रखरखाव और क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त करने के लिए शासन को 3.46 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से विभाग को मात्र दस फीसदी ही बजट मिल पाया है। जिससे नहरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।